नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। ऐसा लगता है कि कश्मीर घाटी में सब्जार अहमद बट के मारे जाने के बाद आतंकियों के बीच आपस में ही बड़ा घमासान हो सकता है। उसकी वजह जहां एक तरफ हिजबुल के टॉप कमांडर की रेस में कई लोगों के दावे है तो वहीं दूसरी तरफ जाकिर मूसा भी लश्कर और हिजबुल के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। इसके अलावा, जानकारों की मानें तो कश्मीर में मौजूद आतंकियों को पाकिस्तान से भी अधिक फंडिग सऊदी अरब से की जाती है। 

फंडिंग के बंटवारे में हो सकता है घमासान

घाटी में आतंकी संगठनों के बीच असली लड़ाई संसाधनों के बंटवारे को लेकर मच सकती है। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि पाकिस्तान से हुर्रियत नेताओं के मार्फत आने वाली आतंकी फंडिंग को रोकने में काफी हद तक सफलता मिल चुकी है। सभी आतंकियों को इन्हीं हुर्रियत नेताओं के मार्फत फंड का बंटवारा किया जाता था। यही कारण है कि लश्कर और हिजबुल दोनों के आतंकी उनके आदेशों का पालन करते थे। लेकिन अब आतंकियों को स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने पड़ रहे हैं। बैंक लूटकर फंड जुटाने की उनकी कोशिश भी सफल नहीं हो पा रही है। 

सऊदी अरब से हो रही है फंडिंग

हालांकि, एम.एम. खजूरिया की मानें तो पाकिस्तान को जो आंतकवाद विरोधी कार्रवाई के नाम पर पैसा मिल रहा है उसे वह जहां कश्मीर में हिंसा फैलाने के नाम पर लगा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ घाटी में आतंकियों की फंडिंग का एक बड़ा स्त्रोत है सऊदी अरब। ऐसे में जब तक ग्लोबल फंडिंग घाटी में होती रहेगी तब तक यह आतंकी संगठन वहां पर फलता फूलता रहेगा। इसलिए, उस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की जरूरत है।

आंतकियों के बीच मच सकती है मार-काट

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, सब्जार अहमद बट के मारे जाने के बाद हिजबुल मुजाहिदीन के नए कमांडर पद पर कम-से-कम तीन आतंकी दावा कर रहे हैं। हिजबुल मुजाहिदीन का पूर्व आतंकी जाकिर रशीद बट उर्फ मूसा घाटी में शरीयत शासन स्थापित करने के उद्देश्य से नया आतंकी संगठन बना सकता है। इतना ही नहीं, सीमा पार से आतंकी फंडिंग रोकने की सुरक्षा एजेंसियों की कोशिश सफल रही तो स्थानीय संसाधनों पर कब्जे के लिए भी आतंकवादियों के बीच मार-काट मच सकती है।

घाटी में 200 आतंकी है सक्रिय

सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो इस वक़्त दक्षिणी कश्मीर में 200 आतंकी सक्रिय हैं, जिनमें से 110 आतंकी स्थानीय हैं। इनमें अधिकांश लश्कर ए तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के बीच बंटे हुए हैं। पाकिस्तानी फंडिंग पाने वाले ये आतंकी सीमा पार आकाओं के निर्देश का पालन करते हैं और आतंकी हमलों में एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। लेकिन साथ ही दोनों आतंकी संगठन एक-दूसरे के आतंकियों को तोड़ने में पीछे नहीं हटते हैं।

हिजबुल कमांडर की रेस में कई आतंकी

हिजबुल मुजाहिदीन के नए कमांडर के रूप में जिस रियाज नायकू का नाम सबसे आगे चल रहा है, वह कभी लश्कर कमांडर अबु दुजाना के मातहत काम करता था। बाद में उसने दुजाना का साथ छोड़कर बुरहान वानी के साथ हिजबुल में शामिल हो गया। हिजबुल मुजाहिदीन घाटी में लश्कर ए तैयबा से काफी बड़ा आतंकी संगठन है। ऐसे में अबु दुजाना और रियाज नायकू के बीच तालमेल की उम्मीद नहीं की जा सकती है। जबकि सद्दाम पडर उर्फ जैद और यासीन यत्तू ने हिजबुल कमांडर के पद के लिए दावा ठोक कर रियाज नायकू के सामने चुनौती पेश कर दी है।

हालांकि, Jagran.com के साथ ख़ास बातचीत में जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी एम.एम. खजूरिया ने बताया कि इनका आका पाकिस्तान में बैठा हुआ है इसलिए जैसा वहां से निर्देश दिया जाएगा ये लोग उसी हिसाब से चलेंगे। उनका कहना है कि यह लोग सामान्य नहीं है। इसलिए, फिलहाल इन डेवलपमेंट को करीबी निगाह रखकर देखने की ज़रूरत है।

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मूसा बिगाड़ सकता है हिजबुल और लश्कर का समीकरण

हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर के समीकरण बिगड़ने की आशंका के बीच आतंकी जाकिर मूसा का नया पेंच और फंस गया है। मूसा ने आतंक का ज्यादा कट्टर रास्ता अख्तियार करते हुए कश्मीर में इस्लामी शासन लागू करने को अपना उद्देश्य बताया है। यही नहीं, उसने इस्लामी शासन के रास्ते में रोड़ा बनने वाले हुर्रियत नेताओं को भी मौत के घाट उतारने की धमकी दी है। इसके लिए उसने हिजबुल मुजाहिदीन छोड़ने में देर नहीं लगाई। अब मूसा कश्मीर में नया आतंकी संगठन बना सकता है। मूसा का नया आतंकी संगठन नए तेवरों के साथ हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर के लिए नई चुनौती होगा।

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Posted By: Rajesh Kumar

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