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रायपुर [मृगेंद्र पाण्डेय]। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित विधायक खरीद-फरोख्त कांड की चर्चा जब भी की जाती है, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का नाम आता ही है। कांग्रेस सरकार की 2003 के विधानसभा चुनाव में हार हो चुकी थी, भाजपा सरकार बननी थी। डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के चौबीस घंटे पहले विधायकों की खरीद- फरोख्त की साजिश का भंडाफोड़ पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने ही किया था। तब आधी रात को जेटली के आते ही पूरे देश की निगाह रायपुर पर टिक गई थी, मीडिया ने इसका सीधा प्रसारण तक किया। जेटली ने इस मामले को बहुत ही अच्छे तरीके से सबके सामने लाया था।

विधायकों के खरीद फरोख्‍त के आरोप लगे
राज्य गठन के बाद हुए पहले चुनाव में अजीत जोगी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को करारी हार मिली थी। इसके बाद तत्कालीन कांग्रेस नेता पर कथित तौर पर भाजपा नेता बलिराम कश्यप को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव देकर भाजपा विधायकों को तोड़ने का आरोप लगा था। आरोप था कि उस समय भाजपा नेता वीरेंद्र पांडेय से एक भाजपा सांसद ने विधायकों को तोड़ने के लिए संपर्क किया था।

वीरेंद्र पांडेय ने यह आरोप सार्वजनिक कर हलचल मचा दी थी कि एक दिग्गज कांग्रेस नेता ने बातचीत की और खरीद-फरोख्त के लिए करीब 45 लाख रुपये का लेन-देन किया। इस घटना ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल पैदा कर दी थी। देशभर में यह खबर सुर्खियों में रही थी। घटना 2003 की थी, तब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए की सरकार थी। जेटली तत्कालीन कानून मंत्री थे।

रायपुर में मची खलबली के बीच तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कानून के जानकार जेटली को दिल्ली से भेजा था। रायपुर में जेटली ने 45 लाख रुपये और एक ऑडियो टेप के साथ पत्रकारों से चर्चा की थी। वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय ने उस समय के घटनाक्रम पर दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया से विस्तार से बातचीत कर जेटली की पत्रकारवार्ता के संस्मरण सुनाए। उन्होंने बताया कि चार दिसंबर 2003 को विधानसभा चुनाव का परिणाम आया। पांच दिसंबर को रायपुर के पिकाडली होटल में भाजपा विधायकों की बैठक चल रही थी। इस बैठक में तत्कालीन राष्ट्रीय संगठन महामंत्री संजय भाई जोशी और राजनाथ सिंह मौजूद थे।

खुंटे ने कहा कि जेटली बन सकते राजनीति के चाणक्य 
बैठक के दौरान शाम करीब चार बजे भाजपा सांसद का मेरे पास फोन आया। ये सांसद उस वक्त एक तत्कालीन कांग्रेस नेता के साथ चले गए थे, लेकिन भाजपा ने उनको पार्टी से निकाला नहीं था। पांडे बताते हैं-सांसद ने उनसे कहा कि वे राजनीति के चाणक्य बन सकते हैं। छह-आठ विधायकों को तोड़ना है और बलिराम कश्यप को मुख्यमंत्री बनाना होगा। इसमें कांग्रेस के बड़े नेता उनकी पूरी मदद करेंगे। एक घंटे बाद एक बार फिर फोन आया। उस समय पांडे के साथ डॉ. कमलेश, मौजूदा सांसद सुनील सोनी सहित कई नेता मौजूद थे। पांडेय ने उन नेताओं से फोन टेप करने के बारे में चर्चा की। जब दोबारा फोन आया, तो उनसे रात को लैंडलाइन फोन पर चर्चा की बात कही। 

नीले और सफेद बैग में दिए गए थे पैसे 
पांडे बताते हैं कि उस समय वे अवंति विहार के एक घर में रहते थे। उन्होंने पुलिस के अधिकारी से चर्चा की और अपने घर में फोन टेप करने की व्यवस्था की। छह दिसंबर को जब फोन आया, तो सांसद ने कथित तौर पर पांडेय की फोन पर उस कांग्रेस नेता से बात कराई। बाद में एक होटल में कैमरा लगाकर पैसा लेने की तैयारी की गई। उस समय बलिराम कश्यप और वीरेंद्र पांडेय मौजूद थे। पांडे बताते हैं कि उनको नीले और सफेद बैग में दस-दस लाख रुपये मिले। बाद में 25 लाख रुपये और दिया गया। इस पैसे को भाजपा के तत्कालीन प्रदेश संगठन महामंत्री रंजन पटेल एकात्म परिसर लेकर गए। फोन पर बातचीत की सीडी तैयार की गई, जिसे अस्र्ण जेटली ने पत्रकारवार्ता में पेश किया।

इसके बाद ही दलबदल पर बना कानून
छत्तीसगढ़ के विधायक खरीद-फरोख्त कांड के बाद ही देशभर में दलबदल कानून लागू करने को लेकर गहरा चिंतन शुरू हुआ और 91वां संविधान संशोधन 2003 के तहत दसवीं अनुसूची में एक नए उपबंध के द्वारा दलबदल विरोधी कानून लागू किया गया। उस समय अस्र्ण जेटली वाजपेयी सरकार में कानून मंत्री थे।

Posted By: Vinay Tiwari

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