जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आरक्षण मिलने के बाद भी ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) की पिछड़ी रह गई जातियों का पता लगाने में अभी कुछ और वक्त लगेगा। इसके लिए गठित जस्टिस रोहिणी आयोग ने सरकार से दो महीने का और समय देने की मांग की है। फिलहाल आयोग का कार्यकाल 31 मई को खत्म हो रहा है। इससे पहले भी आयोग के कार्यकाल को कई बार बढ़ाया जा चुका है।

सरकार ने इस आयोग का गठन ओबीसी में शामिल सभी जातियों तक आरक्षण का समान लाभ पहुंचाने के लिए किया है। इसके तहत आयोग को ओबीसी की पिछड़ी रह गई जातियों का पता लगाने और उसके आधार पर ही उनका वर्गीकरण करने का जिम्मा दिया गया है। आयोग ने फिलहाल इसके आकलन आधार उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले और सरकारी नौकरियों को बनाया है। आयोग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक पूरा ब्योरा जुटा लिया गया है। राज्यों के साथ इसको लेकर चर्चा होना बाकी है। इस काम के पूरा होते ही सरकार को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के मुताबिक देश में ओबीसी की मौजूदा समय में करीब 25 सौ जातियां हैं। लेकिन एक आकलन के मुताबिक आरक्षण का लाभ सिर्फ तीन से चार जातियों तक ही सिमटा हुआ है। ऐसे में सरकार के इस कदम को काफी अहम माना जा रहा है। ओबीसी की पिछड़ी जातियों का पता लगाने के लिए सरकार ने आयोग गठित करने का यह फैसला 23 अगस्त 2017 को लिया था। हालांकि इसका गठन बाद में दो अक्टूबर 2017 को किया गया था।

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Posted By: Nitesh