मदुरै, एएनआइ। तमिलनाडु में पोंगल के दौरान खेला जाने वाला प्राचिन खेल जल्लीकट्टू पर मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से सुप्रीम कोर्ट ने इन्कार कर दिया है।  मद्रास हाईकोर्ट ने एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में निगरानी समितियों के अधीन इसे आयोजित करने का आदेश दिया था। 

बता दें कि जल्लीकट्टू का पशुप्रेमी द्वारा काफी विरोध किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे एक याचिका पर साल 2014 में प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले का काफी विरोध हुआ था। लोग सड़क पर उतर आए थे और बाद में सरकार ने एक अध्यादेश पास करके इसके आयोजन को अनुमति दे दी थी।  

जल्लीकट्टू की शुरुआत हुई

इससे पहले आज जल्लीकट्टू की शुरुआत मदुरै में हुई। इस साल अवनियापुरम में 730 सांड, अलंगानल्लूर में 700 सांड और पालामेडु में 650 सांड जलीकट्टू प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं। इसका आयोजन 15 से 31 जनवरी के बीच हो रहा है। इस दौरान पूरे तमिलनाडु में विभिन्न जल्लीकट्टू कार्यक्रमों में लगभग 2,000 सांडों के शामिल होने की संभावना है।

21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को में भाग लेने की अनुमति नहीं

21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को पालमेडु और अलंगनल्लूर में आयोजित जल्लीकट्टू में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई है। बता दें कि इस प्राचीन खेल का आयोजन फसलों की कटाई के दौरान पोंगल पर होता है। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच द्वारा नियुक्त किए गए सेवानिवृत्त प्रधान जिला न्यायाधीश सी. मणीकम ने मदुरै में आयोजन स्थल का दौरा किया। उन्होंने कार्यक्रम में की गई व्यवस्थाओं की जायजा लिया।

चिकित्सा सुविधा देने के लिए इक्कीस एम्बुलेंस तैनात- सी. मणीकम

सी. मणीकम ने व्यवस्थाओं की जायजा लेने के बाद  बताया, 'हमने खिलाड़ियों को 75 के बैच में विभाजित किया है, एक बार में 60 सांड एक-एक करके छोड़े जाएंगे। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस के आला अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। जिला कलेक्टर ने एक स्थानीय मंत्री के साथ मिलकर व्यवस्थाओं की जायजा लिया है। घायल खिलाड़ियों को चिकित्सा सुविधा देने के लिए इक्कीस एम्बुलेंस तैनात हैं।'

 

Posted By: Tanisk

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