नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। देश का सबसे बड़ा राज्‍य उत्तर प्रदेश और यहां का एक जिला है अमरोहा। इसी अमरोहा में एक गांव ऐसा भी है जहां पिछले दस वर्षों से किसी ने अपनी बेटी का नाम शबनम नहीं रखा है। इसकी पीछे बेहद खौफनाक कहानी है जिसमें एक किरदार बेहद अहम है। लेकिन इस किरदार ने पूरे गांव को इस कदर बदनाम कर दिया कि बीते दस वर्षों से यहां किसी ने अपनी बेटी का नाम शबनम नहीं रखा है। मुमकिन है कि आने वाले वर्षों में भी यहां पर कोई शबनम पैदा नहीं होगी।

शबनम को मिली है फांसी की सजा
इस कहानी के अहम किरदार का नाम दरअसल शबनम है, जिसको अपने ही परिवार के सात लोगों की हत्‍या करने के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई है। इस सजा की पुष्टि न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ने की बल्कि राष्‍ट्रपति भी उसकी दया याचिका को ठुकरा चुके हैं। यह सब बीते दस वर्षों में हो चुका है। अब उसकी तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक रिव्‍यू पेटिशन फाइल की गई है जिसपर कोर्ट आने वाले कुछ दिनों में सुनवाई करेगा और तय करेगा कि उसको फांसी मिलेगी या कोर्ट से रहम की भीख मिलेगी। शबनम द्वारा किया गया अपराध कितना जघन्‍य है इसका अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि उसने अपने परिवार के जिन सात लोगों की हत्‍या को अंजाम दिया उसमें एक आठ माह का नवजात भी शामिल था।

बावनखेड़ी गांव की वो खौफनाक रात
अमरोहा से करीब 20 किमी दूर बावनखेड़ी गांव में 14-15 अप्रैल की रात में इस अपराध को अंजाम दिया गया। इन हत्‍याओं को अंजाम देने के पीछे वजह थी प्‍यार का पागलपन। दरअसल, शबनम एक लड़के से प्‍यार करती थी जिसका नाम सलीम था। जिस वक्‍त शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर इस हत्‍या को अंजाम दिया उस वक्‍त वह खुद सात माह की गर्भवती थी। इसके बाद भी उसको आठ माह के नवजात की जिंदगी लेने में हाथ नहीं कांपे। परिवार वालों को शबनम और सलीम का संबंध गंवारा नहीं था, यही वजह थी कि इन दोनों ने मिलकर इन हत्‍याओं को अंजाम दिया था। शबनम के परिवार को इस बात का भी ऐतरात था कि सलीम न सिर्फ उनकी जाति का था बल्कि वह आर्थिक रूप से भी कमजोर था। इतना ही नहीं वह जहां महज पांचवीं पास था वहीं शबनम इंग्लिश में डबल एमए थी और एक स्‍कूल में टीचर थी। शबनम का परिवार जहां सुफियाना था वहीं सलीम पठान था। अप्रैल की उस खौफनाक रात को यहां के गांववाले आज तक नहीं भूल सके हैं।

संबंधों को लेकर था तनाव
शबनम के घर को फिलहाल उसके अंकल ने अपने कब्‍जे में ले रखा है लेकिन वह भी उस रात को याद करते हुए कांप उठते हैं। वह शबनम के नाम से ही खौफ में आ जाते हैं और उस दिन और शबनम को याद भी नहीं करना चाहते हैं। शबनम के परिवार की बात करें तो वह आर्थिक रूप से काफी संपन्‍न था। शबनम के पिता जो खुद आर्ट के टीचर थे, कि करीब तीस बीघा खेती थी। उस रात के बाद गांव में कोई इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं था कि पिता का कहना मानने वाली शबनम इस खौफनाक अपराध को इतना आगे जाकर अंजाम दे सकती थी। इन दोनों परिवारों के बीच इनके संबंधों को लेकर काफी तनाव जरूर था।

खुलते गए राज दर राज
हत्‍या के बाद शबनम ने जो पुलिस को पहली बार बयान दिया उसमें था कि एक चोर उनके घर में घुस आया और उसने हत्‍याओं को अंजाम दिया। यह सब उस वक्‍त हुआ जब वह बॉथरूम में थी। लेकिन पुलिस की तफ्तीश में जो राज खुला वह चौंकाने वाला था। जांच में पता चला कि शबनम और सलीम के बीच में उस दिन दर्जनों बार फोन पर बात हुई थी। इतना ही नहीं इन दोनों के बीच इन हत्‍याओं को अंजाम देने के कुछ मिनट बाद भी बात हुई जिसके बाद शबनम ने शोर मचाया था। उसके शोर को सुनकर सामने रहने वाले इंतजार अली सबसे पहले उसके घर पहुंचे थे और वहां का नजारा देखकर हैरान हो गए थे। उन्‍होंने ही पुलिस को फोन कर इस अपराध की जानकारी भी दी थी।

पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आया सच
शवों की पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट ने इस मामले को काफी हद तक साफ कर दिया था। पुलिस रिपोर्ट में कहा गया था कि घर में कहीं भी इस तरह के कोई सुबूत नहीं मिले जिससे यह कहा जा सके कि जिनकी हत्‍या हुई उन्‍होंने किसी भी तरह का कोई संघर्ष किया था। यहां पर शबनम के बयान और घर की तस्‍वीरें और हालात पूरी तरह से अलग थे। इसमें यह बात साफ हो गई थी कि इन हत्‍याओं को घर के अंदर मौजूद किसी व्‍यक्ति ने ही अंजाम दिया है। पूछताछ में शबनम टूट गई और अपना जुर्म कबूल कर लिया। इसके बाद पुलिस ने हत्‍या के लिए इस्‍तेमाल किया गया हथियार भी बरामद कर लिया था।

बेटे की परवरिश कर उतार रहे कर्ज
पुलिस ने शबनम और सलीम को हत्‍या के आरोप में गिरफ्तार किया और निचली अदालत ने दोनों को ही हत्‍या के आरोप में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। सुप्रीम कोर्ट तक ने इस सजा पर अपनी मुहर लगाई और बाद में राष्‍ट्रपति ने भी इनकी तरफ से दायर दया याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में रिव्‍यू पेटिशन फाइल की गई है, जिस पर इसी माह फैसला होना है। जिस वक्‍त शबनम ने इन हत्‍याओं को अंजाम दिया था उस वक्‍त उसकी उम्र 25 वर्ष थी। आज उसका बेटा करीब दस वर्ष का है, लेकिन वह अपनी मां को नहीं पहचानता है। उसके बेटे की देखभाल फिलहाल कभी शबनम के कॉलेज में उनके जूनियर रहे उस्‍मान और उनकी पत्‍नी वंदना करते हैं। कॉलेज में शबनम उनसे दो साल सीनियर थी।

क्‍या होगा कोई नहीं जानता
उनके मुताबिक जब उनके पास अपनी फीस जमा करने के पैसे नहीं थे उस वक्‍त शबनम ने ही उनकी मदद की थी। वह शबनम के बेटे की अच्‍छी परवरिश कर उस कर्ज को उतारना चाहते हैं। वहीं शबनम को उम्‍मीद है कि शायद सुप्रीम कोर्ट उसके बेटे के प्रति रहम दिखाते हुए उसकी फांसी की सजा को बदल दे और शायद वह भविष्‍य में अपने बेटे के साथ रह सके। लेकिन शबनम के बेटे को आज तक भी उसकी मां द्वारा किए गए अपराध की जानकारी नहीं है। उस्‍मान ने भी कभी इस बारे में उसको कुछ नहीं बताया। उस्‍मान उसको गोद नहीं ले सकते क्‍योंकि इस्‍लाम में इस तरह की इजाजत नहीं है। बहरहाल, भविष्‍य में शबनम जेल से बाहर आ सकेगी या उसको फांसी होगी इसका फैसला जल्‍द ही कोर्ट सुना देगी।

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Posted By: Kamal Verma