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कभी घरों में धोती थीं बर्तन, अब बंगाल में बन गईं विधायक... कलिता माजी ने कैसे रचा इतिहास?

Published: Tue, 05 May 2026 12:05 PM (GMT+05:30)Updated: Tue, 05 May 2026 12:20 PM (GMT+05:30)

कलिता माजी, जो कभी 2,500 रुपये के लिए दूसरों के बर्तन धोती थी, अब पश्चिम बंगाल की ऑसग्राम विधानसभा सीट से विधायक बन गई हैं।

कलिता माजी की फाइल फोटो। (सोर्स - सोशल मीडिया)

कलिता माजी की फाइल फोटो। (सोर्स - सोशल मीडिया)

HighLights

  1. कलिता माजी ऑसग्राम सीट से भाजपा विधायक बनी

  2. पहले 2,500 रुपये में करती थीं घरेलू काम

  3. 12,000 से अधिक वोटों से चुनाव जीता

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के ऑसग्राम विधानसभा सीट पर एक ऐसी महिला को जीत मिली है। जिसकी कहानी किसी फिल्मी की स्टोरी जैसी लग सकती है। दरअसल, यहां की आम जनता ने एक बेहद साधारण महिला जो कि 2,500 रुपये कमाने के लिए घर में लोगों के बर्तन धोती थी। उस पर भरोसा जताने का काम किया है।

कलिता माजी नाम की इस महिला ने तमाम राजनीतिक दिग्गजों और संसाधनों की कमी को पीछे छोड़ते हुए विधानसभा तक का सफर तय कर लिया है। बीजेपी ने कलिता को अपना उम्मीदवार बनाया था और वहां की जनता ने उन पर भरोसा जताकर विधायक बना दिया। इससे भारतीय लोकतंत्र की वो हकीकत सामने आती है, जो हर आम नागरिक के सपनों को पंख देती है।

12000 से ज्यादा वोटों से जीता चुनाव

जानकारी के अनुसार, कलिता माजी ऑसग्राम (एससी) सीट से चुनाव जीती है। वह राजनीति में आने से पहले पिछले दो दशकों से घरेलू कामगार के रूप में काम कर रही थीं। वह 2-4 घरों में साफ-सफाई और बर्तन मांजने का काम करती थी, जिससे उन्हें हर महीने करीब 2,500 रुपये की कमाई होती थी। इसी कमाई से वो अपने परिवार को भरण-पोषण करती थी।

ऑसग्राम सीट से कलिता ने 12535 के बड़े अंतर से चुनाव जीता है। माजी ने तृणमूल कांग्रेस के श्यामा प्रसन्ना लाहौर को शिकस्त दी है। माजी को कुल 107692 वोट मिले है। उन्होंने घर-घर जाकर चुनाव प्रचार किया था। उनकी मेहनत आखिरकार रंग लाई और जनता ने उन्हें बड़ी जीत दिलाई।

पिछली बार भी मैदान में थी 

बता दें कि, माजी पर बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव में भी भरोसा जताया था। उस चुनाव में उन्होंने लगभग 41% वोट हासिल किए थे। हालांकि वह 12000 वोटों के अंतर से हार गई थी। कलिता पिछले 10 सालों से ज्यादा समय से राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने अपनी शुरुआत एक बूथ-स्तर की कार्यकर्ता के रूप में की थी और बाद में पंचायत चुनाव भी लड़ी।

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