चुनाव आयोग विवाद के बीच परिसीमन पर सियासी हलचल, जगन रेड्डी के 'पश्चाताप' से विपक्ष को दिखी नई उम्मीद
आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम जगनमोहन रेड्डी द्वारा चुनाव आयुक्तों को कानूनी कवच देने वाले कानून पर पश्चाताप जताने से ...और पढ़ें

जगनमोहन रेड्डी ने चुनाव आयुक्त कानून पर पश्चाताप जताया

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संजय मिश्र, नई दिल्ली। परिसीमन बिल की फिर से शुरू हुई सियासी हलचल के बीच आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम जगनमोहन रेडडी द्वारा चुनाव आयुक्तों को कानूनी कवच देने वाले कानून का समर्थन करने पर पश्चाताप जताए जाने को विपक्षी खेमा अपने लिए सकारात्मक मानते हुए वाईएसआर कांग्रेस से संपर्क साधने की पहल में जुट गया है।
आईएनडीआइए गठबंधन महिला आरक्षण के आवरण में परिसीमन बिल लाने की राजग सरकार की नई पहल को रोकने के लिए लोकसभा में अपने समर्थन का दायरे बढ़ाने की कोशिश में है।
इसके मद्देनजर ही वामपंथी दल और तृणमूल कांग्रेस विपक्षी खेमे की ओर से जगनमोहन रेडडी तथा द्रमुक को परिसीमन बिल पर विपक्षी खेमे के साथ लाने की कोशिश में लग गए हैं।
जगनमोहन रेड्डी ने चुनाव आयुक्त कानून पर पश्चाताप जताया
एसआईआर विवाद के बाद आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में कथित धांधली की जगन की शिकायतों के बाद विपक्षी खेमा उनके करवट बदलने की संभावनाओं के रूप में देख रहा है।
विपक्षी दलों को उम्मीद है कि परिसीमन जैसे संवेदनशील विषय पर भाजपा से दूरी बनाने का प्रयास करेगी, चूंकि कांग्रेस के जगनमोहन से रिश्ते बेहद कटु हैं। इसलिए, वामदल तथा तृणमूल उनको साधने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
वैसे आइएनडीआइए गठबंधन के शीर्ष नेताओं की सितंबर के आखिर में हुई बैठक के बाद भी तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने जगनमोहन तथा द्रमुक प्रमुख स्टालिन जैसे नेताओं से अच्छे संबंधों का हवाला देते हुए वोट-चोरी के मुद्दे पर उन्हें साथ लाने की पहल करने की बात कही थी।
पक्ष तथा विपक्ष की संख्या बल की जंग में वाईएसआर कांग्रेस के पांच लोकसभा सांसदों की अपनी भूमिका है। विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस के दोनों प्रमुख सहयोगी वामदल और तृणमूल जगन के साथ ही स्टालिन के भी संपर्क में हैं। एसआइआर पर द्रमुक का यह रुख ही परिसीमन बिल पर विपक्ष की उम्मीद है।
खासतौर पर इसलिए भी कि बीते अप्रैल में परिसीमन बिल के सरकार के पहले प्रयास को विफल करने में द्रमुक के विरोध ने अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि तब कांग्रेस-द्रमुक दोस्ती कायम थी जो मई में विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद टूटी।
द्रमुक के 22 सांसद परिसीमन बिल पर निर्णायक भूमिका में
परिसीमन बिल पर राजग तथा विपक्ष दोनों के लिए द्रमुक के 22 लोकसभा सांसदों का रुख राजनीतिक रूप से निर्णायक है। इस संविधान संशोधन बिल पर लोकसभा में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए द्रमुक का समर्थन सरकार की अपरिहार्य जरूरत है।
द्रमुक का विपक्षी खेमे के साथ जाने का अर्थ होगा कि सरकार के लिए इस बिल की राह बनाने की गुंजाइश लगभग बंद हो जाएगी। इसीलिए भाजपा की ओर से भी हाल के दिनों में द्रमुक से संपर्क-संवाद कर उसे साधने के प्रयासों की सियासी हलचलें सुनाई देती रहती हैं।
हालांकि, इसके बाद भी परिसीमन पर दोनों खेमों की ओर से जारी दांव-पेंच थमा नहीं और द्रमुक भी अपने फायदे के लिए इसके सियासी लाभ-हानि का आकलन कर स्पष्ट रुख अपनाने से परहेज कर रही है।
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