नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। तंबाकू के कारण बड़ी संख्या में होने वाली मौतों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा है कि हमें हर हाल में बच्चों और किशोरों में इसका इस्तेमाल रोकना होगा। सोमवार को ग्रेटर नोएडा में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए नड्डा ने कहा कि भारत में हर साल लगभग 10 लाख लोग तंबाकू से होने वाली बीमारियों के कारण मरते हैं। इस सम्मेलन में पाकिस्तान को छोड़कर विश्व स्वास्थ्य संगठन के सभी 189 देश भाग ले रहे हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेन छह दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि हैं। भारत पहली बार तंबाकू नियंत्रण पर सम्मेलन (एफसीटीसी) का आयोजन कर रहा है।

नड्डा ने तंबाकू उत्पादों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए कहा, 'भारत में गुटखा और निकोटीन युक्त पान मसाला के निर्माण व बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा हमने इस साल अप्रैल से तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर 85 फीसद हिस्से में सचित्र चेतावनी छापने का नियम लागू किया है। किशोर न्याय कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के लोगों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर सात साल जेल और एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया है। इसके अलावा फिल्मों में जागरूकता के वीडियो दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।' उन्होंने फिल्म और टीवी में तंबाकू उत्पादों को बढ़ावा देने के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि भारत इस दिशा में सबसे पहले प्रयास करने वाले देशों में है। सम्मेलन में मौजूद दुनियाभर के प्रतिनिधियों ने भारत की मुहिम का ताली बजाकर स्वागत किया।

तंबाकू विरोधी अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहे टाटा कैंसर अस्पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. पंकज चतुर्वेदी कहते हैं, 'भारत अकेला ऐसा देश है, जिसने चबाने वाले तंबाकू को प्रतिबंधित किया है। इसका बड़ा श्रेय सुप्रीम कोर्ट को जाता है, जिसने कई राज्यों की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को सही ठहराया। इसी तरह भारत दुनिया का अकेला देश है, जिसने नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचने को गैर जमानती अपराध बनाया है।'

चबाने वाले तंबाकू पर श्रीलंका भी चिंतित

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेन ने भी सम्मेलन के दौरान चबाने वाले तंबाकू उत्पादों पर सख्ती की वकालत की। उन्होंने कहा कि इससे दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश इससे बहुत ज्यादा प्रभावित हैं। साथ ही सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवहार में शामिल होने की वजह से इससे जूझना ज्यादा जटिल है।

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