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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 07, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अंतरिक्ष में टिकी भारत की आसमानी आंख, खराब मौसम में भी ले सकता है तस्वीरें

By Manish PandeyEdited By:
Published: Sat, 07 Nov 2020 09:22 AM (IST)Updated: Sat, 07 Nov 2020 04:33 PM (IST)

इसरो (ISRO) ने दोपहर 3 बजकर 2 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से 10 उपग्रहों को लॉन्च ...और पढ़ें

इसरो आज अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च करेगा
इसरो आज अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च करेगा

नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक बार फिर देश का गौरव बढ़ाया है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से शनिवार को अंतरिक्ष यान पीएसएलवी-सी49 के जरिये एक साथ 10 सेटेलाइट (उपग्रह) सफलतापूर्वक लांच किए गए। इसमें भारत का ईओएस-1 सेटेलाइट भी शामिल है, जो हर मौसम में धरती पर नजर रख सकेगा। अन्य नौ सेटेलाइट दूसरे देशों के हैं। उपग्रहों के सफल परीक्षण पर पीएम मोदी ने इसरो और भारत के अंतरिक्ष उद्योग को बधाई दी। पीएम ने कहा कि कोरोना के इस दौर में समय पर काम पूरा करने के लिए हमारे विज्ञानियों ने कई चुनौतियों का सामना किया और उन पर विजय पाई।

बता दें कि इसरो का यह 51वां मिशन था। इसके बाद विभिन्न अभियानों के तहत भेजे गए सेटेलाइट की संख्या 328 हो गई है। कोरोना महामारी के कारण पिछले काफी वक्त से सेटेलाइट लांच कार्यक्रम रुका हुआ था। इससे पूर्व पिछले साल 11 दिसंबर को आरआइएसएटी-2बीआर1 सेटेलाइट को लांच किया गया था।

इस तरह निगरानी रखेगा ईओएस-1

ईओएस-1 खराब मौसम में भी दिन और रात में तस्वीरें ले सकता है। यह धरती की निगरानी के साथ ही कृषि, वानिकी और आपदा प्रबंधन में मददगार साबित होगा। अन्य नौ सेटेलाइट अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत आने वाले न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआइएल) के साथ व्यावसायिक समझौते के तहत लांच किए गए। इनमें अमेरिका और लग्जमबर्ग के 4-4 और लिथुआनिया का एक सेटेलाइट शामिल है।

सेटेलाइट समूह में तीसरा

ईओएस-1 एक रडार इमेजिंग सेटेलाइट (आरआइएसएटी) है। यह पिछले साल लांच किए गए आरआइएसएटी-2बी और आरआइएसएटी-2बीआर1 सेटेलाइट के साथ मिलकर काम करेगा। पूर्व में ईओएस-1 का नाम आरआइएसएटी-2बीआर2 था। तीन सेटेलाइट के समूह में से यह तीसरा है।

नामकरण की नई प्रणाली

इसरो ईओएस-1 के साथ नई सेटेलाइट नामकरण प्रणाली की ओर बढ़ा है। इसमें सेटेलाइट का नाम उसके उद्देश्य के अनुरूप होगा। जैसे कार्टोसैट सीरीज के सेटेलाइट भूमि की आकृति और मानचित्र के लिए तथा ओशनसैट सेटेलाइट समुद्र की निगरानी के लिए थे। पृथ्वी पर नजर रखने वाले कई सेटेलाइट हैं, जिन्हें अब ईओएस श्रृंखला के रूप में जाना जाएगा।

तैयार करेंगे छोटा सेटेलाइट लांच व्हीकल : सिवन

इसरो चेयरमैन के सिवन ने मिशन की सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, 'हमने यह मिशन कोविड-19 महामारी की चुनौतियों के बीच पूरा किया। अब हम कई और मिशन पर काम कर रहे हैं। फिलहाल पीएसएलवी-50सी को प्रक्षेपित करेंगे, जो सीएमएस-01 सेटेलाइट को छोड़ेगा। इसके बाद हम छोटे सेटेलाइट लांच व्हीकल एसएसएलवी को तैयार करेंगे।' जिन सेटेलाइट का वजन कम होता है, उन्हें एसएसएलवी की सहायता से छोड़ा जा सकता है।