नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। हम अपने वर्तमान के लिए देश के भविष्य को दांव पर नहीं लगा सकते हैं। इस टिप्पणी के द्वारा पीएम मोदी ने विरोधियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारों की आलोचना होनी चाहिए, लेकिन उसके पीछे ठोस आधार भी होना चाहिए। अर्थव्यवस्था को लेकर जिस तरह की तस्वीर पेश की जा रही है, वो देश में निराशा के माहौल को जन्म दे रही है। पीएम ने कहा कि आर्थिक तौर पर सशक्त भारत ही विश्वपटल पर अपनी आवाज को बुलंदी के साथ रख सकता है। सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाने वालों को अपने समय के इतिहास को देखने की जरूरत है कि उनके दौर में क्या कुछ हुआ था। देश की बेहतरी के लिए कड़े फैसले लिए गए और अगर क्रियान्वयन में किसी तरह की मुश्किल आ रही है तो सरकार उसे दूर करने की पूरजोर कोशिश करेगी। पीएम के बयान पर अमेठी में राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी जी सत्ता से चिपके रहना चाहते हैं। देश में निराशा का जो माहौल बना है उसे दूर करने के लिए उन्हें सत्ता छोड़ देनी चाहिए। इसके साथ ही राहुल गांधी ने कहा कि अगर वो सत्ता में आए तो 6 महीने में बदलाव लाएंगे। राहुल गांधी के बयान को बड़े परिप्रेक्ष्य में समझने से पहले ये जरूरी है कि पीएम ने किस अंदाज में अपनी सरकार के फैसलों को बचाव किया। 

आंकड़ों के जरिए पीएम का जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था में सुस्ती के विपक्ष के आरोपों का आंकड़ों व पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन से करारा जवाब दिया। मोदी ने बुधवार को इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेट्रीज ऑफ इंडिया की स्वर्ण जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत है। उनकी सरकार वित्तीय स्थिरता कायम रखकर निवेश बढ़ाने के कदम उठाती रहेगी, जिससे आने वाले वर्षों में देश विकास की नई लीग में होगा। सरकार एमएसएमई और असंगठित क्षेत्र समेत उन सभी क्षेत्रों के प्रति सजग है, जिन्हें तत्काल मदद की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ईमानदारी को ही प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि जीएसटी अपनाने वाले व्यापारियों को आश्वस्त किया कि उनके पुराने रिकॉर्ड नहीं खंगाले जाएंगे। साथ ही जीएसटी के क्रियान्वयन की समीक्षा कर जरूरत पड़ने पर जरूरी बदलाव भी किए जाएंगे। पीएम का यह बयान ऐसे समय आया है जब चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में देश की विकास दर 5.7 फीसद पर आने से विपक्ष के साथ-साथ भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने राजग सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

(स्रोत- PMO India twitter handle)

शल्य प्रवृत्ति के लोगों को पहचानने की जरूरत

मोदी ने एक घंटे से ज्यादा के अपने भाषण में कहा, कई पैरामीटर हैं जो देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति, सरकार की निर्णय शक्ति, विकास की दिशा व गति का सबूत देते हैं। आलोचकों की हर बात खराब होती है ऐसा सरकार नहीं मानती, लेकिन हमें देश में निराशा का माहौल पैदा करने से बचना चाहिए। सरकार ने तीन साल में बीमा समेत जिन अहम क्षेत्रों में जो सुधार किए हैं वे शल्य प्रवृत्ति के लोगों को नहीं दिखते। ज्ञात हो, पांडवों के मामा राजा शल्य महाभारत में कर्ण के सारथी थे, लेकिन युद्ध के दौरान वे कर्ण को ही हतोत्साहित करते रहते थे। मोदी ने कहा, शल्य प्रवृत्ति के लोगों को अब पहचानने की जरूरत है। जब आंकड़े अनुकूल होते हैं तो उन्हें संस्था और प्रक्रिया सही लगती हैं, लेकिन जैसे ही आंकड़े उनकी कल्पना के विपरीत होते हैं तो कहते हैं कि यह संस्था और उसके आंकड़े ठीक नहीं हैं। क्या ऐसा पहली बार हुआ है जब जीडीपी की वृद्धि दर किसी तिमाही में 5.7 फीसद पर पहुंची है। पिछली सरकार में छह साल में आठ बार विकास दर 5.7 फीसद या उससे नीचे गिरी थी। अर्थव्यवस्था ने ऐसी तिमाही भी देखी हैं जब विकास दर 0.2 व 1.5 फीसद थी। उस वक्त मुद्रास्फीति व चालू खाते का घाटा भी अधिक था।

फ्रेजाइल फाइव में अब भारत नहीं

मोदी ने कहा, जब इसी केंद्रीय सांख्यकीय संगठन ने 7.4 फीसद वृद्धि के आंकड़े जारी किए तो इन्हीं लोगों ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि जमीनी हकीकत में यह महसूस नहीं होता है, लेकिन जैसे ही 5.6 फीसद हुई तो उन्हें मजा आ गया। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल में भारत को ‘फ्रेजाइल फाइव’ ग्रुप का सदस्य कहा जाता था। बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों के रहते ऐसा कैसे हो गया। उस समय देश में जीडीपी से ज्यादा महंगाई की दर थी। बढ़ते राजकोषीय घाटे व बेकाबू चालू खाते के घाटे पर ही चर्चा होती थी। उस समय देश के विकास को विपरीत दिशा में ले जाने वाले ये सभी पैरामीटर कुछ लोगों को पसंद आते थे।

जानकार की राय

Jagran.Com से खास बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं है कि पीएम नरेंद्र मोदी को ये पता नहीं था कि नोटबंदी और जीएसटी से अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। लेकिन उन्हें ये पता है कि उनकी नीति ठोस है और इसके साथ ही उनकी नीयत पर देश को भरोसा है। पीएम के सामने दो विकल्प थे, पहला कि वो भ्रष्टाचार होने दें और विकास दर न गिरने दें। दूसरा भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएं भले ही विकास दर गिर जाए। लेकिन पीएम ने दूसरा रास्ता चुना।

पीएम नरेंद्र मोदी ने आंकड़ों के जरिए दमदार ढंग से बताया कि निराशावादी ताकतों को फिलहाल संजीवनी मिल गई है, लेकिन हकीकत ऐसी नहीं है। अब आप को बताएंगे कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी में क्या कुछ कहा।

अमेठी में बोले राहुल

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के प्रस्तावित दौरे से छह दिन पहले अमेठी पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी सत्ता छोड़ दें तो हम छह माह में बदलाव ला देंगे। राहुल विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे पर आए हैं।राहुल गांधी ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, इस सरकार से किसान, व्यापारी, युवा सभी परेशान हैं। मोदी 'मेक इन इंडिया' की बात करते हैं, लेकिन रोजगार देने में नाकाम हैं। वह सत्ता छोड़ दें, हम छह माह में परिवर्तन लाकर दिखा देंगे।

किसानों व कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी सरकार में किसान जान दे रहे हैं। देश का युवा काम करना चाहता है, लेकिन उसके पास काम नहीं है। हमने अमेठी में मेगा फूड पार्क स्थापित कर किसानों को लाभ पहुंचाने व लोगों को रोजगार देने की कोशिश की। मोदी सरकार ने अमेठी से मेगा फूड पार्क छीन लिया। सरकार में न होने पर यही भाजपा व आरएसएस के लोग मनरेगा, आधार कार्ड जैसी योजनाओं को फ्लॉप बताते थे, लेकिन आज इसी को महत्व दिया जा रहा है। एक टैक्स एक भारत के तहत 18 प्रतिशत टैक्स की बात की, लेकिन भाजपा की सरकार ने 28 प्रतिशत टैक्स कर दिया। आने वाले 2019 के चुनाव में जनता इनसे हिसाब लेगी।  

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Posted By: Lalit Rai

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