नई दिल्‍ली (जागरण स्‍पेशल)। नित नए रूप देखे राम की लीला के पर ऐसा न देखा... जहां एकांत भी है...प्रेम भी और रौद्र रूप भी। हर भाव की अभिव्यक्ति नृत्य की भावनाओं के साथ मंच पर सुसज्जित है। शास्त्रीय नृत्य यह संगम... कथक, भरतनाट्यम, ओडिशी जैसी अद्भुत नृत्य कलाओं को समाए हुए है। कलरिपायट्ट है तो छउ जैसी कई पारंपरिक मार्शल आर्टस भी इसी लीला में समाहित हैं। प्रतीत होता है...नृत्य, रामायण के हर अध्याय को सोपान में बांधे आगे बढ़ी जा रही है।

दर्शक भी मायूस थे...मादा क्रौंच की व्यथा पर...व्याध के तीर से उसके जीवन साथी का अंत हो गया। एक क्षण पहले ही तो दोनों शांत और शीतल वातावरण में कलकल करती तमसा नदी के तट पर प्रेम भाव में मशगूल थे। मायूस...मासूम मादा क्रौंच के इस दुख और विलाप पर वाल्मीकि का  हृदय द्रवित हो उठा और उनके मुख से श्लोक फूट पड़ा :

मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगम शास्वती समा।
यत्क्रौंचमिथुनादेकमवधी काममोहितम्।। 

निषाद। तुझे कभी भी शांति न मिले, क्योंकि तूने इस क्रौंच के जोड़े में से एक की, जो काम से मोहित हो रहा था, बिना किसी अपराध के ही हत्या कर डाली। 

हर दृश्य के साथ जुड़ जाएंगे
वाल्मिकी ने जिस रौद्र रूप भाव के साथ मंच पर इस श्लोक का उवाच किया दर्शक भी उससे खुद जुड़े जा रहे थे। तकनीक और कला के इस अद्भुत संयोजन को...संगम को दर्शक समझ ही नहीं पा रहे थे कि वह नृत्य-नाटक देख रहे हैं। बस वे तो हर मार्मिक दृश्य के साथ स्वयं उस पल, उस क्षण में पात्र के साथ कैद हुए जा रहे थे।

हर बार कुछ नया
यूं तो नृत्य पर आधारित 62वीं संपूर्ण रामलीला का मंचन बरसों पुराना है। लेकिन फिर भी हर शारदीय नवरात्र में इसमें किए गए नित नए प्रयोग संपूर्ण रामलीला मंच पर दर्शकों को कुछ नया देते हैं। भगवान राम के संपूर्ण जीवन से लोग अच्छी तरह परिचित हैं, रावण के साथ उनके युद्ध की बात भी कोई नई नहीं है, लेकिन उसी कहानी को किस तरह और रोचक और आकर्षक बनाकर पेश किया जाए ताकि दर्शक प्रभावित हों, इस बात पर काफी ध्यान दिया जा रहा है। 10-12 साल पहले तक यह लीला अवधि भाषा में होती थी, लेकिन ज्यों-ज्यों दर्शकों की चाहत बढ़ती गई इसके संवाद हिंदी में बदलते गए। नृत्य-नाटक के साथ स्क्रीन पर पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के जरिए कहानी अंग्रेजी में भी लिखकर बताई जाती है ताकि लोगों को समझ आए। 

दूरदर्शन पर भी हुई थी प्रसारित 
1957 में इसका मंचन शुरू हुआ था। तब मशहूर कवि रामधारी सिंह दिनकर ने रामायण की चौपाइयों को संगीत दिया, तो तपस सेन ने सेट डिजाइन किया। यह रामलीला इतनी मशहूर हुई कि जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, एस राधाकृष्णन, इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी और अटल बिहारी बाजपेयी तक इसे देखने आए। कई बार इस लीला में विदेशियों ने भी अदायगी की। विगत सालों में इंडोनेशिया, बांग्लादेश और अमेरिका के कलाकार भी इसमें शामिल हुए। यह पहली रामलीला थी जो दूरदर्शन पर भी टेलिकास्ट की गई थी। 

क्‍या कहती हैं शोभा 
संर्पूण रामलीला की निर्देशक शोभा दीपक सिंह कहती हैं कि मैं तेरह साल की थी जब इसकी शुरुआत हुई। मेरी मां सुमित्रा चरण राम ने बहुत कम पैसों में इसे शुरू किया था। उस समय हमारे पास नृत्य कलाकार भी नहीं थे। लिहाजा, मैं और मेरी बहन बंदर एवं राक्षस बनती थीं। आज तो 40 से ज्यादा नृत्य कलाकार हमारे साथ हैं। 

राम और रावण का दिलचस्प युद्ध
10 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चलने वाली इस संपूर्ण रामलीला में राम की जिंदगी के सभी पहलुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। संपूर्ण रामलीला दर्शकों को असत्य पर सत्य की विजय की गाथा से रूबरू कराएगी। 

ताकि सीख सकें नैतिकता 
संपूर्ण रामायण का एक नया रूप नेताजी सुभाष प्लेस, पीतमपुरा में भी देखने को मिलेगा। आर्यन हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा आयोजित संपूर्ण रामायण की शुरुआत भगवान राम के प्रसंगों से नहीं, बल्कि वाल्मीकि द्वारा लव-कुश को दी जा रही शिक्षा से होगी। इसके पीछे आयोजकों का मकसद युवाओं को नैतिक ज्ञान देना है। यहां बच्चे सिर्फ रामायण ही नहीं देखेंगे, बल्कि प्रत्येक कहानी के पीछे छिपी नैतिक कहानियों से भी रूबरू होंगे। निर्देशक राजेंद्र मित्तल का कहना है कि यह पीढ़ियों से चली आ रही वह परंपरा है, जिसे आगे बढ़ाने का काम हर एक नागरिक का है। युवाओं को संपूर्ण रामायण देखने के दौरान रोमांच महसूस हो, इसलिए स्टेज से लेकर संवाद तक पर विशेष ध्यान दिया गया है। हर दृश्य में थ्रीडी इफेक्ट देखने को मिलेगा। इसकी भाषा भी साधारर्ण हिंदी रखी गई है ताकि लोगों को आसानी से संवाद समझ में आ जाएं। 

इसके अलावा सभी दर्शक आरती में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने का अनुभव ले सकें, इसलिए आरती के समय सभी को मोमबत्ती दी जाएगी। वे जलती हुई मोमबत्ती के साथ आरती में शामिल होंगे। इसमें कई प्रसिद्ध कलाकार भी हिस्सा लेंगे। बीआर चोपड़ा के ऐतिहासिक रामायण धारावाहिक के संगीत निर्देशक राज कमल के बेटे चंद्र कमल ने संपूर्ण रामायण का संगीत तैयार किया है, जिसे उदित नारायण ने आवाज दी है। वहीं रावण का परिचय कराने वाले ऐतिहासिक गीत को कैलाश खेर ने अपनी आवाज दी है। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा समेत अन्य संस्थाओं के कुल 120 कलाकार संपूर्ण रामायण को जीवंत बनाएंगे। शो में कुल 16 गीत होंगे। 180 फीट ऊंचे स्टेज पर मंझे हुए कलाकारों का अभिनय दर्शकों को हर दृश्य के साथ कनेक्ट करेगा।

प्रस्तुति : संजीव कुमार मिश्र 

Posted By: Kamal Verma