नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। जनता दल यूनाइटेड के सिंबल पर दावे की चुनाव आयोग में जारी लड़ाई के बीच शरद यादव और अली अनवर को अपनी राज्यसभा सदस्यता बचाने के लिए 30 अक्टूबर को सभापति वेंकैया नायडू के समक्ष पेश होना होगा। जदयू संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह की शिकायत के मद्देनजर सभापति ने शरद को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। शरद यादव ने भी राज्यसभा सदस्यता बचाने की इस निर्णायक सियासी लड़ाई में नीतीश गुट को कानूनी चुनौती पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है।

समझा जाता है कि शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता बचाने की कानूनी लड़ाई प्रसिद्ध वकील वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल लड़ेंगे। सूत्रों के मुताबिक सभापति के सामने अपना पक्ष रखने के लिए शरद अपने वकील के साथ वेंकैया नायडू से रुबरू होंगे। शरद और अनवर की राज्यसभा सदस्यता पार्टी विरोधी कार्यो के आधार पर रद्द करने की नीतीश गुट के तर्को की बुनियाद को ही शरद खेमा कानूनी रुप से गलत ठहराने की तैयारी कर रहा है। साथ ही सभापति के सामने इसे पार्टी में विभाजन के तौर पर पेश किया जाएगा।

मालूम हो कि नीतीश कुमार के भाजपा का दामन थामने से नाराज शरद यादव ने उनके फैसले का विरोध किया था। साथ ही नीतीश कुमार की सलाह की अनदेखी करते हुए शरद और उनके समर्थक पटना में राजद की अगस्त में हुई रैली में भी हिस्सा लिया था। इससे खफा नीतीश ने पहले शरद यादव को राज्यसभा में जदयू संसदीय दल के नेता पद से हटा दिया और आरसीपी सिंह को नया नेता घोषित कर दिया। इसके बाद आरसीपी सिंह ने शरद और अली अनवर की सदस्यता रद्द करने की याचिका सभापति को सौंपी। राज्यसभा सचिवालय ने इस पर शरद और अनवर को पहले नोटिस जारी किया। इन दोनों ने अपना पक्ष रखने के लिए सभापति से एक महीने का समय मांगा था। इस लिहाज से 30 अक्टूबर को सभापति के समक्ष होने वाली सुनवाई शरद और अनवर की सदस्यता पर फैसले को लेकर बेहद अहम मानी जा रही है।

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Posted By: Manish Negi

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