नई दिल्ली, एएनआइ। एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वैश्विक रूप से वित्तीय संकट और चीन और भारत के उदय के साथ, दुनिया में हमारे लिए नया मोड़ 2008 में आया था, हमने दृश्य आर्थिक असंतुलन की दुनिया में प्रवेश किया था। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अफ्रीका के उत्थान में योगदान और भागीदारी हमारे रणनीतिक हित में है। यदि अफ्रीका वैश्विक राजनीति के ध्रुवों में से एक बन जाता है, तो यह हमारे लिए बेहतर है। 

वहीं, भारत और चीन के हाल की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति रहनी चाहिए। अगर वहां अशांति रहती है तो जाहिर है कि रिश्ते पर असर पड़ेगा और यही हम देख रहे हैं।

इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा था कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर हथियारों के साथ चीनी सेना की मौजूदगी ने भारत के लिए एक गंभीर सामरिक चुनौती पेश की है। एशिया सोसायटी द्वारा आयोजित एक वर्चुअल सभा में जयशंकर ने कहा था कि लद्दाख सेक्टर में जून में जो हिंसक संघर्ष हुआ उसने बहुत गहरा असर डाला है। जनता के स्तर पर भी और राजनीतिक स्तर पर भी और इसके चलते चीन और भारत के रिश्ते बहुत बिगड़ गए हैं।

विदेश मंत्री ने कहा था कि एलएसी पर इस समय चीनी सेना बहुत बड़ी संख्या में हथियारों के साथ मौजूद है। साफ तौर पर हमारे लिए यह एक बड़ी चुनौती है। पिछले तीस वर्षों में भारत ने चीन के साथ अच्छे संबंध बनाए हैं और इन रिश्तों का आधार सीमा पर शांति और स्थिरता रही है। साल 1993 के बाद से दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए हैं। एशिया सोसायटी पालिसी इंस्टीट्यूट के इस कार्यक्रम में जयशंकर इंस्टीट्यूट के प्रेसिडेंट और पूर्व आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री केविन रड के साथ बातचीत कर रहे थे।

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