नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। अगर आज के जमाने की बात की जाए तो ये लाइन बिल्कुल सटीक बैठती है...रोटी कपड़ा, मकान और आईफोन। अब आप सोच रहे होंगे कि रोटी, कपड़ा और मकान तो इंसान की जरूरत है लेकिन ये आईफोन कहां से आ गया। इसका जवाब भी आपको यहीं मिलेगा। रोटी कपड़ा मकान के बाद आईफोन ऐसे ही नहीं जोड़ा गया है, इसके लिए दीवानगी का आलम ये रहा है कि आईफोन खरीदने के लिए लोग किडनी तक बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं। मीडिया रिपोर्टों से अनुसार चीन में एक 17 वर्षीच बच्चे ने किडनी बेच भी दी थी। अब आप सोच रहे होंगे कि हम आईफोन पर चर्चा क्यों कर रहे हैं।

चलिए ये भी जान लीजिए कि 9 जनवरी 2007 को ही पहली बार आईफोन को बाजार में उतारने की घोषणा की गई थी। जब इसकी घोषणा की गई थी तब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन इस फोन के लिए ऐसी दीवानगी देखी जाएगी कि लोग अपनी किडनी बेचकर इसको खरीदेंगे। आज के लाइफस्टाइल में आईफोन एक क्लास है।

आज आईफोन का आईओएस दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम है। साल 2017 तक पूरी दुनिया में एक अरब से भी ज्यादा आईफोन बेचे जा चुके थे। आइए अब जानते हैं कि आईफोन बनाने की शुरुआत कैसे हुई। जॉब्स ने एप्पल की टीम के साथ प्लानिंग शुरू की। वो ऐसा फोन बनाना चाहते थे, जिसे खुद भी यूज कर सकें। 2002 से 2005 के बीच एप्पल नया और सीक्रेट डिवाइस बनाना चाहता था, जो टैबलेट और आईपैड जैसा हो। इसी आइडिया के साथ आईपैड को डेवलप किया गया, जिसकी वजह से आईफोन को शेप मिला।

इस तरह शुरू हुई आईफोन बनाने की कहानी

आईफोन को बनाने के लिए स्टीव जॉब्स को कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी। इस फोन को किस कदर से गोपनीयता के साथ तैयार किया गया, इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। उन्होंने एक टीम बनाई जिसको आईफोन बनाने के लिए तैयार किया गया। इस शर्त के साथ कि कोई भी व्यक्ति एप्पल के बाहर का नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही कंपनी ने इस टीम के लोगों को नहीं बताया था कि वो किस चीज पर काम करने वाले हैं। इस टीम को बस इतना कहा गया कि वो एक अमेजिंग प्रोडक्ट पर काम करने वाले हैं। आईफोन को सीक्रेट प्रोजेक्ट के तौर पर तैयार करने के लिए इसको प्रोजेक्ट पर्पल नाम दिया गया। इन लोगों से कहा गया कि इसके लिए बहुत ज्यादा मेहनत, अपनी रातों को कुर्बान करना होगा और यही नहीं वीकेंड में भी काम करना होगा। अगर इतना सब करने के लिए तैयार हैं तभी इस टीम का हिस्सा बन सकते हैं। 

इस तरह दिया गया अंजाम

अब जब टीम बनकर तैयार हो गई तो अमेरिका के एक शहर क्यूपरटीनो में एक इमारत को किराए पर लिया गया और उसमें टीम को बंद कर दिया गया। इस इमारत का पहला फ्लोर बैज रीडर और सिक्योरिटी कैमरों से भरा हुआ था। किसी को पता ही नहीं था कि इस इमारत में अंदर क्या काम चल रहा है। टीम के सदस्य वहीं रहते थे और अंदर ही काम करते थे। कर्मियों को बाहर जाने की भी इजाजत नहीं थी। हालत ये हो गई कि ज्यादा काम करने की वजह से लोगों की तबियत खराब होने लगी। इस पर भी स्टीव जॉब्स चाहते थे कि इस प्रोडक्ट की गोपनीयता को बनाए रखा जाए। एप्पल ने इस प्रोडक्ट को बनाने के लिए हजारों इंजीनियर की एक टीम जुटाई थी, इन्हें तीन साल के एक मिशन पर रखा गया था। फिर इसके बाद जिन लोगों ने इस टीम का हिस्सा बनने के लिए हामी भरी उनकी शादीशुदा जिंदगी बर्बाद हो गई। लेकिन स्टीव जॉब्स के जुनून के आगे किसी की नहीं चली और स्टीव ने आईफोन के लिए किसी तरह का कॉम्प्रोमाइज नहीं किया। 

9 जनवरी 2007 को हुई घोषणा

जब पहले आईफोन का खाका तैयार हो गया तो स्टीव जॉब्स ने 9 जनवरी 2007 को इस फोन को लॉन्च करने की घोषणा की। इसके बाद 29 जून 2007 को इसको लॉन्च करके बाजार में लोगों के लिए उतार दिया गया। इस फोन की एक खासियत ये रही कि टीम ने फोन की जो डिजायन बनाकर तैयार की थी वो दशकों बाद भी लगभग वैसी ही है। पहले आईफोन से लेकर आईफोन 7 तक हर साल कंपनी ने कुछ नया करने की कोशिश की और कामयाब भी रही। उसने हर वो चीज करने की कोशिश की जो लोगों को चाहिए थी।

आईफोन का सफर

 

आईफोन तेजी से बदलते डिजिटल वर्ल्ड का ऐसा गैजेट बन चुका है, जिसको पाने की चाह कईयों की होती है। आपके आसपास कई सारे ऐसे लोग होंगे, जिन्हें आईफोन के अलावा कोई दूसरा फोन समझ ही नहीं आता होगा। गजब तो तब लगता है कि यह लोग आईफोन के लेटेस्ट वर्जन के लिए अपनी जमा पूंजी तक लगाने में गुरेज नहीं करते।

कुछ लोग आईफोन की दीवानगी को पागलपन कहने लगे हैं, पर शौक बड़ी चीज होती है। वैसे भी सभी को कोई न कोई नशा होता है। किसी को किताबों का नशा होता है, किसी को शराब का, तो किसी को घूमने का। ऐसे में आईफोन यूजर्स को आईफोन्स का नशा है, तो इसमें गलत क्या है?

वैसे बता दें कि साल 2016 के अंत तक पूरी दुनिया में 86.8 फीसद लोग एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्मटम वाले स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि 12.5 फीसद लोग आईफोन्स का इस्तेमाल करते हैं। इसकी एक सबसे बड़ी वजह ये है कि आईफोन को अफोर्ड करना हर किसी के बस की बात नहीं। इसके बावजूद एप्पल की लोकप्रियता काफी ज्यादा है और यह दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम है। 

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Posted By: Abhishek Pratap Singh

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