जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि वह रूस से क्रूड खरीद को लेकर किसी भी तीसरे देश से मिलने वाली सीख सलाह को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। सोमवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह बात तब कही जब वह जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेरबॉक के साथ मंच साझा कर रहे थे। जयशंकर ने एक तरह से यूरोपीय देशों को आइना दिखाते हुए कहा कि, रूस से भारत का कारोबार यूरोपीय देशों के मुकाबले तो बहुत ही कम है। फरवरी से नवंबर के बीच यूरोपीय देशों ने रूस से जितना ईंधन खरीदा है वह समग्र तौर पर उसके बाद रूस से ईंधन खरीदने वाले दस देशों से ज्यादा है।

जयशंकर ने जर्मनी की विदेश मंत्री के सामने दोहराई-

जयशंकर जर्मनी की विदेश मंत्री बेरबॉक के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में यह बातें कही। उन्होंने कहा कि रूस से तेल खरीदने पर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं है। भारत को जिससेभी जरूरत होगी क्रूड खरीदने की तो वह खरीदेगा। इस बारे में यूरोपीय संघ के साथ भी भारत लगातार बात कर रहा है और वो इस बात को समझ रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यूरोप की मीडिया भी इस बात को समझेगी। भारतीय विदेश मंत्री का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है कि सोमवार से ही रूस से उत्पादित क्रूड की कीमत की अधिकतम सीमा (60 डॉलर प्रति बैरल) अमेरिका व इसके सहयोगी सात देशों (जी-सात) ने तय की है। जर्मनी इस समूह का सदस्य है।

अंतरराष्ट्रीय क्रूड बाजार पर जी 7 का असर

बहरहाल, जी-सात के फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय क्रूड बाजार पर साफ दिख रहा है। क्रूड की कीमतों कई हफ्तों की नरमी के बाद फिर से 88 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई है। सूत्रों ने बताया है कि पश्चिमी देशों की तरफ से रूस के क्रूड की कीमत पर सीमा तय करने को लेकर भारत ने आधिकारिक तौर पर अपना रूख अभी तय नहीं किया है। रूस और भारत की तेल कंपनियों के बीच क्रूड सौदों को लेकर लगातार बातचीत हो रही है और भारतीय कंपनियां बाजार के हिसाब से सौदे कर रही हैं। यह भी माना जा रहा है कि क्रूड की कीमत संबंधी सीमा के दायरे में किस तरह से खरीद की जाए, इसको लेकर भी दोनो देशों के बीच बातचीत हो रही है।

रूस से 17 फीसद क्रूड आयल की खरीद

बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 85 फीसद कच्चा तेल आयात करता है। फरवरी, 2022 तक भारत अपनी कुल जरूरत का एक फीसद ही तेल रूस से खरीद करता था लेकिन आज की तारीख में रूस भारत को तेल आपूर्ति करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। अक्टूबर, 2022 में भारत की कुल क्रूड खरीद का 17 फीसद रूस से आया है। रूस भारत को दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा सस्ती कीमत पर क्रूड दे रहा है। दूसरी तरफ अमेरिका व यूरोपीय देश चाहते हैं कि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद नहीं करे। इससे रूस पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। जयशंकर ने पूर्व में कहा है कि, उनकी सरकार की यह जिम्मेदारी है कि जहां से भी सस्ता क्रूड मिले उसकी खरीद की जाए ताकि अपने देश की जनता को किफायती दरों पर ईंधन उपलब्ध कराया जा सके।

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Edited By: Devshanker Chovdhary

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