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नफरती भाषण बिल पर कर्नाटक में रार... राज्यपाल में सरकार को वापस भेजे बिल, सिद्दरमैया बोले- उन्हें देंगे जानकारी

Published: Sat, 10 Jan 2026 11:12 PM (IST)

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने विधानसभा द्वारा पारित दो बिलों को स्पष्टीकरण के लिए सरकार को लौटा दिया है, ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने कहा कि वह राज्यपाल से मिलेंगे

मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने कहा कि वह राज्यपाल से मिलेंगे

HighLights

  1. राज्यपाल ने दो बिल स्पष्टीकरण हेतु सरकार को लौटाए।

  2. नफरती भाषण बिल पर मुख्यमंत्री सिद्दरमैया देंगे स्पष्टीकरण।

  3. भाजपा ने बिल को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश बताया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा द्वारा पारित दो बिलों को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्पष्टीकरण के लिए राज्य सरकार को वापस भेज दिया है, जबकि 19 लंबित बिलों को मंजूरी दे दी। इन बिलों के अलावा, कर्नाटक नफरती भाषण और नफरती अपराध (रोकथाम) बिल राज्यपाल के पास विचाराधीन है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने कहा कि वह राज्यपाल से मिलेंगे और नफरती भाषण बिल के बारे में उन्हें विस्तृत स्पष्टीकरण देंगे। वहीं, भाजपा की कर्नाटक इकाई ने शनिवार को कहा कि वह राज्यपाल से नफरती भाषण बिल को मंजूरी न देने का आग्रह करेगी, क्योंकि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगेगा।

22 बिलों में से 19 को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी और राजपत्र में प्रकाशन के लिए भेज दिया गया है। दो बिल, कर्नाटक अनुसूचित जाति (उप-वर्गीकरण) बिल और श्री चामुंडेश्वरी क्षेत्र विकास प्राधिकरण एवं अन्य कानून (संशोधन) बिल, को स्पष्टीकरण के लिए सरकार को वापस भेज दिया गया है।'' भाजपा के विरोध के बावजूद कर्नाटक विधानसभा ने हाल ही में नफरती भाषण और नफरती अपराध (रोकथाम) बिल पारित कर दिया। इसमें एक लाख रुपये तक के जुर्माने और सात साल तक के कारावास का प्रविधान है।

बिल के अनुसार, किसी व्यक्ति (जीवित या मृत), वर्ग, समूह या समुदाय के प्रति शत्रुता, घृणा या दुर्भावना उत्पन्न करने के इरादे से किसी भी प्रकार से सार्वजनिक रूप से व्यक्त, प्रकाशित या प्रसारित की गई कोई भी अभिव्यक्ति नफरती भाषण कहलाती है। यह अभिव्यक्ति शब्दों, मौखिक या लिखित रूप में, संकेतों, दृश्य प्रस्तुतियों, इलेक्ट्रानिक संचार या किसी अन्य माध्यम से की गई हो सकती है, और किसी भी पूर्वाग्रही हित की पूर्ति के लिए की गई हो सकती है।

धर्म, जाति, नस्ल, समुदाय, ¨लग, लैंगिक पहचान, जन्म स्थान, निवास स्थान, भाषा, विकलांगता या जनजाति के आधार पर पूर्वाग्रह को भी नफरती भाषण की श्रेणी में रखा गया है। भाजपा ने इसे विपक्ष के विरुद्ध 'ब्रह्मास्त्र' बताया है।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)