नई दिल्‍ली (स्‍पेशल डेस्‍क)। दो माह से भ्‍ाी कम समय में दुनिया के हजारों कंप्‍यूटरों पर फिर साइबर अटैक हुअा है। इसका असर यूरोप समेत भारत में भी देखा गया है। भारत का जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्‍ट इस हमले से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है और यहां पर फिलहाल काम ठप पड़ गया है। इस बार इसका नाम 'पेटया' दिया गया है। पिछली बार मई में 'वानाक्राय' के नाम से यह हमला किया गया था, जिसमें फिरौती की रकम बिटक्वाइन के तौर पर मांगी गई थी। पिछली बार मई में किए गए हमले में दुनिया की कई बड़ी कंपनियां इससे प्रभावित हुई थी। डिलीवरी कंपनी फेडएक्स, रूस का मोबाइल नेटवर्क 'मेगाफोन', स्पेन की टेलीकॉम कंपनी टेलीफोनिका, इंडोनेशिया के दो प्रमुख अस्पतालों के अलावा निशान कंपनी का एक कार प्लांट और फ्रांस की कार निर्माता कंपनी रेनो जैसी कंपनियां भी इस हमले से अछूती नहीं रही थीं।

रोकना पड़ा था काम

इसके चलते इन कंपनियाें में काम रोक देना पड़ा था। उस वक्‍त आंध्र प्रदेश की पुलिस को भी इस समस्‍या से दो-चार होना पड़ा था। इसके अलावा मई में देशभर की करीब 50 हजार आइटी कंपनियों का डाटा हैक कर लिया गया था। इनमें करीब 80 फीसद विंडो बेस और 30 फीसद लाइनेक्स बेस कंपनियां शामिल थीं। इसके बाद इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की आइटी सेल के नेशनल चेयरमैन को एडवाइजरी जारी करनी पड़ी थी। उस वक्‍त इस हमले से प्रभावित देशों में ब्रिटेन, अमेरिका, भारत, चीन और स्पेन समेत 75 देश शामिल थे। ऐसा ही कुछ अब एक बार फिर से हुआ है।

यूक्रेन सबसे अधिक प्रभावित

यूरोप की यदि बात करें तो इस बार यूक्रेन इससे सबसे अधिक प्रभावित दिखाई पड़ रहा है। वहां पर सरकारी ऑफिस से लेकर बिजली कंपनियां, पावर ग्रिड, बैंक, एविएशन कंपनी एंतोनोव और दो डाक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसका असर वहां की मीडिया कंपनियों पर भी देखा गया है। कुछ कंपनियों के कर्मचारियों ने वहां पर फिरौती की रकम का मैसेज सिस्‍टम पर देखने की भी बात कही है।

 

अमेरिका से जापान तक कई देश प्रभावित

रूस की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी के सिस्टम भी हैक कर लिए गए हैं। पिछली बार भी रूस का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क 'मेगाफोन' इस तरह के हमले से प्रभावित हुआ था। वहीं डब्ल्यूपीपी ऐड एजेंसी के सिस्टम को भी हैक कर लिया गया है। यूक्रेन और रूस के अलावा, अमेरिका, ब्रिटेन, डेनमार्क, फ्रांस और नॉर्वे, जापान में इस सायबर अटैक की पुष्टि हुई है। जापान में होंडा के प्लांट पर हुए साइबर हमले के बाद वहां का कामकाज ठप हो गया है। कुछ देशों में एयरपोर्ट पर भी इसका असर देखा जा रहा है। इसकी वजह से इन देशों में हवाई जहाज की उड़ानों में दिक्‍कत आ रही है। इसके अलावा यात्रियों को भी खासी परेशानी हो रही है। यूक्रेन में इस हमले की बदौलत एटीएम के प्रभावित होने से लोगों को परेशानी हो रही है।

सरकार ने मांगे थे सुझाव

मई में हुए रैनसमवेयर अटैक के बाद तेजी से लोकप्रिय हो रही बिटक्वाइन को लेकर सरकार ने आम लोगों से राय मांगी थी। सरकार जानना चाहती थी कि क्या इस पर पाबंदी लगाई जाए या इसे नियम-कानून के दायरे में लाया जाए। इसके लिए सरकार ने 31 मई तक का समय दिया था। केंद्र ने इसके लिए लोगों से अपने प्लेटफॉर्म माईजीओवी पर सुझाव मांगे थे। इस प्लेटफॉर्म को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई, 2014 में लांच किया था।

विंडोज यूजर के लिए चीन ने जारी की थी चेतावनी

मई में चीन के सिक्‍योरिटी एक्‍सपर्ट ने साइबर अटैक के प्रति विंडोज यूजर को सावधान रहने की चेतावनी दी थी। विंडोज ऑपरेटिंग सिस्‍टम में बग के जरिए फाइलों का नाम बदलने और ‘UIWIX’ एनक्रिप्‍ट करने को लेकर चीन के नेशनल कंप्‍यूटर वायर इमर्जेंसी रेस्‍पॉंंस सेंटर ने यूजर्स को माइक्रोसॉफ्ट अपडेट करने को कहा था। मई में किए गए साइबर हमले में चीन के करीब 29,000 से सिस्‍टम इसकी चपेट में आए थे। इसमें वहां के सरकारी ऑफिस, एटीएम और अस्‍पताल शामिल थे।

उत्‍तर कोरिया पर शक

मई में हुए साइबर हमले को लेकर उत्‍तर कोरिया पर शक जाहिर किया गया था। इस शक की वजह वहां का लेजर्स ग्रुप था। इसी ग्रुप को वर्ष 2014 में सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट और 2016 में बांग्लादेश सेंट्रल बैंक में हैकिंग का जिम्मेदार माना गया था। इस शक की एक और वजह यह भी थी कि हैकिंग के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर 'वॉनाक्राय' के कोड और पूर्व में लेजर्स ग्रुप द्वारा उपयोग किए गए कोड में समानता देखी गई थी। इसकी पुष्टि रूस की एक सिक्‍योरिटी कंपनी कैस्‍परस्‍काय ने भी की थी। हालांकि उत्‍तर कोरिया ने हर बार इस तरह के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

बैंक और उनके एटीएम पर संदेह  

पिछली बार हुए साइबर हमले के दौरान ही इस बात का संदेह जताया गया था कि आने वाले समय में इस तरह का हमला करने वालों के निशाने पर बैंक और उनके एटीएम हो सकते हैं। ताजा साइबर हमले में यूक्रेन के एटीएम का काम बंद कर देना इस आशंका की पुष्टि कर रहा है। भारत में मई में पुराने सॉफ्टवेयर पर काम करने की वजह से कुछ एटीएम को एहतियातन बंद रखा गया था। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे रैनसमवेयर पर सरकारी संगठन सीईआरटी-इन के निर्देशों का पालन करें। दरअसल, मई में हुए हमले के बाद इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इन) ने इस स्थिति में क्या करें और क्या न करें की सूची भी जारी की थी। गौरतलब है कि भारत में करीब 2.2 लाख एटीएम हैं। जिसमें से कुछ पुराने विंडोज एक्सपी ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करते हैं।

एंड्रॉयड फोन पर भी संकट

इसके अलावा सिक्योरिटी कंपनी ‘चेकप्वाइंट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी’ के शोधकर्ता पहले ही दुनियाभर के 90 करोड़ एंड्रॉयड आधारित स्मार्टफोन धारकों को चेता चुके हैं कि वह भी हैंकिंग के शिकार हो सकते हैं। मशहूर रिसर्च फर्म गार्टनर की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक ऑनलाइन कारोबार करने वाली अधिकांश कंपनियों पर साइबर हमले का खतरा मंडराएगा, क्योंकि कारोबार की ज्यादातर चीजें डिजिटल हो जाएंगी।

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ऐसे हैं अांकड़े

आंकड़े बताते हैं वर्ष 2016 में केवल डलास में ही 10 मिलियन से ज्यादा मालवेयर अटैक किए गए थे। इसके बाद लॉस एंजेलिस में भी कई सिस्‍टम्‍स इसके शिकार बने थे। इससे पूर्व 2015 में 4 मिलियन से अधिक ग्लोबल रैनसमवेयर अटैक किए गए थे। इसके अलावा पिछले साल अक्टूबर तक लगभग 15 हजार सरकारी वेबसाइटों को हैक किया जा चुका था। अमेरिका से प्रकाशित ‘द निल्सन रिपोर्ट’ के अक्टूबर 2016 के अंक के मुताबिक एटीएम-डेबिट, क्रेडिट एवं प्री-पेड भुगतान कार्डों से जुड़ी धोखाधड़ी की वारदातों में फंसी राशि 21.84 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच चुकी है। यही नहीं हर तरह के साइबर क्राइम की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था को अब सालाना 445 अरब डॉलर तक के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

क्‍या कहती है गृह मंत्रालय की रिपोर्ट

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच वर्षों की तुलना में इस वर्ष साइबर अपराध 60 फीसद की दर से बढ़ा है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में गत वर्ष 32 हजार से ज्यादा साइबर अपराध दर्ज किए गए, जबकि उसके पहले तीन सालों के दौरान यह आंकड़ा 96 हजार था। केपीएमजी की रिपोर्ट के मुताबिक देश में पिछले साल करीब 72 प्रतिशत कंपनियों पर साइबर हमले हुए और 63 प्रतिशत कंपनियों को इससे आर्थिक नुकसान भी हुआ। देश के सभी आइपी एड्रेस की निगरानी करने वाली साइबर सुरक्षा एजेंसी (सीईआरटी-इन) के मुताबिक 2016 की पहली तिमाही में ही 8056 वेबसाइट्स हैक की गई थीं। इनमें से सबसे ज्यादा हमले फाइनेंशियल और इंश्योरेंस सेक्टर पर किए गए थे।

क्या है बिटक्वाइन

यह एक तरह की डिजिटल करेंसी है। इसे इलेक्ट्रॉनिक रूप में बनाया और रखा जाता है। यह एक ऐसी मुद्रा है, जिस पर किसी देश की सरकार का नियंत्रण नहीं है। रुपये या डॉलर की तरह इसकी छपाई नहीं की जाती। सोमवार को इसकी एक यूनिट की कीमत 2200 डॉलर (करीब 1.42 लाख रुपये) के स्तर तक पहुंच गई है। इस लिहाज से यह दुनिया की सबसे महंगी मुद्रा है।

क्या है रेनसमवेयर?

रेनसमवेयर एक तरह का साइबर हमला है। यह वायरस यूजर के कंप्यूटर पर पूरी तरह से कंट्रोल कर पेमेंट की डिमांड करता है। यह वायरस सिर्फ कंप्यूटर ही नहीं बल्कि स्मार्टफोन को भी नुकसान पंहुचा सकता है। यह वायरस बिना आपकी जानकारी के कंप्यूटर या स्मार्टफोन को नुकसान पहुंचाने वाला सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर लेता है, इसके जरिये यह यूजर की जानकारी को एन्क्रिप्ट कर लेता है। इस तरह हैकर के पास यूजर के डाटा पर पूरा-पूरा एक्सेस हो जाता है। फिर हैकर यूजर को उसका डाटा ब्लॉक करने की धमकी दे, उससे पैसे ऐंठता है। डाटा के एवज में यूजर से बतौर फीस 0.3 से 1 बिटक्वाइन तक की मांग की जाती है, जिसकी कीमत 400 यूरो से लेकर 1375 यूरो तक होती है। बिटक्वाइन डिजिटल ट्रांजेक्शन में इस्तेमाल होने वाली एक तरह की वर्चुअल करेंसी है। ऐसे साइबर अटैक किसी एक व्यक्ति पर न करके पूरे नेटवर्क पर किया जाता है।

इन कदमों से बचे रह सकते हैं आप

1- लेटेस्ट सॉफ्टवेयर अपडेट्स रखें और सिक्योरिटी का ध्यान रहें।

2- अपने कंप्यूटर और ई-मेल्स को समय से स्कैन करते रहें।

3- एंटीवायरस का इस्तेमाल करें।

4- महत्वपूर्ण डाटा का बैकअप रखें।

5- किसी भी संदिग्ध लिंक और ई-मेल पर क्लिक न करें।

6- डाटा का बैकअप रखें।

7- अपने सिस्‍टम में एंटी वायरस को जरूर अपडेट करते रहें।

8- किसी भी एप या अंजान लिंक पर क्लिक न करें।

Posted By: Kamal Verma

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