तिरुअनंतपुरम, प्रेट्र। हाल ही में पोप फ्रांसिस द्वारा संत घोषित की गई केरल की नन मरियम थ्रेसिया दुनिया भर के अपने श्रद्धालुओं के बीच सम्मानजनक स्थान पा चुकी हैं। लेकिन एक नवजात बच्चे के स्वस्थ होने में उनके चमत्कार का प्रमाण देने वाले केरल के डॉक्टर संकट में घिर गए हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) की केरल इकाई ने अपनी आचार समिति से डॉ. वीके श्रीनिवासन द्वारा दिए गए प्रमाण की जांच करने को कहा है।

त्रिचूर स्थित अमला इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ श्रीनिवासन से आइएमए ने आचार का उल्लंघन पर विचार करने के बारे में जवाब मांगा है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, क्रिस्टोफर नामक एक नवजात सांस लेने की गंभीर समस्या से जूझ रहा था। 2009 में उसकी दादी ने मरियम थ्रेसिया का स्मारक उसकी बेड पर रख दिया जिसके बाद उसकी हालत में सुधार आ गया।

शिशु में आए चमत्कारिक सुधार की बाद में डॉ. श्रीनिवासन ने पुष्टि की। इसी के आधार पर वेटिकन ने नन को संत घोषित किया है। चमत्कार की पुष्टि वेटिकन द्वारा किसी को संत मानने की शर्तों में शामिल है। बता दें कि नन मरियम का जन्म 26 अप्रैल, 1876 को केरल के त्रिशूर जिले में जबकि 08 जून, 1926 को महज 50 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया था। बीते दिनों उनकी मत्यु के 93 साल बाद उन्‍हें संत की उपाधि दी गई थी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने 'मन की बात' कार्यक्रम के दौरान नन मरियम को दी जाने वाली संत की उपाधि का जिक्र किया था। पीएम मोदी ने कहा था कि भारत उन असाधारण लोगों की जन्मभूमि और कर्मभूमि रहा है जो दूसरों के लिए जीते और उनके लिए काम करते हैं। नन मरियम को संत की उपाधि उनके द्वारा महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए किए गए कार्यों को देखते हुए दी गई थी।  

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