दैनिक जागरण समूह के एजुकेशन वेबसाइट जागरणजोश ने भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में चुनौतियों और अवसरों पर नई दिल्ली के होटल ताज में एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया था। इस अवसर पर देश के कई जाने-माने शिक्षाविदो ने अपने-अपने विचार रखे। 

बहुप्रतिभा के धनी शेखर सुमन ने इस पैनल डिस्कशन को होस्ट किया। भारत के कई जाने-माने शिक्षाविदों ने इस पैनल डिस्कशन में अपने-अपने विचारों को रखा।

सूर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के फाउंडर प्रेसिडेंट और चेयरमैन संजय कोर्दिया; एक्यूरेट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्शन, ग्रेटर नोएडा के डायरेक्टर जनरल सरोज कुमार दत्ता; डॉक्टर कुलदीप के रैना, डीआईटी यूनिवर्सिटी देहरादून के वइस चांसलर; सेज यूनिवर्सिटी, इंदौर, के चांसलर, संजीव अग्रवाल; यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन की सीईओ मोना गुलाटी पुरी, रामा यूनिवर्सिटी कानपुर के पब्लिक रिलेशन के डायरेक्टर प्रणव सिंह; प्रसाद खांडेकर, एसोसिएट डीन, इंजीनियरिंग एंड डायरेक्टर इंडस्ट्री पार्टनरशिप, एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे; रजनीश वाधवा- चीफ टेक्नीकल ऑफिसर, एसजीटी यूनिवर्सिटी के अलावा पूर्णिमा ग्रुप ऑफ कोलेजेज के डायरेक्टर शशिकांत सिंघी ने अपने विचारों को रखा।

चर्चा की शुरुआत करते हुए शेखर सुमन ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उनका सुझाव था कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य छात्रों का बेहतर मनुष्य बनना है जिससे कि एक सभ्य समाज के निर्माण में वो अपना योगदान दे सके। उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन का दौर तेजी से चल रहा है और हम सबकी जिम्मेदारी है कि शिक्षा के क्षेत्र को विश्व स्तर पर ले जाएं।

संजय कोर्डिया ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए उचित कीमत पर क्वालिटी एजुकेशन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए प्रोग्राम ‘स्वयं’ का उदाहरण देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

पूर्णिमा ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के शशिकांत सिंघी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ट्रांसपेरेंसी पर बल दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी रुचि के सब्जेक्ट और पैशन को चुनने की आजादी होनी चाहिए।

रजनीश वाधवा, एसजीटी यूनिवर्सिटी के सीईओ ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आज के समय में उच्च शिक्षा के सामने मुख्य चुनौतियां जॉब और इम्प्लॉयमेंट है। उन्होंने कहा कि कोर्स का निर्माण इस तरह से किया जाए कि छात्रों को आगे चलकर रोजगार के क्षेत्र में दिक्कत न हो।

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे, के प्रसाद खांडेकर ने कहा कि आज के समय में शिक्षा विशेषकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र ने अपना उद्देश्य खो दिया है। आज शिक्षा संस्थानों का शॉर्ट टर्म गोल इम्प्लॉयमेंट और प्लेसमेंट है, लेकिन दूसरी तरफ उन्हें यह ध्यान देना होगा कि छात्रों को ऐसी शिक्षा दी जाए जिससे कि उन्हें रोजगार में दिक्कत न हो।

डीआईटी यूनिवर्सिटी के कुलदीप रैना ने कहा कि सब्जेक्ट नॉलेज के अलावा संस्थाऩों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों के नैतिक और मोरल वैल्यूज पर भी फोकस करना चाहिए। इससे छात्रों को समाज के प्रति अपने दायित्व का अहसास होगा।

पैनल चर्चा में अन्य शिक्षाविदों ने भी अपने-अपने विचारों को रखा। सभी का मानना था कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों से बेहतर संवाद की जरूरत है। इससे छात्रों को अपने सपनों को साकार करने में मदद मिलेगी।

कई शिक्षाविदों ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की भूमिका पर जोर दिया। उनका कहना था कि सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार उन्मुख पॉलिसी और वित्तीय सपोर्ट करके बेहतर बदलाव ला सकती है।

अन्य पैनलिस्टों का मानना था कि शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव के लिए सरकार, शिक्षा संस्थान, स्टूडेंट माता-पिता सभी के सम्मिलित प्रयास और सहयोग की जरूरत है।

एजुकेशन फोरम की शुरुआत केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के संबोधन से हुई थी। उन्होंने अपने संबोधन में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने जागरण ग्रुप द्वारा भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।

 

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