नई दिल्ली [स्पेशल डेस्क] । पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में एनडीए सरकार ने स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के के जरिए पूरे देश को एकसूत्र में बांधने का संकल्प लिया था। नीति नियंताओं का मानना है कि किसी देश के आर्थिक, सामाजिक विकास में सड़कों की अहम भूमिका होती है। एक सड़क अपने आप में सिर्फ कंक्रीट या कोलतार नहीं होती है, बल्कि जिन जिन इलाकों से सड़के गुजरती हैं वो अपने साथ विकास की किरण भी लाती है। भारत के पूर्वी और पश्चिमी भाग में सड़कों के जाल का अंतर भी स्पष्ट तौर पर नजर आता है। पीएम नरेंद्र मोदी अक्सर कहा करते हैं कि भारत माता की दो भुजाएं हैं, जिसमें एक भूजा दूसरे की तुलना में कमजोर है। देश के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसी योजनाओं पर काम करना होगा जो रोजगारपरक हों। आइए आपको बतातें है कि केंद्र सरकार के कार्यक्रम भारतमाला प्रोजेक्ट के बारे में जिसके जरिए 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा।   

केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए बुनियादी ढांचे पर भारी भरकम खर्च की योजना बनायी है। इसके तहत देश में बड़े पैमाने पर सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। इस पर पांच वर्षो में लगभग 6.92 लाख करोड़ का निवेश होगा और कुल 83,677 हजार किमी सड़कों का निर्माण होगा। इसमें महाकाय ‘भारतमाला’ परियोजना भी शामिल है। यह परियोजना देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने में मददगार साबित होगी। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस कार्यक्रम को हरी झंडी दे दी गई।

भारतमाला प्रोजेक्ट के लिए काफी राशि वर्तमान राजमार्ग परियोजनाओं के टोल संग्रह (टीओटी) ठेके देकर जुटाई जाएगी। टीओटी का अर्थ है टोल, ऑपरेट एंड ट्रांसफर जिसके तहत ठेका प्राप्त करने वाली कंपनी 20 या 30 वर्ष के लिए सड़क पर टोल संग्रह करेगी और उसके बाद उसे वापस सरकार को सौंप देगी। इसके तहत कुल 82 चालू परियोजनाओं के टीओटी ठेके दिए जाएंगे। इससे सरकार को 34 हजार करोड़ रुपये प्राप्त होने की उम्मीद है। टीओटी के तहत एनएचएआइ ने कुल 680.64 किलोमीटर लंबाई वाले नौ राजमार्गो के मौद्रीकरण के टेंडर आमंत्रित कर लिए हैं। इनसे 6258 करोड़ की राशि प्राप्त होगी। भारतमाला समेत सड़क निर्माण के इस नवीन अंब्रेला कार्यक्रम से देश को एक दक्ष व सुगम परिवहन प्रणाली हासिल होने की उम्मीद है। 

भारतमाला कार्यक्रम
-भारतमाला का पूरा प्रोजेक्ट 60,000 किमी का है।
-पहले चरण में 24,800 किमी के साथ एनएचडीपी के तहत अधूरी पडी 10,000 किमी की परियोजनाओं को शामिल किया गया है।जिसमे 5,35,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
-भारतमाला का पहला चरण 2017-18 से शुरू होगा, 2021-22 तक पांच साल की अवधि में इसे पूरा किया जाएगा।
-24800 किमी में से 18000 किमी का डीपीआर एडवांस्ड स्टेज में है। बचे हुए 7000 किमी का डीपीआर तुरंत अवार्ड किया जायेगा।
-अगले साल दिसंबर (2018) तक ये सारे काम अवार्ड होंगे ।
-इसके अलावा NH(O), SARDP-NE, EAP, LWE की जो परियोजना चल रही हैं, उसमे 1,57,000 करोड़ खर्च किया जाएगा।
-अगले 5 साल में सड़क विकास पर 6,92,324 करोड़ खर्च किया जाएगा।

आर्थिक कॉरीडोर
-देश में 44 आर्थिक गलियारा निर्माण करने की योजना है।
-पहले चरण में आर्थिक गलियारे के रूप में 9,000 किमी सड़क विकसित की जाएगी।
- 28 शहरों में रिंग रोड, 45 शहरों में बाईपास और 34 कोर्रिडोर्स में लेन एक्सपांशन बढ़ने के कारण समय, ईंधन और धन की बचत होगी।
- इसमें आर्थिक कॉरीडोर निर्माण पर 1,20,000 करोड़ खर्च करने की योजना।
- इससे माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी तथा लाजिस्टक लागत 18% से घटकर 12% हो जाएगी।

इंटर कॉरीडोर फीडर मार्ग
- लगभग 8,000 किमी अंतर-गलियारे और 7,500 किमी फीडर मार्गों की पहचान की गई है।
- भारतमाला के पहले चरण में 6,000 किमी शामिल किया गया है।
-इसके निर्माण पर 80,000 करोड़ खर्च करने की योजना है।
-आज मुंबई से कोचीन वाया बेंगलुरु जाते है।
-मुंबई -कन्याकुमारी कॉरिडोर बननेसे आवागमन आसान हो जायेगा इससे दुरी घटेगी तथा समय, ईंधन और पैसो की बचत होगी।

 राष्ट्रीय राजमार्ग की क्षमता सुधार
-5,000 किमी लम्बें एनएच की क्षमता सुधार पर 1,00,000 करोड़ खर्च करने की योजना।
-NHDP 185 चेक पॉइंट्स है। क्षमता बढ़ाने से इसमें सुधार होगा।
-ऐसे 34 जगह की पहचान की गयी है जहा लेन एक्सपांशन करना है।
-6 राष्ट्रीय गलियारों में औसत यातायात 30,000 पीसीयू है, इन गलियारों के 6/8 लेन की जरूरत को पूरा किया जाएगा।
- रिंग रोड, बायपास/ एलिवेटेड कॉरीडोर बनाया जाएगा।
-एनएचएआई के अधिकारियों को अधिक अधिकार दिया गया है।

सीमा और अंतरराष्ट्रीय सम्पर्क
- BBIN -बांग्लदेश , भूटान , नेपाल के साथ व्यापार बढ़ाने का समझौता किया है।
- इस योजना से पूर्वोत्तर क्षेत्र को इन देशो से जोड़ने का सबसे ज्यादा फायदा होगा।
- 22 ऐसे स्थान है जिससे कनेक्टिविटी बढ़ेगी
- नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार से व्यापार सुविधा बढ़ाने पहले चरण में 2,000 किमी शामिल किया गया है।
- सीमा और अंतरराष्ट्रीय सम्पर्क के लिए 25,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
 - सीमावर्ती व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भारत में सीमा सड़क ढांचे का बड़े पैमाने पर उन्नयन किया जाएगा।

तटीय और बंदरगाह सम्पर्क
-भारत में लगभग 2,100 किमी तटीय सड़कों की पहचान की गई है।
- तटीय और बंदरगाह सम्पर्क पर 20,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
-भारतमाला परियोजना के साथ सागरमाला परियोजना को जोड़ा जाएगा, जिससे बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों को रेल और रोड से जोड़ा जा सके।
-अंतदेर्शीय जलमार्ग विकसित करने पर सहयोग मिलेगा।
-सागरमाला परियोजना में 16 लाख करोड़ का निवेश होना है।
-आवश्यक कनेक्टिविटी भारतमाला द्वारा दी जाएगी।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे
- कुछ राष्ट्रीय और आर्थिक गलियारों में 50,000 पीसीयू से अधिक ट्रैफिक है।
- लगभग 1,900 किमी की पहचान ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के रूप में की गई है।
- इसमें पहले चरण में 800 किमी शामिल किया गया है।
- ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस के लिए 40,000 करोड़ खर्च करने की योजना है।

 निगरानी, समीक्षा
-लागत और समय अधिक ना होने पाए इससे बचने के लिए प्रगति की समीक्षा 6 महीने में एक बार की जाएगी।
-इस परियोजना के लिए बजटीय सहायता के अलावा अंतरराष्टीय बाजार, भारतीय बार से धन लिया जाएगा।

रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
- इस परियोजना से पूरे देश में रोजगार का अवसर पैदा होगा।
- अनुमान है कि पहले चरण में 10 करोड़ से अधिक कार्य दिवस तैयार होंगे।

सड़कों का विशाल नेटवर्क

भारत में लगभग 46.90 लाख किलोमीटर लंबाई की सड़कों का विशाल नेटवर्क है। भारत में सड़क घनत्‍व इस समय लगभग 1.43 किलोमीटर प्रति वर्ग किलोमीटर है, जो कई देशों से बेहतर है। सड़कों के नेटवर्क के विकास की जिम्‍मेदारी केंद्र सरकार, राज्‍य सरकारों और स्‍थानीय प्रशासन की होती है। राष्‍ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 82,803 किलोमीटर है, जो सड़कों के कुल नेटवर्क के दो प्रतिशत से कम है। लेकिन इन मार्गों से कुल सड़क परिवहन का 40 प्रतिशत से अधिक परिवहन होता है। राष्‍ट्रीय राजमार्गों की विकास की जिम्‍मेदारी केंद्र सरकार की है। भारत में कुल माल का 60 प्रतिशत और यात्री यातायात के 85 प्रतिशत, सड़कों पर ले जाया जाता है।
 
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Posted By: Lalit Rai

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