नई दिल्ली, [जागरण स्पेशल]। पाकिस्तानी सेना के चार बड़े अधिकारियों ने साल 1999 में कारगिल की पूरी व्यूह रचना की थी। इन्हें पाकिस्तान में डर्टी फोर और गैंग ऑफ फोर भी कहा जाता है। चोरी-छिपे भारत में घुसपैठ कराना और फिर 1984 में सियाचीन का बदला लेने के साथ ही कश्मीर हथियाने का प्लान भी इन चारों ने बनाया था। हालांकि, वे अपने मंसूबों में सफल नहीं हुए। इससे पहले हम बात कर चुके हैं कि कैसे डर्टी फोर ने पूरा प्लान बनाया और अपने सैनिकों को आतंकवादियों की शक्ल में कारगिल भेजा। डर्टी फोर के इस डर्टी गेम में आगे चलकर तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी शामिल हुए और पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी। चलिए जानते हैं इस डर्टी गेम की आगे की कड़ी।

डर्टी फोर का डर्टी गेम
इस डर्टी फोर को कारगिल प्लान पर काम करते हुए करीब छह महीने का वक्त गुजर चुका था। मई का महीना आधा गुजर चुका था और पाकिस्तानी सेना के डीजीएमओ, डीजीएमआई, आईएसआई, एयरफोर्स चीफ, नौसेना किसी को भी इस खतरनाक प्लान के बारे में जानकारी नहीं थी। सभी को सिर्फ इतना ही पता था कि एलओसी के पास कुछ हो रहा है, किसी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि मुजाहिदीनों (आतंकियों) की शक्ल में पाकिस्तानी सैनिक भारतीय सीमा में इतने अंदर तक घुस चुके हैं। अब मई का महीना आधे से ज्यादा गुजर चुका था और भारत का ऑपरेशन विजय पूरे चरम पर था। इस वक्त पाकिस्तान को डर्टी फोर के इस डर्टी गेम के बारे में पता चला।

यह भी पढ़ें : निभाया वादा- कहा था पांच को आऊंगा...आए भी पर तिरंगे में लिपटकर, आखिरी खत आज भी देता है प्रेरणा

नवाज शरीफ की भूमिका
पाकिस्तान में जानकारों के अनुसार नवाज शरीफ को डर्टी 4 के इस ऑपरेशन कारगिल के बारे में बहुत कम जानकारी थी। जनवरी में उन्हें स्कर्दू लेकर जाया गया और कश्मीर के बारे में ब्रीफिंग की गई। इस दौरान कारगिल के बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया और कश्मीर में आतंकियों की कार्रवाई का ड्रामा रचा गया। इसके बाद खेल नाम की एक जगह ले जाया गया और स्कर्दू की तरह वहां भी ड्रामा रचा गया। इसके बाद फरवरी 1999 में भी उन्हें इसी तरह से उलझाया गया। फिर बात मई के शुरुआती दिनों में आती है।

आईएसआई कैंप ओजड़ी में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, विदेश मंत्री सरताज अजीज, डीजीएमओ तौकीर जिया, डीजीएमआई एहसान, कश्मीर मामलों के मंत्री जनरल मजीद मलिक, रक्षा सचिव जनरल इफ्तखार आदि सभी मौजूद थे। तौकीर जिया ने इस ब्रीफिंग में एक नक्शा दिखाया, लेकिन उस नक्शे में एलओसी को नहीं दिखाया गया। इसमें सिर्फ यह दिखाया गया कि यहां-यहां पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी हैं और यहां-यहां भारतीय सेना मौजूद है। दिलचस्प बात है कि अब तक भी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को नहीं बताया गया था कि ये आतंकवादी नहीं बल्कि हमारे सैनिक हैं।

इसी ब्रीफिंग में नवाज शरीफ को बताया गया कि हमने भारतीय सेना को सेटल कर दिया है। उनके हथियारों को कब्जे में लिया है और सप्लाई लाइन तोड़ दी है। उनसे कहा गया अब ज्यादा देर नहीं जब भारतीय पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से बार्गेनिंग की पोजिशन में होंगे। अब आप चिंता न करें, सियाचीन भी हमें मिल जाएगा। अगर भारत ने कोई और मोर्चा खोलने की कोशिश की, कश्मीर से सेना को हटाया तो कश्मीर भी हम उनसे ले लेंगे। नवाज शरीफ से कहा गया, बस इसके बाद तो आपका नाम पाकिस्तान के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना के बाद आपका ही नाम पाकिस्तान में लिया जाएगा। इस बात से नवाज शरीफ की बांछें खिल गईं। उन्होंने कहा आपका प्लान ठीक है, बस मुझे जानकारी देते रहना।

यह भी पढ़ें :  क्या है Kargil War और Madhuri Dixit का कनेक्शन, पाकिस्तानी सैनिकों ने की थी ये डिमांड?

तीन लोगों को ओजड़ी कैंप में हुआ शक
इन तीनों को लग रहा था कि कुछ न कुछ छिपाया जा रहा है, हम जो सवाल पूछ रहे हैं उसके जवाब भी हमें नहीं मिल रहे हैं। ये तीनों थे - विदेश मंत्री सरताज अजीज, कश्मीर मामलों के मंत्री जनरल मजीद मलिक और रक्षा सचिव जनरल इफ्तखार। कहा जाता है कि ओजड़ी से वापस जाते वक्त जनरल इफ्तखार ने नवाज शरीफ से कहा- आपको पता है ये कोई मुजाहिदीन नहीं है, बल्कि हमारी सेना के जवान हैं और एलओसी पार करके 10 किमी अंदर भारतीय सीमा में गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ी परेशानी का सबब बन सकता है, लेकिन आप तो प्लान को ओके कर आए हो। इस पर नवाज शरीफ को झटका लगा, उन्होंने एक और ब्रीफिंग की बात कही। 18-19 मई 1999 तक नवाज शरीफ को डर्टी फोर के इस डर्टी गेम के बारे में पूरी जानकारी मिल गई थी। उधर अटल बिहारी वाजपेयी ने भी नवाज शरीफ को फोन करके घुसपैठ के बारे में बताया, लेकिन उन्हें भी पूरी जानकारी नहीं थी कि घुसपैठिए आतंकवादी हैं या पाकिस्तानी सेना के जवान।

यह भी पढ़ें : भाई के बाद भतीजा भी सेना के लिए तैयार, 20 वर्ष की उम्र में शहीद हो गए थे सिपाही धर्मेंद्र सिंह

चीन से लीक हुई पाकिस्तान के घुसपैठ की खबर
जनरल परवेज मुशर्रफ चीन के राष्ट्रीय दौरे पर थे। इस दौरान वे चीन के एक होटल में ठहरे हुए थे। परवेज मुशर्रफ और जनरल अजीज के बीच दो बार बातचीत हुई। इस बातचीत को किसी ने टेप कर लिया। पाकिस्तान में एक आम धारणा है कि चीन ने तो यह बातचीत टेप नहीं की होगी, अगर की भी होगी तो उसने भारत को तो नहीं ही दी होगी। अगर चीन ने यह बातचीत रिकॉर्ड की होगी तो हो सकता है उसने अमेरिका को दे दी होगी। उसे भी डर होगा कि दोनों परमाणु शक्ति हैं। अमेरिका को यह टेप देते हुए उसने कहा होगा- देखो दोनों क्या करने जा रहे हैं, रोको इनको। इस तरह अमेरिका से यह टेप भारत को मिले होंगे। अब दुनिया को पता चल चुका था कि कारगिल में आतंकवादी नहीं बल्कि पाकिस्तानी सेना के ही जवान आतंकवादियों की शक्ल में बैठे हैं।

भारत की जवाबी कार्रवाई

अब मई के अंतिम दिनों में बात पहुंच चुकी थी। दुनिया को पाकिस्तान की करतूत पता चल चुकी थी और दुनियाभर से पाकिस्तान पर दबाव बन रहा था। इधर भारत ने अपनी सरजमीं की रक्षा के लिए ऑपरेशन विजय शुरू कर दिया था। भारत ने अपनी वायुसेना को युद्ध में उतार दिया था। हेलिकॉप्टर वहां पहुंच चुके थे, मिग और मिराज विमानों ने मोर्चा संभाल लिया था। भारत ने अपनी सबसे घातक बोफोर्स तोपें युद्ध के मैदान में उतार दी थीं। दूसरी तरफ पाकिस्तान अब भी यह मानने को तैयार नहीं था कि कारगिल की चोटियों पर उसके अपने सैनिक हैं आतंकवादी नहीं। इसलिए पाकिस्तान उनकी मदद के लिए न तो वायुसेना को भेज पा रहा था न ही पीछे से अन्य सैनिकों की मदद। भारत ने 20 मई 1999 के बाद रूस, चीन, अमेरिका, यूरोपीयन यूनियन यानि पूरी दुनिया को बताया कि पाकिस्तान ने क्या किया है। भारत ने पूरी दुनिया को बताया कि कश्मीर में आतंकियों की कमर टूट रही थी, तो पाकिस्तान ने इस तरह की हरकत की है। भारत ने कहा कि हम इन्हें अब नहीं छोड़ेगें और एक-एक पाकिस्तानी को अपनी जमीन से खदेड़कर ही दम लेंगे।

यह भी पढ़ें : Kargil Vijay Diwas- सलाम! शहादत के बाद भी परिवार का जज्बा नहीं हुआ कम

डर्टी फोर को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि भारत इतनी बड़ी संख्या में बोफोर्स तोपों को कारगिल में उतार देगा। पाकिस्तानी जानकार भी मानते हैं कि साल 1999 के कारगिल युद्ध में बोफोर्स ने भारत को बड़ी बढ़त दिलाई।

डर्टी 4 के तीन भ्रम
1. डर्टी फोर ने जब कारगिल प्लान बनाया उस वक्त उनका आकलन था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत की बजाय पाकिस्तान का साथ देगा। क्योंकि हम बताएंगे कि यह सब तो कश्मीर की वजह से हुआ है और वहीं के मुजाहिदीनों ने हथियार उठाए हुए हैं। भारत कश्मीर का मसला सुलझाए तो उसकी परेशानियां दूर हो जाएंगी। ऐसा हुआ नहीं और पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत के साथ खड़ा दिया, उन्होंने उल्टा पाकिस्तान को कहा कि यह तो आपका खेल है। आपके सैनिकों ने घुसपैठ की है। आपको यहां से निकलना पड़ेगा।

यह भी पढ़ें : Kargil Vijay Diwas- जानिए कैसे पाकिस्तान में सिर्फ चार लोगों ने रच डाली थी कारगिल की पूरी साजिश

2. डर्टी फोर को लगा था कि वे मुजाहिदीन बताकर अपने सैनिकों को कारगिल भेज रहे हैं तो उन्हें कश्मीर में लोगों का साथ मिलेगा, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। उल्टा कश्मीर और कश्मीरियत के चाहने वाले लोगों ने भारतीय फौजों का भरपूर साथ दिया।

3. हालांकि, डर्टी फोर ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अंधेरे में रखकर कारगिल प्लान बनाया था, फिर भी उन्हें यकीन था कि उन्हें पूरी तरह से पीएम का साथ मिलेगा। ऐसा भी नहीं हुआ। एक वक्त ऐसा भी आया, जब नवाज शरीफ पर भारत, अमेरिका और ब्रिटेन से इतना प्रेशर आया कि उन्होंने अमेरिका और ब्रिटेन से ही मदद मांगी कि हमें इस मुसीबत से किसी तरह से निकालिए। वरना भारतीय फौजें हमें उड़ाकर रख देंगी। एक बड़ी बात यह भी रही कि चीन ने पाकिस्तान की बिल्कुल भी मदद नहीं की। इसीलिए वो जो टेप लीक हुए थे उसे लेकर पाकिस्तानी आज भी मानते हैं कि वे चीन ने ही किए होंगे, ये उसी के इंटेलिजेंस का काम हो सकता है।

Posted By: Digpal Singh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस