मुंबई, मिड डे। डॉ. जलीस अंसारी (Jalees Ansari) की गिफ्तारी के लिए उप्र एसटीएफ (UP STF) स्थानीय मुखबिरों की मदद से उसकी हर गतिविधि पर नजर रख रही थी। इसी क्रम में शुक्रवार को पता चला कि वह कानपुर (Kanpur) के रेलबाजार इलाके में स्थित फेथफुलगंज में एक मस्जिद में नमाज पढ़ने गया है। सिविल ड्रेस में एसटीएफ के अधिकारी मस्जिद के आस पास ही थे और उसके बाहर निकलने का इंतजार कर रहे थे।

अंसारी जब बाहर निकला तो उसके साथ एक नाबालिग बच्चा उसका हाथ पकड़े चल रहा था। एसटीएफ के अधिकारी ने उसे पहचान तो लिया, लेकिन उसके साथ एक नाबालिग को देखकर चौंक गया। ऐसा लगा कि वह कोई स्थानीय निवासी है। इसके बाद उस अधिकारी ने अपना शक दूर करने के लिए जलीस को आवाज दी और कहा, ..अंसारी चचा कैसे हो, जेल में हम साथ थे..पहचाने कि नहीं..इतना कहते ही अंसारी सकपका गया।

वाट्सएप पर भेजी गई अंसारी का फोटो

लखनऊ में उप्र पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक इस दौरान उसकी फोटो खींचकर मुंबई एटीएस के अधिकारी को वाट्सएप पर भेजी गई। फोटो की तस्दीक होते ही एसटीएफ ने डॉ.जलीस को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लखनऊ ले जाया गया। वहां पर उससे पूछताछ की जाएगी और पता लगाया जाएगा कि वह उप्र में क्या करने आया था। उप्र के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने बताया कि सबसे पहले उप्र एसटीएफ के डीएसपी परमेश कुमार शुक्ला को अंसारी के कानपुर में होने की जानकारी मिली। इसके बाद वहां टीम तैनात की गई।

कार्रवाई को लेकर दावा

जब उप्र एसटीएफ ने पूरी कार्रवाई की जानकारी मीडिया को दी तो महाराष्ट्र एटीएस (आतंक रोधी दस्ता) प्रमुख देवन भारती ने कहा कि अंसारी की गिरफ्तारी उनकी टीम ने की है और इसमें उप्र एसटीएफ ने मदद की है। लेकिन उप्र पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने महाराष्ट्र एटीएस के दावे को खारिज कर दिया है। कहा, यह पूरी तरह उप्र एसटीएफ की कार्रवाई है। इतना जरूर है कि जलीस के कानपुर में होने की सूचना मुंबई पुलिस से ही मिली थी।

बदले में किए थे धमाके

डॉ.जलीस ने 5 दिसंबर 1993 को अपने साथी अलवी, इमरान और हसन के साथ मिलकर बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने की साजिश के तहत हावड़ा और दिल्ली जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों में बम रखे थे। 5 दिसंबर 1993 की सुबह कोटा (राजस्थान) और कानपुर में ट्रेनों में धमाके हुए थे। पुलिस के अनुसार डॉ.जलीस हैदराबाद, मालेगांव (मुंबई) पुणे, अजमेर व अन्य स्थानों पर हुए धमाकों में भी शामिल था।

डॉ.बम के नाम से भी है पहचान

आइजी एसटीएफ अमिताभ यश के अनुसार डॉ.जलीस को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के भारत का ट्रेड एंड टेक्निकल हेड रहने के कारण डॉ. बम के नाम से भी जाना जाता है। वह सिमी, हूजी व इंडियन मुजाहिदीन संगठनों के साथ जुड़ा रहा।

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