नई दिल्ली [अजय पांडेय]। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बोलने के लिए खड़े हुए और सदन में सन्नाटा छा गया। केजरीवाल बोल रहे थे और पूरा सदन चुपचाप उन्हें सुन रहा था। सबकी आंखें मुख्यमंत्री के चेहरे पर मानो चस्पां हो गई थीं। कुछ देर पहले तक उन्हें निर्लज्ज, बच्चों की कसम खाकर उसे तोड़ने वाले, राजनीतिक नौटंकी करने वाले आदि तरह-तरह के आरोप लगाने वालों की जुबान पर मानो ताला जड़ दिया गया था।

लोक निर्माण मंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा पेश किए गए विश्वास प्रस्ताव पर चली साढ़े चार घंटे की चर्चा का जवाब देने के लिए जैसे ही मुख्यमंत्री खड़े हुए आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने जोरदार तरीके से मेजें थपथपाकर उनका स्वागत किया। दर्शक दीर्घा में पहुंचे पार्टी के समर्थक कायदे-कानून भूल ताली पीटने लगे। उसके बाद चारों ओर सन्नाटा छा गया। बीच-बीच में सिर्फ कैमरों के शटर की आवाज भर सुनाई दे रही थी। केजरीवाल के पूरे भाषण को सुनकर लगा कि किसी भी राजनेता को उत् तेजित कर देने वाले तमाम आरोपों को मानो उन्होंने सुना तक नहीं था। उन्होंने न तो किसी आरोप का जवाब दिया और न ही अपनी ओर से किसी पर कोई आरोप ही लगाया। बस वे अपनी धुन में बोल रहे थे।

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किसी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जाएगा

मुख्यंमत्री ने कहा कि मैं सदन को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि चाहे पिछली सरकार हो, एमसीडी हो अथवा आम आदमी पार्टी की सरकार हो, किसी भी भ्रष्टाचार करने वाले को नहीं बख्शा जाएगा।

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क्या है आम आदमी की परिभाषा

केजरीवाल ने आम आदमी की परिभाषा भी बताई। भाजपा के साहब सिंह चौहान द्वारा रेहड़ी, पटरी वालों, छोले बेचने वालों, चाय बेचने वाले लोगों को आम आदमी बताए जाने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं इन लोगों के साथ-साथ मध्यम वर्ग के लोगों को भी आम आदमी मानता हूं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति आम आदमी है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ है। जो बेईमानी चाहता है, वही खास आदमी है।

सरकार बचाने नहीं आया

केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की किसी भी पार्टी से कोई दुश्मनी नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं यहां सरकार बचाने नहीं आया। हम लोग छोटे लोग हैं, मामूली आदमी हैं। हमने कभी चुनाव लड़ने, जीतने और सरकार बनाने की नहीं सोची। उन्होंने कहा कि आम आदमी को आजादी के 65 साल बाद भी दो जून की रोटी, शिक्षा, स्वास्थ्यच् अच्छी न्याय व्यवस्था नहीं मिली। आज हम सबको मिलकर यह सोचने की जरूरत है।

आम आदमी को मत ललकारना

उन्होंने कहा कि गरीबों के कल्याण के लिए बहुत पैसा खर्च हुआ लेकिन वह कहां गया? उन्होंने कहा कि इस देश की राजनीति भ्रष्ट हो गई है। उन्होंने कहा कि यदि चारों ओर खराबी नजर आ रही है तो इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस देश की राजनीति भ्रष्ट हो गई है। उन्होंने कहा कि दो साल पहले देश के आम आदमी ने सड़क पर उतर कर नेताओं से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त कानून बनाने की मांग की थी। लेकिन नेताओं ने हमें ललकारा। कहा कि खुद चुनाव लड़कर दिखाओ। उन्हें शायद यह मुगालता था कि आम आदमी भला कहां से चुनाव लड़ेगा लेकिन उन्होंने ऐसा कह कर जिंदगी की सबसे बड़ी भूल कर दी।

केजरीवाल के 17 मुद्दे :

अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में 17 मुद्दों की चर्चा कर तमाम विधायकों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उनका समर्थन करने की अपील की।

1. वीआइपी कल्चर खत्म करना : नेता के लिए ट्रैफिक न रुके, सुरक्षा का तामझाम न हो।

2. जनलोकपाल बिल : ऐसा सख्त कानून पास हो कि भ्रष्टाचारियों की रूह कांप उठे।

3. स्वराज की कल्पना साकार हो : जनता का पैसा कहां खर्च हो यह जनता तय करे।

4. न्याय व्यवस्था अच्छी हो : अदालतों की संख्या बढ़े, जजों की संख्या बढ़ाई जाए।

5. दिल्ली को पूर्ण राच्य का दर्जा मिले।

6. बिजली कंपनियों के खातों की जांच कराई जाए।

7. बिजली के मीटरों की जांच कराई जाए।

8. शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

9. अनधिकृत कॉलोनियों की हालत सुधरे।

10. झुग्गी-झोंपड़ी बस्तियों की समस्याओं का समाधान हो।

11. ठेका पर कर्मचारी का चलन बंद हो, जो कर्मचारी ठेके पर हैं उन्हें नियमित किया जाए।

12. व्यापार उद्योग की हालत सुधरे। व्यापारियों को आराम से धंधा करने दिया जाए।

13. खुदरा बाजार में एफडीआइ का विरोध।

14. राजधानी के गांव-देहातों की हालत सुधरे।

15. शिक्षा की अच्छी व्यवस्था हो। सरकारी स्कूलों की हालत सुधरे, निजी स्कूलों के डोनेशन पर रोक लगे।

16. बेहर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले।

17. महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला सुरक्षा दल बने।

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