नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए ये बेहद शर्मिंदगी वाली ख़बर है। पंजाब पुलिस के आईजी रैंक के अफसर ने यूपी पुलिस के अपने समकक्षीय अफसर पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाया है। पंजाब पुलिस के मुताबिक, खालिस्तानी आतंकी और पिछले साल हुए नाभा जेल ब्रेक के मास्टर माइंड के आरोपी गोपी घनश्यामपुरा को यूपी पुलिस ने 45 लाख रुपये लेकर छोड़ दिया।

आईजी पर आरोप के बाद हरकत में यूपी सरकार
ख़बरों के मुताबिक, यूपी में एक विशेष एजेंसी के प्रमुख की तरफ से गोपी घनश्यामपुरा को छोड़ने को लेकर की गई डील की जैसे ही पंजाब पुलिस की तरफ से ऑडियो रिकॉर्डिंग सबूत के तौर पर पेश की गई, उसके फौरन बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीजीपी सुलखान सिंह, प्रधान गृह सचिव अरविंद कुमार से बात कर उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। डीजीपी सुलखान सिंह ने बताया, पूरे मामले की खुद यूपी के गृह सचिव निगरानी कर रहे हैं और इसकी जांच एक एडिशनल डायरेक्टर जनरल (एडीजी) की अध्यक्षता में की जाएगी।

पंजाब पुलिस कर रही थी कड़ी निगरानी
पंजाब पुलिस ने इससे पहले यह दावा किया था कि गोपी को आखिरी बार शाहजहांपुर में 10 सितंबर को देखा गया था। जिसके बाद वह संदेहास्पद स्थिति में अचानक गायब हो गया। पंजाब एटीएस के आईजी विजय प्रताप सिंह ने एक अख़बार के साथ बातचीत में बताया था- “हम नाभा जेल ब्रेक के मास्टरमाइंड गोपी का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं जो यूपी के शाहजहांपुर में 10 सितंबर को आखिरी बार देखा गया था, लेकिन वह अचानक भागने में कामयाब रहा।”

यहां पर ध्यान देनेवाली बात ये है कि पिछले हफ्ते पंजाब और यूपी पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने छह संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया था। इन सभी के खिलाफ पिछले साल 27 नवंबर को हुए नाभा जेल ब्रेक केस में गैर जमानती वारंट जारी किए गए थे।

पंजाब पुलिस के दावे में कितना दम
पंजाब पुलिस अब यह दावा कर रही है कि गोपी को आईजी रैंक के अफसर ने डील के बाद छोड़ दिया है। पंजाब पुलिस के मुताबिक, इस डील में मध्यस्थता की भूमिका सुलतानपुर के रहने वाले संदीप तिवारी उर्फ पिन्टू ने निभाई है जो 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस टिकट पर चुनाव भी लड़ चुका है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस डील के वक्त ऑफिसर की तरफ से एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी, लेकिन 45 लाख रुपये में डील फाइनल हुई और गोपी घनश्यामपुरा को छोड़ दिया गया।

पंजाब पुलिस ने दिए योगी सरकार को सबूत
ये मामले उस वक्त सामने आया जब पंजाब पुलिस ने आरोपी सहकर्मियों- पिन्टू, अमनदीप सिंह और हरजिन्दर सिंह खालोन को गिरफ्तार किया। अमनदीप और हरजिन्दर सिंह पीलीभीत का रहने वाला है जिनसे पुलिस ने कड़ी पूछताछ की। फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग और पूछताछ की रिकॉर्डिंग पंजाब पुलिस की तरफ से यूपी सरकार के अधिकारियों को सौंपने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी के डीजीपी के साथ बैठक की और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए।

सरकार कड़े सख्त कार्रवाई- पूर्व यूपी डीजीपी
यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने Jagran.com से खास बातचीत में बताया कि अगर यह आरोप सच साबित हो जाता है तो आरोपी आईजी समेत पूरे जेल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। विक्रम सिंह ने बताया कि यह मामला अगर सच है तो ये यूपी पुलिस के लिए बेहद शर्मिंदगी वाली बात है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच निचले स्तर से नहीं बल्कि एडीजी और डीजी रैंक के अफसर करें तभी सच्चाई सामने आएगी। यूपी के पूर्व डीजीपी ने कहा कि पूरे मामले की जांच रिपोर्ट सात दिनों के अंदर आ जानी चाहिए।

नाभा जेल ब्रेक के बाद पश्चिमी यूपी था रडार पर
पिछले साल 27 नवंबर को नाभा जेल ब्रेक के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश उस वक्त पंजाब पुलिस के रडार पर आ गया था और प्रतिबंधित बब्बर खालसा आतंकियों के लिए यह एक सुरक्षित ठिकाना बन गया था। जेल ब्रेक के कुछ ही घंटे बाद मुख्य षडयंत्रकारी परविंदर सिंह को यूपी के शामली से गिरफ्तार किया गया था। उच्च सुरक्षा वाली नाभा जेल में हथियारों से लैस 10 लोग घुस गए थे और छह लोगों को वहां से छुड़ाकर ले गए थे। जिनमें से एक खालिस्तान लिबरेशन फोर्स का आतंकी हरमिंदर मंटू भी शामिल था।

पंजाब विधानसभा चुनाव में हुई थी तू-तू, मैं-मैं

जेल ब्रेक की ये घटना पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुई थी। जिसके चलते आतंकियों के प्रश्रय को लेकर शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था और राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था का हवाला दिया गया। हालांकि, मिन्टू को अगले ही दिन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया था। जबकि, हांगकांग शिफ्ट होने की योजना बना रहे मास्टर माइंड गुरप्रीत सेखों को मोगा से 5 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था।
 

Posted By: Rajesh Kumar

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