श्रीनगर [जागरण ब्यूरो]। कश्मीर को हिंदुस्तान के मुकुट का हीरा करार देते हुए प्रख्यात संगीतकार जुबिन मेहता ने दोबारा धरती के इस जन्नत में अपने सुरों को बिखेरने की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि वह जितना पारसी हैं, उतना कश्मीरी भी। उनका प्रयास है कि संगीत के जरियेकश्मीरियों की आहत भावनाओं को मरहम लगाया जाए।

अपने म्यूजिकल कंसर्ट 'एहसास-ए-कश्मीर' की प्रस्तुति के बाद रविवार को पत्रकारों से बातचीत में 77 वर्षीय जुबिन मेहता ने कार्यक्रम को सियासी रंग दिए जाने पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि 'हम संगीतकार हैं, सियासी लोग नहीं। हम सरहदों को नहीं बदल सकते, लेकिन हम अपने संगीत से मरहम लगा सकते हैं। अगर आप कश्मीर की बात करते हैं तो यहां 60 साल से सियासी लोगों ने काम किया है, उन्हें सफलता नहीं मिली। चलो अब संगीत का, प्रेम का, आध्यात्म का रास्ता चुनें। मुझे लगता है कि शनिवार को प्रेम और आध्यात्म के रास्ते की शुरुआत हुई है, क्योंकि शालीमार बाग में सभी धर्माें के लोग, हिंदू-मुसलमान सब एक साथ ही थे।'

हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए जुबिन मेहता ने कहा कि 'गिलानी साहब हम आपके दोस्त हैं। लेकिन शायद आप इस पर यकीन नहीं करते। मुझे अफसोस है कि आप हमारे कार्यक्रम में नहीं आए। अगर आप और वे सभी लोग जो हमारे खिलाफ थे, आए होते तो वह संगीत का मजा लेते। खुद महसूस करते कि इसमें सियासत नहीं बल्कि प्रेम और सौहार्द था।' बावेरियन आर्केस्ट्रा के संचालक जुबिन ने कहा कि 'मैं चाहता हूं कि यहां दोबारा आऊं क्योंकि कश्मीर वाकई जन्नत है।'

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