नई दिल्ली [स्पेशल डेस्क] । एशिया की दो महाशक्तियां भारत और चीन एक दूसरे को ध्यान में रखकर कई सामरिक महत्व के निर्माण करते रहते हैं। भारत के अन्य पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यामार और श्रीलंका में चीन अपने सामरिक ठिकाने बना रहा है। यही नहीं चीन अपनी जमीन पर भी भारतीय सीमा के पास सामरिक महत्व के जबरदस्त निर्माण कार्यों में जुटा हुआ है। इधर भारत ने भी अब चीन से आंख में आंख डालकर बात करने की रणनीति पर आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। इसी का नतीजा है कि भारत चीन सीमा के पास लगातार सामिरक महत्व के निर्माण कर रहा है। असम और अरुणाचल प्रदेश को जोड़ने के लिए ब्रह्मपुत्र नदी पर बने 9.15 किमी लंबे पुल को इसी कड़ी में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया उद्घाटन

भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार को शपथ लिए आज तीन साल पूरे हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे पुल 9.15 किमी के ढोला-सदिया ब्रिज को देश को समर्पित किया। यह कार्यक्रम न सिर्फ केंद्र की मोदी सरकार के तीन साल होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, बल्कि असम सरकार के एक साल पूरा होने पर भी राज्यभर में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। बता दें कि पुल का एक छोर सदिया है और यह वही स्थान है, जहां मशहूर संगीतकार भुपेन हजारिका का जन्म हुआ था।

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देश का सबसे लंबा पुल है धौला-सदिया

ढोला सदिया देश का अब तक का सबसे लंबा पुल है। इसकी लंबाई 9.15 किमी है और यह मौजूदा समय में सबसे लंबे बांद्रा-वर्ली सी लिंक 5.6 किमी (मुंबई) से 3.55 किमी लंबा है। इसके अलावा बिहार के भागलपुर नें गंगा नदी पर बना विक्रमशिला सेतु की लंबाई 4.7 किमी, केरल में वेम्बानंद झील पर बने वेम्बानंद रेल पुल की लंबाई 4.62 किमी है। बिहार के ही पटना में गंगा नदी पर बना दीघा-सोनपुर ब्रिज 4.5 किमी और आरा में गंगा नदी पर बना आरा-छपरा ब्रिज 4.3 किमी लंबा है। 950 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुए इस पुल का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था।

पुल बनने से स्थानीय लोगों को क्या फायदा

मौजूदा समय में तेजपुर में कलिया भोमोरा के बाद अगले 375 किमी तक ब्रह्मपुत्र नदी पर कोई पुल नहीं है। फिलहाल नदी के दोनों तटों के आर-पार सामान ले जाने के लिए पानी का ही रास्ता है, लेकिन यह पुल बन जाने से स्थानीय लोगों को खासा फायदा होगा और नदी के दोनों तरफ रहने वाले लोगों के करीब 8 घंटे तक बचेंगे। इस पुल के चालू होने से असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच यात्रा के समय में 4 घंटे तक की कटौती होगी। इस पुल के बन जाने से स्थानीय लोगों को नजदीकी रेलवे स्टेशन तिनसुकिया और एयरपोर्ट डिब्रूगढ़ पहुंचने में आसानी होगी।

 

सामरिक महत्व

देश का यह सबसे लंबा पुल 60 टन के युद्धक टैंक के भार को झेल सकता है। यह पुल इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां से चीन बॉर्डर की हवाई दूरी करीब 100 किमी है। इस पुल के जरिए सेनाओं की चीन बॉर्डर (वैलोंग-किबिथू सेक्टर) तक आवाजाही आसान हो जाएगी। 1962 के युद्ध के समय यह हिस्सा उत्तर-पूर्व के तवांग क्षेत्र में आता था। यह पुल असम की राजधानी दिसपुर से करीब 540 और अरुणाचल प्रदेश की राजधानी इटानगर से करीब 300 किमी की दूरी पर बना है।

सबसे लंबा रोड-रेल पुल भी बन रहा है यहां

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तर-पूर्व पर अब केंद्र सरकार की नजर है और यहां विकास के तमाम कार्य करवाए जा रहे हैं। यहां बोगीभील में ब्रह्मपुत्र नदी पर एक रोड-रेल ब्रिज बन रहा है जिसके 2018 में पूरा होने की उम्मीद है। डिब्रुगढ़ शहर के पास बन रहे इस पुल की लंबाई 4.94 किमी है, यह न सिर्फ भारत का सबसे लंबा रोड-रेल ब्रिज है पूर्व की तरफ भारत का आखिरी ब्रिज है। ढोला-सदिया की तरह की इस पुल का भी खासा सामरिक महत्व है। इसके निर्माण को 1996 में मंजूरी मिली थी और 2002 में पहली भाजपा-एनडीए सरकार ने इसमें पहल की थी।

चीन बॉर्डर के पास अन्य प्रोजेक्ट

चीन से मिलने वाली किसी भी तरह की चुनौती से निपटने के लिए भारत अब उत्तर की सीमाओं तक पहुंचने के रास्ते सुगम बनाने में लगा हुआ है। इसके अलावा पाकिस्तान हमेशा की तरह भारत के लिए मुसीबतें खड़ी कर रहा है। कश्मीर घाटी में पहुंचने के लिए हाल ही में सरकार ने जम्मू-कश्मीर के चनैनी और नाशरी के बीच बनी यह 9.28 किमी लंबी सुरंग देश की सबसे लंबी सुरंग का उद्घाटन किया है। यह सुरंग विपरीत मौसम में भी चालू रहेगी। इसके अलावा उत्तराखंड में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग पर भी बात आगे बढ़ गई है। यह रेल मार्ग भी सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इसी तरह से उत्तराखंड में बन रहे ऑल वेदर रोड को भी पर्यटन के अलावा सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

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