'जहाजों की सुरक्षा पर ईरान से तीन बार हुई बात', विदेश मंत्रालय ने बताया कब बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल दाम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में ईरानी विदेश मंत्री ...और पढ़ें
HighLights
जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से तीन बार बात की।
जहाजों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा हुई।
पाकिस्तान के आतंकवाद पर MEA ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भारत लगातार ईरान के साथ संपर्क में है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची से पिछले कुछ दिनों के दौरान तीन बार बात की है।
सरकार ने कहा है कि इस संवेदनशील स्थिति में भारत अपने समुद्री हितों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर लगातार संपर्क बनाए हुए है। होर्मुज जलडमरुमध्य के रास्ते दो भारतीय जहाजों के गुरुवार को सुरक्षित भारत पहुंचने की सूचना आई है लेकिन यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि ऐसा ईरान की तरफ से मंजूरी देने के बाद हुआ है।
शिपिंग की सुरक्षा
इस बारे में मीडिया में आई सूचनाओं को ईरान ने गलत करार दिया है जबकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट तौर पर कुछ नही कहा है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा, 'पिछले कुछ दिनों में विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच तीन बार बातचीत हुई है। अंतिम बातचीत में शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके अलावा, अभी मेरे लिए कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।'
होर्मुज जलमार्ग से गुजरने की अनुमति
बाद में जायसवाल ने कहा कि भारत अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस विषय पर संबंधित देशों के साथ संपर्क में है। जायसवाल ने पूछा गया था कि क्या ईरान ने दो भारतीय जहाजों को होर्मुज जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। दरअसल, बुधवार को आई कुछ खबरों में कहा गया था कि भारत और ईरान के बीच उच्चस्तरीय संपर्क के बाद भारतीय ध्वज वाले टैंकरों को इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने की छूट दी गई है। लेकिन गुरुवार को ईरान की ओर से इन खबरों को खारिज कर दिया गया।
60 फीसद गैस बाहर से आयात
तेहरान के अधिकारियों ने कहा कि ईरान ने किसी भी देश को विशेष अनुमति नहीं दी है और समुद्री मार्ग से गुजरने के नियम सभी के लिए समान हैं। यह मार्ग भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत अपनी जरूरत का 86 फीसद तेल व 60 फीसद गैस बाहर से आयात करता है और इसका एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
गुरुवार को 100 डॉलर प्रति बैरल
ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध की वजह यह तकरीबन बंद है। इससे भारत समेत पुरी दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा होता दिख रहा है। भारत दूसरे मार्गों से तेल व गैस लेने की कोशिश कर रहा है। अभी गैर होर्मुज मार्ग से 70 फीसद तेल भारत ला रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से गुरुवार को 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू चुकी हैं।
पेट्रोल व डीजल की कीमतें बढ़ाई जाएंगी
पश्चिम एशिया विवाद शुरू होने के बाद ये कीमतें 65 से बढ़ कर 118 डॉलर तक चली गई थी। उसके बाद यह नीचे 85 डॉलर पर आई थी लेकिन फिर से 100 डॉलर के करीब पहुंच गई है। वैसे यह सरकार के लिए बड़ी चिंता की बात नहीं है। कुछ दिन पहले पेट्रोलियम मंत्रालय के उच्चाधिकारियों ने बताया था कि मौजूदा हालात में 120 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा कीमत हो तभी घरेलू बाजार में पेट्रोल व डीजल की कीमतें बढ़ाई जाएंगी। भारत के लिए चिंता आपूर्ति का बाधित होना है।
