यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 08, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
केजरीवाल ने ताजा कर दी राजनारायण व जार्ज की याद
नई दिल्ली। देश को सूचना का अधिकार [आरटीआइ] कानून दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले आम आदमी पार्टी [आप] के ...और पढ़ें

नई दिल्ली। देश को सूचना का अधिकार [आरटीआइ] कानून दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले आम आदमी पार्टी [आप] के नेता अरविंद केजरीवाल दिल्ली विधान सभा के चुनाव में सही मायने में विनाशक के तौर पर उभरे हैं। साल भर में जिस तरह से उन्होंने अपनी पार्टी खड़ी की और चुनावों के जरिये सियासी क्षितिज पर धमाकेदार एंट्री की, वह उनकी इस नई भूमिका को साबित करने के लिए काफी है। पिछले पंद्रह वर्षो से दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित को उनके गढ़ नई दिल्ली में जैसी करारी शिकस्त दी, उससे लोकबंधु राजनारायण और जार्ज फर्नाडिस की याद ताजा हो गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 1977 के आम चुनावों में राजनारायण ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके गढ़ रायबरेली में जिस बुरी तरह हराया था, ठीक वैसा ही केजरीवाल ने शीला के नई दिल्ली किले को ध्वस्त करके किया है। कुछ का तो यहां तक मानना है कि आप नेता ने पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाडिस की तरह ही चुनावी राजनीति में पदार्पण किया है। अपने जमाने के तेजतर्रार ट्रेड यूनियन लीडर जार्ज ने 1967 के चौथे आम चुनाव में मुंबई के कद्दावर व अपराजेय माने जाने वाले कांग्रेस नेता एसके पाटिल को हराया था। आजादी के बाद से लगातार सांसद बनते आ रहे पाटिल के खिलाफ जार्ज ने नारा दिया था, 'पाटिल जरूर हारेगा, आप उसे हराओगे।'
विश्लेषकों के अनुसार केजरीवाल ने भी ठीक उसी अंदाज में शुरू से ही शीला दीक्षित पर आक्रामक तरीके से हमला बोलना शुरू कर दिया। चुनावों के दौरान 'दिल्ली में इस बार चलेगी झाड़ू' और 'ईमानदार बनाम बेइमान' और 'पहले लड़ा गोरों से अब लड़ेंगे चोरों से' जैसे आकर्षक नारे दिए और उनका जादू चल गया। भाजपा से मामूली अंतर से पिछड़ी नवंबर, 2012 में बनी आम आदमी पार्टी 1885 में स्थापित इंडियन नेशनल कांग्रेस को दिल्ली चुनावों में तीसरे स्थान पर धकेल कर खुद दूसरे नंबर पर काबिज हो गई।
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