जबलपुर हाई कोर्ट के रिटायर जज अवनींद्र सिंह करेंगे देहदान, पीएम केयर्स फंड को सौंपे एक करोड़ एक लाख रुपये
न्यायमूर्ति सिंह ने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने दो दिन पूर्व मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में देहदान के लिए पंजीयन कराया है।

विदाई के क्षणों में न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह ने देह और धन दोनों का किया दान
HighLights
जबलपुर मेडिकल कॉलेज में पत्नी के साथ कराया देहदान का पंजीयन
जीपीएफ के एक करोड़ एक लाख रुपये प्रधानमंत्री केयर्स फंड में देने का संकल्प
जेएनएन, जबलपुर। न्याय की दुनिया में 36 वर्षों की सेवा के बाद न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह विदा हुए तो उन्हें अपने लिए कुछ भी बचाकर रखने की इच्छा नहीं हुई।
विदाई समारोह में उन्होंने अपने जीवन की कमाई और मृत्यु के बाद अपनी देह को समाज को समर्पित करने का संकल्प लिया। कहा, अपने लिए जिए तो क्या जिए। फुल कोर्ट फेयरवेल में उनका यह कथन समारोह की सबसे भावुक स्मृति बन गया।
न्यायमूर्ति सिंह ने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने दो दिन पूर्व मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में देहदान के लिए पंजीयन कराया है। उनका मानना है कि जिस शरीर ने जीवनभर न्यायिक दायित्व निभाया, वही शरीर जीवन के बाद किसी भावी चिकित्सक के ज्ञान का माध्यम बने, इससे बड़ी सामाजिक उपयोगिता और क्या होगी।
इसके साथ ही उन्होंने अपने जीपीएफ में जमा एक करोड़ एक लाख रुपये प्रधानमंत्री केयर्स फंड में दान करने की घोषणा की। यह कहते हुए वे भावुक हो गए। जीवनभर की सेवा से अर्जित धन जरूरतमंदों और समाज के लिए समर्पित करने का उनका यह संकल्प समारोह में मौजूद लोगों को भीतर तक छू गया।
फैसलों से आगे याद रहेगा संवेदना का यह पक्षन्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की न्यायिक पहचान उनके निर्णयों से बनी, लेकिन सेवानिवृत्ति पर सामने आया यह पक्ष उनके व्यक्तित्व की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
उन्होंने सभी कर्मचारियों के प्रति आभार और नवागत मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे को भी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि न्यायिक दायित्व अकेले निभाया जाने वाला कार्य नहीं है, बल्कि इसमें सहयोगियों और अधिवक्ताओं की सामूहिक भूमिका होती है।
बता दें कि 31 मई 1990 को सिविल जज के रूप में न्यायिक सेवा शुरू करने वाले न्यायमूर्ति सिंह ने विभिन्न दायित्व निभाए।
उन्होंने एक मई 2023 को हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और करीब तीन वर्ष के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 38 रह गई, जबकि स्वीकृत पद 53 हैं।
