जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जेट एयरवेज के भविष्य को लेकर अनिश्चितता के चलते इसके कर्मचारियों का धैर्य अब चुकने लगा है। एक तरफ इसके अधिसंख्यक पायलट और इंजीनियर अभी भी इसके पुनरुद्धार की उम्मीद में संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी ओर एक ऐसा तबका भी है जिसने उम्मीद छोड़ दूसरे रास्ते अपनाना शुरू कर दिया है। इनमें निदेशक से लेकर पायलट और इंजीनियर तक सब शामिल हैं।

जेट एयरवेज की स्वतंत्र निदेशक राजश्री पाथी ने दिक्कतों तथा अन्य प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 13 अप्रैल से प्रभावी है। इस बीच कुछ पायलटों और इंजीनियरों ने भी जेट एयरवेज को अलविदा कह दूसरी एयरलाइनों की ओर रुख कर लिया है। इनमें से कई ने स्पाइसजेट में नौकरी ज्वाइन कर ली है। हालांकि वहां उन्हें जेट के मुकाबले 25-50 फीसद कम कम वेतन पर काम करना पड़ेगा।

जेट एयरवेज के पायलटों और इंजीनियरों को पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। जेट के पायलटों के संगठन नेशनल एविएटर्स गिल्ड 'नाग' की ओर से प्रबंधन को दो मर्तबा वेतन भुगतान का अल्टीमेटम दिया जा चुका है। पहले नोटिस में वेतन भुगतान न होने पर 1 अप्रैल से विमान उड़ाना बंद करने की चेतावनी दी गई थी। जबकि बाद में 14 अप्रैल से काम बंद करने का कानूनी नोटिस दिया गया था।

रविवार को इस तारीख के बीतने पर 'नाग' के 1100 पायलटों में अधिकांश ने 15 अप्रैल से कॉकपिट से दूरी बनाने का एलान किया है। नाग के प्रमुख कैप्टन करण चोपड़ा ने कहा, 'रविवार आधी रात के बाद हम उड़ाने बंद कर देंगे। जबकि सोमवार को सुबह 10 बजे हमने मुंबई में बैठक और विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया है। जेट एयरवेज के प्रवक्ता का का कहना था कि 'पायलटों की हड़ताल से विशेष असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि वैसे भी हम केवल सात विमान ही उड़ा रहे हैं।'

जेट के मुसीबतजदा पायलटों व इंजीनियरों को स्पाइसजेट से बड़ा सहारा मिला है। दरअसल स्पाइसजेट ने पिछले दिनो 16 बोइंग 737-800 विमान लीज पर लेने के लिए सरकार से अनुमति मांगी है। जेट की उड़ाने लगभग बंद होने से यात्रियों को हो रही तकलीफ के मद्देनजर सरकार का रुख भी स्पाइसजेट के प्रस्ताव को लेकर सकारात्मक है।

ऐसे में उसे अनुमति मिलने के साथ अगले 10-12 दिनों में इन विमानों के भारत आ जाने की संभावना है। स्पाइसजेट को इन्हीं विमानों के लिए पायलटों और इंजीनियरों की आवश्यकता है। चूंकि जेट एयरवेज के पायलट और इंजीनियर इन बोइंग विमानों को उड़ाने और मरम्मत करने में दक्ष हैं, लिहाजा स्पाइसजेट ने उनके लिए दरवाजे खोल दिए हैं।

स्पाइसजेट के अलावा केवल एयर इंडिया के पास ही जेट एयरवेज की भांति बोइंग विमानो का बेड़ा है। ऐसे में जेट के कुछ पायलटों ने एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस से भी संपर्क साधा है। इन दिनो एयर इंडिया पायलटों की भारी कमी से जूझ रही है। और माना जाता है कि जल्द ही वहां पायलटों की भर्ती होगी।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय उड़ाने बंद होने तथा सोमवार से पायलटों की हड़ताल के मद्देनजर जेट एयरवेज ने अपने कुछ अंतरराष्ट्रीय रूटों के लिए अग्रिम बुकिंग स्वीकार करना भी बंद कर दिया है। इनमें कोलंबो, काठमांडू, सिंगापुर तथा हांगकांग के रूट शामिल हैं।

हालांकि इसे महज एहतियाती कदम बताया जा रहा है। क्योंकि जेट एयरवेज को उम्मीद है कि सोमवार को उसे बैंकों की ओर से बहुप्रतीक्षित वित्तीय सहायता प्राप्त हो जाएगी। ये अलग बात है कि ये सहायता पूरे 1500 करोड़ रुपये की होगी अथवा उससे कम, ये किसी को नहीं मालूम। वैसे सूत्रों की माने तो बैंक फिलहाल केवल 1000 करोड़ का फंड मुहैया कराने को ही सहमत हुए हैं।

 

Posted By: Arun Kumar Singh