नई दिल्ली। एयर इंडिया और किंगफिशर के पायलटों की हड़ताल से हवाई सेवा शुक्रवार को भी पूरी तरह से अस्तव्यस्त है। शुक्रवार को अब तक एयर इंडिया की 10 से अधिक जबकि किंगफिशर की 12 उड़ानें रद्द हो चुकी है। समस्या का समाधान निकलता नहीं देख उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने आज सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर इस मसले पर चर्चा की। दोनों से मिलने के बाद अजित सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हड़ताली पायलट हमारे सब्र की परीक्षा न लें। साथ ही उन्होंने कहा कि अभी हम इस पर एस्मा लगाने पर विचार नहीं कर रहे हैं। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एयर इंडिया के पायलटों की हड़ताल पर दखल देने से इन्कार कर दिया है।

पायलटों की हड़ताल का खामियाजा सबसे अधिक यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। संकट से जूझ रही एयर इंडिया ने गुरुवार को अमेरिका, कनाडा व यूरोप की उड़ानों के लिए 15 मई तक टिकट बुकिंग बंद कर दी है।

इंडियन पायलट गिल्ड से जुडे़ 200 से ज्यादा पायलटों के काम पर लौटने से इन्कार करने के बाद एयर इंडिया ने कहा है कि वह न्यूयार्क, न्यूजर्सी, शिकागो, टोरंटो, लंदन, पेरिस और फ्रैंकफर्ट के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द कर रही है।

इसके साथ ही कुछ अन्य देशों के लिए उड़ानें भी स्थगित की जा सकती हैं। एयर इंडिया ने गुरुवार को और नौ पायलटों को बर्खास्त कर दिया, जिससे इन बर्खास्त पायलटों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है।

हड़ताली पायलटों ने इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से हस्तक्षेप कर मामला सुलझाने की मांग की है।

इंडियन पायलट गिल्ड के अध्यक्ष जितेंद्र ने कहा कि यह मामला पायलटों के करियर के लिए जीने मरने का सवाल है। आईपीजी ने एयर इंडिया के प्रबंधन के साथ बातचीत की है लेकिन उन्होंने अपना वादा नहीं निभाया।

इसबीच, नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने कहा है कि यदि पायलट अदालत के आदेश का पालन नहीं करते तो वह मंत्री की क्या सुनेंगे।

उधर, ड्रीमलाइनर एयरक्राफ्ट के लिए पायलटों को प्रशिक्षित करने के आदेश के क्रियान्वयन में कथित अवरोध डालने के लिए इंडियन पायलट्स गिल्ड के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की मांग करने वाली एयरइंडिया की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इन्कार कर दिया।

न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर की पीठ ने कहा कि पायलटों ने ऐसा कुछ नहीं किया जो अदालत की अवमानना के दायरे में आता हो और एयरलाइन को सलाह दी कि उनके साथ अपने मतभेदों को।

पीठ ने कहा कि उन्होंने न्याय को अवरूद्ध करने या अदालत की अवमानना के लिए कुछ नहीं किया। आपकी समस्या उनके साथ है। आप उनके साथ बैठिए और मतभेदों को सुलझाइए। अदालत की अवमानना का सहारा मत लीजिए।

न्यायालय ने कहा कि अगर हड़ताल अवैध है तो एयरलाइन उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। पीठ ने कहा कि अगर अदालत की जरा सी भी अवमानना होगी तो हम उनके खिलाफ खुद ही कार्यवाही शुरू करेंगे।

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