नई दिल्ली, राजेश कुमार [स्पेशल डेस्क] । भारत और चीन के बीच डोकलाम के मसले पर जारी तनातनी और गंभीर रूप लेती जा रही है। चीन पिछले करीब पचास दिनों में वैसे तो अब तक कई बार चेतावनी दे चुका है लेकिन इस बार उसने अंतिम चेतावनी दी है। चीन के विदेशमंत्रालय की तरफ से धमकी भरा बयान आया कि अगर वो कश्मीर या भारत-नेपाल की विवादित जगह कालापानी में घुस जाए तो भारत क्या करेगा ? आइये आपको बताते हैं कि चीन की इस ताज़ा धमकी को विदेश मामलों के जानकार क्यों बेहद गंभीर बता रहे हैं और भारत की ओर से इस संवेदनशील परिस्थिति में क्या कदम उठाए जाने की जरूरत है।

चीन ने कहा- कालापानी या कश्मीर में घुसेंगे तो क्या करेगा भारत
डोकलाम में भारत और चीन के बीच पिछले करीब पचास दिनों से तनातनी जारी है। भारत ने साफ कर दिया है कि अगर वहां से सेना हटने का फैसला होगा तो दोनों ही देशों को अपने जवान वापस बुलाने होंगे जबकि चीन इस बात पर अमादा है कि ये उसका क्षेत्र है और भारत ने वहां पर घुसपैठ कर उसके सड़क निर्माण के काम में बाधा पहुंचाई है। चीन ने धमकी देते हुए कहा कि अगर हम उत्तराखंड के कालापानी और कश्मीर में घुस जाएं तो क्या होगा। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, चीन के विदेश मंत्रालय में सीमा और सागर मामलों की उप महा निदेशक वांग वेनली ने कहा कि एक दिन के लिए भी अगर सिर्फ एक भारतीय सैनिक भी विवादित क्षेत्र में रहता है तो भी यह हमारी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है।

'चीन के पास भारत के खिलाफ कोई भी कार्रवाई का अधिकार'
वांग वेनली ने कहा कि अगर भारत गलत रास्ते पर जाने का फैसला करता है या इस घटना के बारे में कोई भ्रम रखता है तो हमारे पास कोई भी कार्रवाई करने का अधिकार है। वांग ने भारतीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए चेतावनी दे रही थीं। उन्होंने कश्मीर का मुद्दा उठाया इसके अलावा भारत और नेपाल के बीच के कालापानी विवाद का मुद्दा उठाया। वांग ने आगे कहा कि इस समय भारत के साथ बातचीत करना नामुमकिन है, अगर ऐसा होता है तो लोग बोलेंगे कि हमारी सरकार अक्षम है। जब तक भारत अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाता है तो बातचीत नहीं हो सकती है।

भारत को चीन की आखिरी चेतावनी, ना करे 1962 वाली गलती
इससे पहले मंगलवार को ग्लोबल टाइम्स ने भारत की डोकलाम विवाद पर अंतिम चेतावनी दी। ग्लोबल टाइम्स पर जारी करीब डेढ़ मिनट के इस वीडियो में अखबार के संपादक ने कहा है कि नई दिल्ली आज भी 1962 के जवाहर लाल नेहरू की तरह अनुभवहीन है। वीडियो में कहा गया है कि भारत खुद को विपरीत हालात से निपटने के लिए तैयार नहीं कर रहा बल्कि देश की जनता को सब कुछ ठीक होने का दिलासा दे रहा है। वीडियो में एक भारतीय अखबार का हवाला भी दिया गया है जिसमें कहा गया है कि चीन कभी भारत पर हमला नहीं कर सकता। यहां तक कि हल्की सैन्य कार्रवाई का रिस्क भी नहीं लेगा। इसके जवाब में ग्लोबल टाइम्स में कहा गया है कि चीन भी युद्ध नहीं बल्कि शांति की बहाली चाहता है और साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहता है। लेकिन अगर भारतीय सेना लगातार चीन की धरती पर मंडराएगी तो स्थितियां अलग हो सकती हैं।

क्या है कालापानी और उससे जुड़ा विवाद

दरअसल, कालापानी भारत नेपाल सीमा पर है। कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग में गूंजी से 9 किमी दूर है। यहां से काली नदी निकलती है यहां पर काली मंदिर है। एसएसबी कैंप और आईटीबीपी की चौकी है। पहले यहां पर कैलास यात्रा का पड़ाव भी था। लगभग 11000 फ़ीट ऊंचाई पर स्थित कालापानी से चीन सीमा लिपूलेख 17 किमी दूर है। कालापानी को लेकर नेपाल के वामपंथी अपना हक जताते है। कालापानी अतीत से भारत का हिस्सा रहा है। वर्तमान में उच्च हिमालय में गरब्याग से कालापनी तक सड़क बन गई है। कालापानी से तिब्बत जाने वाले मार्ग में 6 किमी दूर अंतिम भारतीय पडाव नावी ढांग है। जहां से 11किमी दूर तिब्बत सीमा है। इसी मार्ग से कैलास यात्रा होती है।

(भारत-नेपाल सीमा के पास की ये जगह है कालापानी)

कालापानी से चीन सीमा की दूरी 12 किमी है। कालापानी से नावी दांग 7किमी और नावी दांग से लीपूलेख 5 किमी। कालापानी में भारत में आईटीबीपी एसएसबी और सेना की चौकी है। नेपाल में कुछ नही है। भारत चीन व्यापार मार्ग भी यही है। नेपाल में वामपंथियों ने एक बार 1815 की सिंगोली संधि का हवाला देते हुए कालापानी सहित आसपास के क्षेत्र पर अपना जताया था। हालांकि, इस मामले को नेपाल में कोई तूल नही मिला। अभी भी कभी कभार एक वामपंथी दल इस मामले को उठाता है। इस तर्क का आधार नही होने से यह हवा में तीर साबित हुआ है।

चीन की धमकी को हल्के में ना ले भारत-विशेषज्ञ
ग्लोबल टाइम्स ने जिस तरह भारत को आखिरी वार्निग की बातें कही है उसे चीन के मामलों के जानकार बेहद गंभीर बता रहे हैं। विदेश मामलों के जानकार कमर आगा ने Jagran.com से ख़ास बातचीत में बताया कि चीन की इस धमकी को नई दिल्ली को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां भारत को चीन की तरफ से मिलनेवाली किसी भी चुनौती का मुकाबला करने के लिए तैयार रहना चाहिए तो वहीं दूसरी ओर पॉलिटिकल और डिप्लोमेटिक चैनल्स भी खोले रखना चाहिए।

मोदी सरकार के विकास में बाधा अटकाना चाहता है चीन
कमर आगा का मनना है कि चीन लगातार मोदी के नेतृत्व में हो रहे भारत के विकास में रोड़ा अटकाना चाहता है। उन्होंने बताया कि चीन के चलते भारत एकमात्र अकेला देश नहीं है बल्कि ईस्ट चाइना शी में जापान के साथ उसकी तनातनी जारी है। चीन के इस वक्त कई देशों के साथ विवाद चल रहा है। साउथ चाइना में भी उसने अपने कई दुश्मन बना रखा है।

क्यों चीन कर रहा है ऐसी हरकत
दरअसल, इस बारे में जानकारों की मानें तो यह चीन की विस्तारवादी नीति और अमेरिका की तरफ से उठाए गए कदमों के चलते एक तरह की चीन की चाल है। अमेरिका में ट्रंप की सरकार ने जिस तरह से संरक्षणवाद की नीति पर काम किया है उसके चलते चीन को ऐसा डर है कि उसके लिए ये कदम प्रतिकूल असर डाल सकता है। इसके साथ ही, भारत का आर्थिक विकास भी चीन की आंखों में लगातार खटक रहा है। यही वजह है कि चीन आज ऐसी हरकतें कर रहा है। 

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Posted By: Rajesh Kumar

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