जयशंकर-रुबियो की मुलाकात: भारत ने प्रतिबंधों का उठाया मुद्दा, अमेरिका ने दोस्ती का बढ़ाया हाथ
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात कर रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध कानून (SRAI) का मुद्दा उठाया।
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जयशंकर ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की
HighLights
जयशंकर ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की
रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध कानून (SRAI) का मुद्दा उठाया
भारत ने अपनी चिंताओं को स्पष्ट किया, रणनीतिक साझेदारी पर भी चर्चा
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसद शुल्क लगाने के अमेरिकी कानून का मुद्दा आज विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के समक्ष उठाया है। इन दोनों की मुलाकात न्यूयार्क में हुई, जहां जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महाधिवेशन को संबोधित करने के लिए गए हुए हैं।
अभी 18 सितंबर को ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीनेट और हाउस आफ रिप्रेजेंटेटिव्स की तरफ से पारित रूस व ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून (एसआरआइए) पर हस्ताक्षर किये हैं। इसके तहत भारतीय आयात पर भी सौ फीसद तक का शुल्क लगाने का कदम ट्रंप प्रशासन उठा सकता है। ट्रंप की तरफ से हस्ताक्षर किये जाने के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच इस बारे में उच्चस्तरीय बैठक हुई है। बताया जा रहा है कि बैठक में मुख्य तौर पर एसआरआइसी पर ही बात हुई है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने इंटरनेट मीडिया पर लिखा है कि विदेश मंत्री रूबियो से अच्छी मुलाकात हुई है। एसआरआइए को लेकर हमने उनके समक्ष भारत की चिंताओं व हितों को स्पष्ट किया। खाड़ी और यूक्रेन संकट को लेकर भी हमने बात की है। दूसरी तरफ रूबियो ने अपने पोस्ट में लिखा है कि आज न्यूयार्क में विदेश मंत्री जयशंकर से मिल कर काफी प्रसन्नता हुई।
हम साथ मिल कर भारत-अमेरिका के रणनीतिक साझेदारी का निर्माण कर रहे हैं और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय प्राथमिकताओं व आगामी बहुदेशीय प्रयासों पर भी बात हुई है। संभवत: रूबियो ने यहां क्वाड संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक की बात की है। भारत और अमेरिका के बीच अभी रूसी तेल खरीदने से जुड़ा मामला सबसे महत्वपूर्ण है।
जिस दिन अमेरिकी संसद ने इस विधेयक को पारित किया था उसी दिन विदेश मंत्रालय ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि अमेरिका को बता दिया गया है कि इससे दोनों देशों के संबंधों पर भी असर होगा। ट्रंप को 30 दिनों के भीतर शुल्क लगाने का फैसला करना है।
