नई दिल्‍ली (स्‍पेशल डेस्‍क)। दिल्‍ली-एनसीआर में हवा का स्‍तर लगातार खतरनाक होता जा रहा है। सोमवार सुबह आनंद विहार और आसपास के इलाकों में हवा में पीएम 2.5 का स्तर 118 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 10 का स्‍तर 691 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया। जबकि इनका स्‍तर 60 और 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक होना चाहिए। यहां पर जहां हवा में नाइट्रिक ऑक्‍साइड का स्‍तर 65 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, वहीं नाइट्रोजन डाईऑक्‍साइड का स्‍तर 143 को भी पार कर गया था। जबकि इन दोनों का मानक स्‍तर महज 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। गाजियाबाद की यदि बात करें तो यहां पर सोमवार सुबह करीब 8 बजे हवा में पीएम 2.5 का स्तर 300 और पीएम 10 का स्‍तर 562 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया है। वहीं नाइट्रिक ऑक्‍साइड और ऑक्‍साइड ऑफ नाइड्रोजन के स्‍तर की बात करें तो यह 325 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पाया गया है।

शरीर के लिए खतरनाक हैं ये महीन कण

यहां पर यह बता देना जरूरी होगा कि यह सभी हवा में तैरते हुए बेहद महीन कण होते हैं जो सांस के जरिए इंसान के अंदर जाते हैं और फैफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे लोग जो अस्‍थमा से ग्रसित होते हैं उनके लिए यह कण बड़ी समस्‍या खड़ी कर देते हैं। ऐसे लोगों को इस तरह के मौसम या हवा में बेहद सावधानी बरतनी जरूरी होती है। वहीं यह बच्‍चों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने किया है आतिशबाजी को बैन

पिछले एक सप्‍ताह से आसमान में छाई जहरीली धुंध इस बात की गवाह है कि जिस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली एनसीआर में आतिशबाजी को बैन किया था वह कहीं न कहीं विफल साबित हो रही है। इसका एक पक्ष और है जिसपर कोर्ट ने भी घ्‍यान आकर्षित किया था। कोर्ट ने पिछले दिनों दिए अपने फैसले में कहा था कि सिर्फ आतिशबाजी ही दिल्‍ली एनसीआर में प्रदूषित हो रही हवा का एकमात्र कारण नहीं है। इसके पीछे दिल्‍ली में चलने वाले वाहन भी हैं और दिल्‍ली से लगे राज्यों में जल रही पराली भी है। वाहनों की बात की जाए तो अकेले दिल्ली में ही इस वर्ष मई तक इनकी संख्या एक करोड़ को पार कर गई थी। यह सिर्फ वे वाहन थे जो रजिस्टेर्ड थे। इतना ही नहीं दो दिन पहले ही गाजीपुर में मौजूद कूड़े के पहाड़ में आग लगने से भी दिल्‍ली एनसीआर की हवा लगातार प्रदुषित हुई है। हालांकि इस पर काफी मशक्‍कत के बाद काबू पा लिया गया था। लेकिन इसके चलते कई इलाकों में हवा में प्रदूषण का स्तर शनिवार को दस गुना तक बढ़ गया था।

अन्‍य जगहों के मुकाबले बुराड़ी में हवा साफ

इस दौरान आनंद विहार और आसपास के इलाकों में हवा में पीएम 2.5 का स्तर 647 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया, जबकि इसका स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। हालांकि रविवार रात 9 बजे पीएम 2.5 का स्‍तर 318 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 10 का स्‍तर 581 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पर पहुंच गया था, जबकि इसका सही स्‍तर महज 100 है। हवा में नाइट्रोजन डाईऑक्‍साइड को स्‍तर जो 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होना चाहिए वह भी करीब 169 पर पहुंच गया था। हालांकि यहां के मुकाबले बुराड़ी की तरफ हवा में सुधार था। वहीं पूसा की तरफ हवा का स्‍तर बेहतर नहीं था। यहां पर पीएम 2.5 108 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 10 भी 244 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पाया गया। वहीं मथुरा रोड पर पीएम 2.5 की मात्रा तो ठीक पाई गई, लेकिन पीएम 10 का स्‍तर 548 को भी पार कर चुका था।

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गाजियाबाद में हवा में प्रदूषण का स्‍तर

गाजियाबाद की यदि बात करें तो यहां पर पीएम 2.5 करीब 284 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और पीएम 10 करीब 755 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर मापा गया है। यहां पर नाइट्रिक ऑक्‍साइड और नाइट्रोजन ऑक्‍साइड समेत ऑक्‍साइड ऑफ नाइट्रोजन के स्‍तर में भी इजाफा पाया गया। दूसरी तरफ नोएडा में हवा के स्‍तर में सुधार पाया गया।

पिछले पांच माह में पहली बार जहरीली हुई हवा

बीते पांच माह में दिल्‍ली की हवा पहली बार इतनी खराब हुई है। इससे पहले मई 2017 में दिल्‍ली की हवा जहरीली हो गई थी। 6 अक्‍टूबर तक दिल्ली की हवा मॉडरेट थी और हवा में एक्‍यूआई का स्‍तर 200 से नीचे था जो शनिवार को 300 के खतरनाक स्‍तर तक पहुंच गया था। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी की रिपोर्ट पर यदि नजर डालेंगे तो पता चलता है कि इस दौरान आनंद विहार में पीएम 10 का स्तर 720 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के करीब था। मानकों के तहत यह 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। वहीं सफर (system of air quality and weather forecasting and research) की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर 122 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा। उधर, पीएम 10 का स्तर 215 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा।

क्‍यों लगती है कूड़े के पहाड़ में आग

दिल्‍ली में बने कूड़े के पहाड़ों की यदि बात करें तो गाजीपुर आज करीब 60 मीटर तक ऊंचा हो चुका है। यहां पर कूड़ा सड़ने की वजह से लैंडफिल साइट से अक्सर मीथेन गैस निकलती है। इसकी वजह से गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल साइड पर आग लगने की घटनाएं लगातार होती रहती हैं। इस साइट पर रोजाना लगभग 2500 मीट्रिक टन कूड़ा डाला जाता है। कूड़े का पहाड़ जब बनाया गया था तो इसे सिर्फ 20 मीटर तक ऊंचा बनाने की अनुमति मिली थी।

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By Kamal Verma