'SC/ST सांसदों को बोलने के लिए मिले अधिक समय', जीतन राम मांझी ने ओम बिरला को लिखा पत्र
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के ...और पढ़ें

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी।
HighLights
जीतन राम मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा।
SC/ST सांसदों को विधेयकों पर चर्चा में अधिक समय मिले।
भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने यह मुद्दा उठाया था।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। NDA के सहयोगी दल और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने मांग की है कि संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के सांसदों को पर्याप्त बोलने का समय दिया जाए।
बता दें क अपने पत्र में जीतन राम मांझी ने लोकसभा स्पीकर को बताया कि मध्य प्रदेश के खरगोन से भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने 5 अगस्त को मांझी के दिल्ली आवास पर हुई 'NDA सांसदों की समूह बैठक' में यह मुद्दा उठाया था।
सांसद पटेल का तर्क भी समझिए
पीटीआई (PTI) से बातचीत करते हुए भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने पुष्टि की कि उन्होंने यह मांग उठाई है। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों को मिलने वाला समय उनके सांसदों में बंट जाता है, इसलिए SC/ST सांसदों को अपने समुदायों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए अलग से और ज्यादा समय मिलना चाहिए।
मांझी ने की स्पीकर से निर्देश देने की मांग
अपने पत्र में केंद्रीय मंत्री मांझी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से आग्रह किया है कि वे इस मामले में आगे की कार्रवाई करें और संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी करें।
SC/ST आरक्षण पर अलग-अलग रुख
गौर करने वाली बात यह है कि एक तरफ जहां एनडीए के नेता एससी-एसटी सांसदों के अधिकारों की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हाल ही में आरक्षण के मुद्दे पर गठबंधन के भीतर ही मतभेद भी देखने को मिले हैं।
जीतन राम मांझी की पार्टी 'हम' और उनके बेटे व बिहार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने एससी-एसटी आरक्षण के भीतर सब-कैटिगराइजेशन की मांग की है। उनका तर्क है कि इससे समाज के सबसे वंचित और पिछड़े तबके तक आरक्षण का पूरा लाभ पहुंच सकेगा। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद यह बहस और तेज हुई है।
चिराग पासवान का कड़ा विरोध
दूसरी ओर, एलजेपी (राम विलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण की समीक्षा या बदलाव की किसी भी बात का कड़ा विरोध किया है। चिराग ने यहां तक कह दिया था कि जो लोग आरक्षण की समीक्षा की बात करते हैं, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
