रांची (अनुज मिश्रा)। नक्सलियों की धमक के कारण कल तक जो क्षेत्र झारखंड के सबसे पिछड़े थे, वे आज राज्य
में रोशनी फैला रहे हैं। इन इलाकों की महिलाओं ने मोमबत्ती बनाने का काम शुरू किया है। इनकी बनाई गई मोमबत्तियां झारखंड के हजारों घरों में इस दिवाली में नजर आएंगी। सिर्फ सामान्य दुकानों में ही नहीं, राज्य के कई शहरों में खादी बोर्ड के आउटलेट में भी नक्सल इलाकों में बनीं तरह-तरह की मोमबत्तियां काफी कम कीमत में उपलब्ध हैं।

झारखंड राज्य के खादी बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ कहते हैं कि इन नक्सल इलाकों में तैयार मोमबत्तियों की मांग चाइनीज मोमबत्तियों से ज्यादा है। ये कई खुशबुओं में उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत पांच रुपये से लेकर 500 रुपये तक है। ग्रामीण इलाकों में खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न एनजीओ द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य किए जा रहे हैं। छोटे-छोटे उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इनमें से मोमबत्ती उद्योग सबसे आसान और कम पैसों में और कुछ दिनों के प्रशिक्षण में ही चालू हो जाता है। गिरिडीह, चतरा, लातेहार, गुमला और दुमका के नक्सल प्रभावित इलाकोंमें इसका निर्माण घरों में भी नजर आने लगा है।

विभिन्न संस्थाओं द्वारा लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान उनको सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं। मशीनों के लिए सब्सिडी भी दिलाई जा रही है। लोन की भी व्यवस्था कराई जा रही है। मोमबत्ती बनाने के लिए ज्यादा मशीनों की आवश्यकता नहीं होती। सिर्फ 10000 रुपये की प्रारंभिक राशि से व्यवसाय की शुरुआत की जा रही है।

राज्य खादी बोर्ड भी दे रहा है प्रशिक्षण : झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड भी नक्सल प्रभावित इलाकों में लघु उद्योगों को बढ़ावा दे रहा है। अभी तक शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलकर ग्रामीणों खासकर महिलाओं को रोजगार का प्रशिक्षण दिया जाता था। अब नक्सल प्रभावित इलाकों में गांव-गांव जाकर प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है। खादी बोर्ड प्रशिक्षण केंद्र खोल मोमबत्ती उद्योग को बढ़ावा दे रहा है। माल तैयार होने के बाद बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। संजय सेठ का कहना है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में समस्याएं तो आती हैं, लेकिन हमारा प्रयास जारी है। यहां के लोग जागरूक हो चुके हैं। झारखंड के शहरों में ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाई गई मोमबत्तियां रोशनी फैला रही हैं।

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Posted By: Srishti Verma

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