'अराजकता फैलाना किसी का अधिकार नहीं', जागरण साहित्य सृजन सम्मान में बोले राजनाथ सिंह
दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन की जयंती पर बुद्धिनाथ मिश्र को दैनिक जागरण साहित्य सृजन सम्मान से सम्मानित किया गया है।

दैनिक जागरण साहित्य सृजन सम्मान समारोह में राजनाथ सिंह का संबोधन

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक और लेखक नरेन्द्र मोहन जी की जयंती के अवसर पर बुद्धिनाथ मिश्र को दैनिक जागरण साहित्य सृजन सम्मान से सम्मानित किया गया है।
इस सम्मान के अंतर्गत चयनित लेखक बुद्धिनाथ मिश्र को 11 लाख की रुपये की सम्मान राशि के अलावा स्मृति चिह्न प्रदान किया गया है।
दैनिक जागरण साहित्य सृजन सम्मान कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोहन जी ने पत्रकारिता के मूल्यों और आदर्शों को सर्वोपरि रखा। दैनिक जागरण आज भी नरेंद्र जी के मूल्यों के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, जब आपातकाल लगा था तब उन्होंने संपादकीय में नया लोकतंत्र ? सेंसर लागू, शांत रहें! लिखकर कालम खाली छोड़ दिया था। वह खाली स्थान विरोध का प्रतीक था। जिसने अभिव्यक्ति की आजादी पर लगी पाबंदियों के खिलाफ आवाज उठाई थी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि, नरेंद्र मोहन जी एक पत्रकार होने के साथ-साथ एक लेखक भी थे।
उन्होंने कहा, मैं मानता हूं कि समाज के आगे बढ़ने के लिए जनरेशन चेंज बहुत जरूरी है। जनरेशन कॉन्फ्लुएंस कई जनरेशन का संगम है। पीड़ियों के बदलाव के साथ ही समाज का विस्तार होता है। जनरेशन में बदलाव और गैप हमेशा नेगेटिव नहीं होता है। यह नॉलेज, इनोवेशन और प्रोग्रेस का आधार है। पीढ़ियों के बदलाव के बीच ही भविष्य आकार लेता है
जेन जी ने इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बीच अपना जीवन जिया है। अब संवाद का तरीका बदला है, मनोरंजन का तरीका बदला है।
1947 में ट्रांजिस्टर का आविष्कार हुआ। यही आविष्कार आज सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का आधार बना है। 1950 में एलन ट्यूरी ने ट्यूरिंग टेस्ट का विचार सामने रखा था। बाद में लोगों ने इस पर रिसर्च की और इन सबने आज के एआई का मार्ग प्रशस्त किया है
नीतियां बनाते समय हमें यह भी सोचना चाहिए कि आने वाली पीढ़ी को इससे कैसे फायदा हो सकता है, और हमारी सरकार इसी दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बंद कर दिए गए हैं। भारत में भी सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम आयु निर्धारित की जाए। कुछ लोग इसका भी विरोध करेंगे। लेकिन हम इसके लिए उचित कदम उठाएंगे, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
रक्षा मंत्री ने कहा, इस दौरन में लीडरशिप,विजन, करेज और इमोशनल इंटेलिजेंस भी बहुत जरूरी है। जो युवा अनिश्चितता में निर्णय ले सकेंगे, लोगों को साथ लेकर चल सकेंगे और बदलाव को अपनाने का साहस रखेंगे। वे एआई के दौर में भी आगे बढ़ेगे और भविष्य को वे गढ़ेंगे।
नई शिक्षा नीति के तहत क्रिटिकल थिंकिंग, क्रिएटिविटी, प्रॉब्लम सॉल्विंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि युवा केवल बदलती तकनीक के युग जॉब सीकर न रहे। बल्कि अपनी लीडरशिप, इनोवेशन के दम पर जॉब देने वाले और नई पीढ़ी के लीडर बने।
उन्होंने कहा भविष्य पर ध्यान देने वाली पीढ़ी ज्यादा खुद से प्रेरित होती है, सीमाओं से परे सोचती है और दुनिया को एक व्यापक नजरिए से देखती है। लेकिन तरक्की कभी भी समझदारी की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। पिछली पीढ़ी अपने साथ अनुभव, मूल्य और ऐसे सबक लेकर आती है जो सिर्फ समय ही सिखा सकता है।
एक-दूसरे के फर्क के आधार पर राय बनाने के बजाय, दोनों पीढ़ियों को एक-दूसरे को समझने, सम्मान करने और एक-दूसरे से आगे बढ़ने की सीख लेनी चाहिए। आखिरकार, भविष्य को इनोवेशन की जरूरत है, लेकिन उसे अतीत की समझदारी की भी जरूरत है।
उन्होंने कहा कि देश में अराजकता फैलाने का अधिकार किसी को नहीं है।
उन्होंने कहा, आज की युवा पीढ़ी यानी जेन-जी खुद बहुत जागरुक है। वे अपनी जिम्मेदारी भली भांती जानते हैं। उन्होंने वेस्टर्न इन्टरेस्ट द्वारा थोड़े समय के लिए भ्रमिक किया जा सकता है, लेकिन उन्हें राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य से कभी भटकाया नहीं जा सकता है।
युवाओं पर हमें पूरा भरोसा है, लेकिन भरोसे के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। सभी मूल्यों को साथ लेकर हमारा युवा देश के विकास में योगदान देता रहेगा।
