नई दिल्‍ली (आनलाइन डेस्‍क)। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन द्वारा मंकीपाक्‍स को विश्‍व में हेल्‍थ इमरजेंसी घोषित करने के बाद लोगों के मन में इसका डर होनना स्‍वाभाविक है। लोगों को इस बात का भी डर है कि कहीं ये भी कोरोना महामारी की ही तरह लोगों के बीच न फैल जाए। इसको लेकर कुछ गलतफहमियां भी लोगों के अंदर घर कर गई हैं। इसलिए बेहतर है कि इसको लेकर सही जानकारी हमारे पास हो, जिससे हम अपना और अपने परिवार की सुरक्षा इस बीमारी से कर सकें।

आइये इस पर डालते हैं एक नजर :-

  • विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक मंकीपाक्‍स की चपेट में आने पर मौत होने की आशंका काफी कम है। संगठन के मुताबिक कुल मामलों के 1 से 10 फीसद मौत इस बीमारी से हो सकती हैं। इनमें भी इस बीमारी के लक्षण और उनकी स्‍टेज पर काफी कुछ निर्भर करता है।
  • डब्‍ल्‍यूएचओ के मुताबिक नवजात शिशु का इस बीमारी से संक्रमित होना जरूर चिंता की बात है। इस तरह के मामलों में शिशु की मृत्‍यु होने की आशंका किसी व्‍यस्‍क के मुकाबले अधिक होती है।
  • मंकीपाक्‍स से संक्रमित किसी जानवर के संपर्क में आने पर ये व्‍यक्ति इंसान को हो सकती है। इसलिए ऐसा करने से बचाव जरूरी है।
  • उन देशों में जहां पर ये बीमारी जानवरों के माध्‍यम से फैल रही है वहां पर जानवरों के संपर्क में आए किसी भी फल या सब्‍जी को अच्‍छे से पकाकर खाना बेहद जरूरी होता है।
  • मंकीपाक्‍स से संक्रमित व्‍यक्ति के अंदर मामूली और गंभीर दोनों ही तरह के लक्षण हो सकते हैं।
  • गर्भवति महिला, बच्‍चों और जरूरी वैक्‍सीन न लेने वाले बच्‍चों को इससे बचाव की सख्‍त जरूरत है।
  • इसके लक्षणों में बुखार का आना, कमर का दर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी महसूस करना, लसीका ग्रंथियों में सूजन, हेाती है। इसके अलावा शरीर के विभिन्‍न हिस्‍सासें पर दो से तीन सप्‍ताह के अंतर रेशेज पड़ना भी इसके लक्षणों में शामिल है।
  • शुरुआत में ये एक रेशेज में पहले सामान्‍य दिखाई देते हैं फिर ये फोड़े में तब्‍दील हो जाते हैं। है। ये शरीर के किसी भी हिस्‍से में सैकड़ों तक हो सकते हैं।
  • मंकीपाक्‍स से संक्रमित किसी भी व्‍यक्ति के संपर्क में आने पर सबसे पहले स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र पर अपनी जांच कराने जरूर जाना चाहिए।
  • इस बीमारी के इंसान से इंसान में फैलने की केवल एक वजह शरीरिक संपर्क होता है।
  • विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन फिलहाल इस बात की जांच करने में जुटा है कि आखिर ये कितने समय तक इंसान के शरीर में बना रह सकता है।
  • इससे संक्रमित व्‍यक्ति के किसी भी जगह या कपड़े आदि को छूने से भी ये फैल सकता है।
  • इसके अलावा संक्रमित व्‍यक्ति के सांस लेने छींकने या खांसने से भी ये बीमारी दूसरे व्‍यक्ति को लग सकती है। इन सभी जरिये से ये वायरस ट्रेवल कर सकता है।
  • यदि ये किसी व्‍यक्ति के मुंह से शुरू होता है तो इसका अर्थ साफ है कि उसका किसी से डायरेक्‍ट कांटेक्‍ट हुआ है।
  • मंकीपाक्‍स से संक्रमित किसी भी गर्भवति महिला से उसके नवजात शिशु में इसके लक्षण आना स्‍वाभाविक है। इसका असर उसके पेट में पल रहे बच्‍चे पर भी जरूर पड़ता है।
  • व‍िश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक कुछ मामलों में इसका वायरस वीर्य में भी मिला है। हालांकि अब तक ये तय नहीं हो सका है कि वेजिनल फ्लूड, एम्निओटिक फ्लूड या खून से ये संक्रमण फैलता है या नहीं।
  • ये संक्रमित व्‍यक्ति से किसी स्‍वस्‍थ्‍य जानवर में भी ट्रेवल कर सकता है।
  • विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक अपने आसपास पूरी तरह से साफ सफाई रखना इससे बचाव का सबसे सीधा और सरल उपाय है।
  • दूसरे व्‍यक्ति के इस वायरस से संक्रमित होने की आशंका पर उससे दूरी बनाकर रखना जरूरी है।
  • आपके आसपास यदि इससे संक्रमित कोई व्‍यक्ति या जानवर मिलता है तो इसकी सूचना संबंधित एजेंसी को करना बेहद जरूरी है।
  • इससे संक्रमित होने या इसकी आशंका होने पर तुरंत डाक्‍टर को संपर्क करें और खुद को आइसोलेट कर लें।
  • इस बीमारी से सही होने के करीब 12 सप्‍ताह तक शारीरिक संबंध बनाते समय सुरक्षा बरतनी बेहद जरूरी है।  

Edited By: Kamal Verma

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