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भारत के साथ संबंध सुधारना चाहता है अजरबैजान, जयशंकर 23 अक्टूबर को करेंगे यात्रा

Published: Thu, 22 Oct 2026 09:40 PM (GMT+05:30)

अजरबैजान, जो पहले पाकिस्तान का समर्थक था, अब बदलते वैश्विक माहौल में भारत के साथ संबंध सुधारने का संदेश दे रहा है।

अजरबैजान भारत के साथ संबंध सुधारने का संदेश दे रहा है

अजरबैजान भारत के साथ संबंध सुधारने का संदेश दे रहा है

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। हाल तक पाकिस्तान को हर तरह से समर्थन देने की बात करने वाला देश अजरबैजान बदलते वैश्विक माहौल में भारत के साथ संबंधों को सुधारने का संदेश भेज रहा है।

भारत ने इन संदेशों का सकारात्मक जवाब देने का फैसला किया है। शुक्रवार (23 अक्टूबर) को विदेश मंत्री एस जयशंकर अजरबैजान की यात्रा पर जा रहे हैं जो आठ वर्षों बाद किसी भारतीय विदेश मंत्री की उस देश की यात्रा होगी।

अजरबैजान भारत के सुधारने संबंध?

हाल ही में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम नरेन्द्र मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ मुलाकात हुई थी। उसके बाद से ही दोनों देशों के बीच संपर्क बना हुआ है। जयशंकर की यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क को नया आयाम देने वाली मानी जा रही है।

पिछले कुछ वर्षों में अजरबैजान का रुख पाकिस्तान के प्रति अधिक झुका हुआ रहा। वर्ष 2025 में पहलगाम हमले के बाद भारत ने जब पाकिस्तान के खिलाफ आपरेशन सिंदूर शुरू किया तो अजरबैजान व तुर्किये ने पाकिस्तान का सबसे ज्यादा साथ दिया।

अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी किया जिसमें भारत के हमले की निंदा की गई और पाकिस्तान की संप्रभुता की रक्षा करने की बात कही। लेकिन बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों, खासकर दक्षिण काकेशस और मध्य एशिया में भारत की बढ़ती उपस्थिति के बीच बाकू अब नई दिल्ली के साथ व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहा है।

व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और सुरक्षा पर होगी चर्चा

विदेश मंत्रालय के अनुसार जयशंकर बाकू में अपने अजरबैजानी समकक्ष से मुलाकात करेंगे और व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी तथा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा करेंगे।

ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के संबंधों का मुख्य आधार रहा है। भारतीय कंपनी ओएनजीसी विदेश ने अजरबैजान के अजेरी-चिराग-गुनाशली तेल-गैस क्षेत्र और बाकू-तिबिलिसी-जेहान पाइपलाइन में महत्वपूर्ण निवेश किया है।

2025 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 40 करोड़ डालर के आसपास रहा, जिसमें कच्चे तेल का आयात प्रमुख रहा। हाल ही में नए भारतीय राजदूत अभय कुमार ने भी राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को अपना परिचय पत्र सौंपा था, जो संबंधों में ताजगी का संकेत माना जा रहा है।