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मानसून सत्र से पहले सियासी तकरार: विपक्ष के वॉकआउट पर रिजिजू बोले- किसी के अधिकारों की अनदेखी नहीं कर सकते

Published: Sun, 19 Jul 2026 05:13 PM (IST)

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में एनसीपीआई को आमंत्रित करने के सरकार के फैसले ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) को आमंत्रित करने के सरकार के फैसले का बचाव किया है।

दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने अलग होकर एनसीपीआई का गठन किया है। इन बागी सांसदों को बैठक में बुलाए जाने के विरोध में कई विपक्षी दलों ने सांकेतिक वॉकआउट किया था। हालांकि, अपना विरोध दर्ज कराने के बाद वे वापस बैठक में लौट आए।

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में रिजिजू ने कहा कि सरकार ने पूरी तरह से संसदीय नियमों का पालन किया है। विपक्ष के विरोध पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि एनसीपीआई ने लोकसभा अध्यक्ष से मान्यता देने का अनुरोध किया है। आप इसे कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं? सभी को आमंत्रित करना सरकार का कर्तव्य है।

मानसून सत्र के लिए विपक्ष से सहयोग की अपील

संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि सोमवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र के लिए आठ बिल सूचीबद्ध किए गए हैं। इसके अलावा यदि कोई अन्य विधायी कार्य होता है, तो उसे संसदीय नियमों के अनुसार ही लिया जाएगा। रिजिजू ने सभी दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने बैठक में विभिन्न दलों द्वारा रखे गए विचारों और सुझावों को गंभीरता से सुना है। विपक्ष के वॉकआउट पर टिप्पणी करते हुए मंत्री ने कहा कि यह केवल एक सांकेतिक कदम था।

उन्हें उम्मीद है कि सभी विपक्षी दल समझदारी से काम लेंगे और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि संख्या बल के आधार पर चर्चा होती है, लेकिन किसी को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

टीएमसी ने उठाए सवाल

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा एनसीपीआई बनाने वाले 20 बागी टीएमसी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था को मंजूरी दिए जाने के बाद विपक्षी दलों ने यह वॉकआउट किया था। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार के इस कदम पर तीखे सवाल उठाए।

महुआ ने कहा कि स्पीकर ने अब तक इन बागी सांसदों के विलय को मंजूरी नहीं दी है और उनके खिलाफ अयोग्यता की याचिकाएं अभी भी लंबित हैं। उन्होंने तर्क दिया कि टेबल ऑफिस द्वारा दी गई सूची में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 28 बताई गई है।

91वें संशोधन के बाद किसी अलग गुट के लिए कोई जगह नहीं बचती। ऐसे में संसदीय कार्य मंत्री ने इन 20 बागी सांसदों को किस आधार पर आमंत्रित किया? टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने भी इस निमंत्रण पर कड़ी आपत्ति जताई।

एनसीपीआई का तर्क

टीएमसी की आपत्तियों के बीच एनसीपीआई नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने बैठक में अपनी पार्टी की भागीदारी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पार्टी सरकार की ओर से आधिकारिक निमंत्रण मिलने के बाद ही इस बैठक में शामिल हुई है।

गौरतलब है कि शनिवार को किरेन रिजिजू ने टीएमसी के बागी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय और एनसीपीआई में शामिल हुए 19 अन्य लोकसभा सांसदों को मानसून सत्र से पहले होने वाली इस पारंपरिक सर्वदलीय बैठक के लिए आमंत्रित किया था।

इसके साथ ही, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार को इस बैठक के लिए पार्टी के चीफ व्हिप के रूप में मान्यता दी गई थी। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा।

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