नई दिल्ली। कम वायुमंडलीय दाब के चारों ओर गर्म हवाओं की तेज आंधी को चक्रवात कहते हैं। दक्षिणी गोला‌र्द्ध में इन गर्म हवाओं को चक्रवात के नाम से जानते हैं और ये घड़ी की सुई केचलने की दिशा में चलती हैं। जबकि उत्तरी गोला‌र्द्ध में इन गर्म हवाओं को हरीकेन या टाइफून कहा जाता है। ये घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में घूमती हैं।

क्यों आता है चक्रवात?

गर्म क्षेत्रों के समुद्र में सूर्य की भयंकर गर्मी से हवा गर्म होकर अत्यंत कम वायुदाब का क्षेत्र बना देती है। हवा गर्म होकर तेजी से ऊपर आती है और ऊपर की नमी की मदद से बादलों का निर्माण करती हैं। रिक्त स्थान को भरने के लिए नम हवाएं तेजी के साथ नीचे जाकर ऊपर आती हैं। फलस्वरूप ये हवाएं बहुत ही तेजी के साथ प्रभावित क्षेत्र के चारों तरफ घूमकर घने बादलों और बिजली कड़कने के साथ-साथ मूसलाधार बारिश करती हैं। कभी-कभी तो तेज घूमती इन हवाएं हजारों किमी के दायरे में चलती हैं।

नाम पड़ने के पीछे भी है 'विज्ञान' :

विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) और युनाइटेड नेशंस इकोनामिक एंड सोशल कमीशन फार एशिया एंड पैसिफिक (ईएससीएपी) द्वारा जारी चरणबद्ध प्रक्रियाओं के तहत ही किसी चक्रवात का नामकरण किया जाता है।

उत्तरी हिंद महासागर के चक्रवात:

आठ उत्तरी भारतीय समुद्री देश (बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, और थाईलैंड) एक साथ मिलकर आने वाले चक्रवातों के 64 (हर देश आठ नाम) नाम तय करते हैं। जैसे ही चक्रवात इन आठों देशों के किसी हिस्से में पहुंचता है, सूची से अगला दूसरा सुलभ नाम इस चक्रवात का रख दिया जाता है। इस प्रक्रिया के चलते तूफान की आसानी से पहचान और बचाव अभियानों में मदद मिलती है। किसी नाम का दोहराव नहीं किया जाता है।

इन आठ देशों द्वारा साल 2004 से नामकरण की शुरूआत की गई। इस बार नाम रखने की बारी ओमान की थी लिहाजा उसकेसूची में प्रस्तावित नाम हुदहुद था। चक्रवातों के नाम रखने की प्रवृत्ति ऑस्ट्रेलिया से शुरू हुई। 19वीं सदी में यहां चक्रवातों का नाम भ्रष्ट राजनेताओं के नाम पर रखा जाने लगा था।

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Posted By: vivek pandey

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