केरल विधानसभा चुनाव: सबरीमाला पर CPM का U-TURN, ये है भाजपा का 60% वोट हासिल करने वाला प्लान
केरल विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया है। सीपीएम, कांग्रेस और भाजपा तीनों हिंदू वोटों को साधने ...और पढ़ें

केरल विधानसभा चुनाव में क्या है CMP और भाजपा का प्लान?

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नीलू रंजन, नई दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव में पहली बार हिंदुत्व राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। हिंदू वोटों को एकजुट करने के लिए सीपीएम, कांग्रेस और भाजपा तीनों हिंदुत्व से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।
सबरीमाला में रजस्वला महिलाओं के प्रवेश को लेकर सीपीएम के रूख में परिवर्तन केरल में बदलते राजनीतिक परिदृश्य का परिणाम है।
केरल के सबसे बड़े इडवा समुदाय के सामाजिक संगठन श्री नारायण गुरू धर्म पालम (एसएनडीपी) के प्रमुख वेल्लापल्ली नतेशन खुलेआम केरल में भी हिंदुओं के एकजुट होने की अपील कर चुके हैं।
दरअसल केरल में पिछले पांच दशक से सीपीएम के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार रही है।
हिंदुत्व राजनीतिक विमर्श का मुख्य केंद्र
दोनों ही विपक्षी आईएनडीएआइ गठबंधन में है और भाजपा के हिंदुत्व की राजनीति के मुखर विरोधी रहे हैं। लेकिन भाजपा के बढ़ते प्रभाव और हिंदू वोटों के छिटकने के खतरे ने सीपीएम को हिंदू कार्ड खेलने पर मजबूर कर दिया है।
2018 में सबरीमाला मंदिर में रजस्वला महिलाओं के प्रवेश के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करने वाली सीपीएम ने अब यूटर्न ले लिया है और त्रावणकोर देवासन बोर्ड की ऐसी महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की पुरानी परंपरा के पालन के रूख का समर्थन किया है।
वैसे सबरीमाला मंदिर में रजस्वला महिलाओं के प्रवेश के समर्थन के बावजूद 2021 में एलडीएफ लगातार दूसरी बार जीतने में सफल रही थी, लेकिन इस बार परिस्थितियां पूरी तरह से बदल चुकी हैं। वैसे भाजपा और कांग्रेस ने सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मुद्दे के सहारे सीपीएम की हिंदुओं को साधने को काटने की कोशिश की।
वैसे पिछले साल 20 सितंबर को ग्लोबल अयप्पा संगमम में दुनिया भर के अयप्पा भक्तों को जुटाकर मुख्यमंत्री पी विजयन ने सीपीएम के रूख में बदलाव का संकेत दे दिया था। सबरीमाला मंदिर भगवान अयप्पा से जुड़ा है।
CPM खुलकर खेल रही हिंदुत्व कार्ड
दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में मिली हार के बाद सीपीएम खुलकर हिंदुत्व का कार्ड खेल दिया। विजयन सरकार में मंत्री और सीपीएम के वरिष्ठ नेता साजी चेरियन ने मुसलमानों पर धार्मिक वजह से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को वोट देने का आरोप लगाया।
चेरियन के अनुसार हिंदू जहां भाजपा को वोट दे रहे हैं, वहीं मुस्लिम आईयूएमएल को वोट दे रहे हैं और पंथनिरपक्ष सीपीएम को कोई नहीं पूछ रहा है। आईयूएमएल यूडीएफ की प्रमुख घटक दल है, जो 24 फीसद मुस्लिम आबादी की राजनीति करती है। हिंदू वोटों के खिसकने से सीपीएम के 46 साल के वर्चस्व को खत्म कर पहली बार भाजपा केरल का राजधानी तिरूवनंतपुरम में अपना मेयर बनाने में सफल रही।
क्या है भाजपा का प्लान?
भाजपा की कोशिश केरल में लगभग 55-60 फीसद हिंदू आबादी में पैठ बनाने की है। 24 फीसद आबादी वाले इडवा समुदाय से जुड़े नतेशन को पद्म भूषण से सम्मानित कर भाजपा ने उन्हें साधने की कोशिश की है।
मकर संक्रांति के अवसर पर सबरीमाला के समर्थन में 10 हजार स्थानों पर दीप जलाकर भाजपा ने हिंदू जागरण का प्रयास कर चुकी है, जो सीपीएम के आधार हिंदू वोट बैंक के लिए बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है। वहीं आइयूएमएल के साथ गठबंधन के कारण कांग्रेस भले ही खुलकर हिंदुत्व की बात नहीं कर रही है, लेकिन लगभग 15 फीसद आबादी वाले नायर वोटबैंक को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
