नई दिल्‍ली, एजेंसी। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) प्रमुख के सिवन (K Sivan) ने वर्ष 2020 के पहले दिन बुधवार को अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि चंद्रयान 3 (Chandrayaan 3) प्रोजेक्‍ट को मंजूरी मिल गई है। इसे वर्ष 2021 में लांच करने का भी ऐलान किया गया है। जबकि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 2020 में ही इसे लांच करने की जानकारी दी है।

चंद्रयान 3, गगनयान और तूतीकोरिन में लांचपैड

इसरो के अगले लक्ष्‍य में चंद्रयान 3 के साथ गगनयान व तूतीकोरिन में लांच पैंड शुरू करने की योजना है। गगनयान के जरिए मानव को अंतरिक्ष में पहुंचाने का भारत का पहला अभियान है। इसके अलावा प्रेस कांफ्रेंस में इसरो प्रमुख के सिवन ने बताया कि इस साल हमारे पास 25 योजनाएं हैं।

देश का पहला मानव मिशन गगनयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में स्वतंत्रता दिवस पर गगनयान मिशन की घोषणा की थी, तब उन्होंने कहा था कि तीन अंतरिक्ष यात्री जाएंगे जिसमें एक महिला होगी।

मिशन गगनयान के लिए रूस और फ्रांस के साथ डील की गई है। इसरो की ओर से यह भी बताया गया है कि देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन के तहत 'गगनयान' वर्ष 2022 तक पृथ्‍वी की धुरी पर चक्‍कर लगाने लगेगा। इसके लिए वायुसेना के चार पायलटों का चयन हुआ है और इन्‍हें इसी सप्‍ताह ट्रेनिंग के लिए रूस भेजा जाएगा। इस मिशन के लिए कुल लागत 600 करोड़ रुपये आंका गया है।

वायुसेना के चार पायलट ट्रेनिंग के लिए जाएंगे रूस

इसरो चीफ के सिवन ने बताया, ‘वायुसेन के चार पायलट इस प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहे हैं। इन चारों को ट्रेनिंग के लिए रूस भेजने की योजना है।’ उन्‍होंने बताया, ‘हमने चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) पर अच्‍छी तरक्‍की की हालांकि हम लैंडिंग में सफल नहीं हो सके, अभी भी ऑर्बिटर काम कर रहा है। यह अगले सात सालों तक काम करेगा और हमें डाटा उपलब्‍ध कराएगा।’

चुने गए पायलटों की मेडिकल जांच

बेंगलुरु में स्थित वायुसेना के इंडियन एविएशन मेडिसिन में चारों का चिकित्सकीय परीक्षण हो चुका है। इनमें से तीन एक हफ्ते के लिए अंतरिक्ष में पृथ्वी की धुरी पर चक्कर लगाएंगे। इस दौरान वह पृथ्वी की माइक्रोग्रैविटी और बायो-साइंस पर अध्ययन करेंगे। फि‍लहाल वायुसेना के चुने गए पायलटों की पहचान जाहिर नहीं की गई है। वायुसेना के इन अफसरों का बतौर अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण इसी महीने के तीसरे हफ्ते में रूस में शुरू होगा। सिवन ने बताया कि चारों अंतरिक्ष यात्री पुरुष होंगे।

लैंडर और रोवर होंगे लेकिन ऑर्बिटर नहीं

बेंगलुरु स्थि‍त इसरो मुख्‍यालय में चेयरमैन के सिवन ने बताया कि चंद्रयान-3 में लैंडर और रोवर तो होंगे लेकिन ऑर्बिटर नहीं होगा। सितंबर में चंद्रयान-2 मिशन के जरिए ऑर्बिटर को सफलतापूर्वक स्‍थापित किया गया था। यह वैज्ञानिक आंकड़ा पृथ्‍वी पर भेज रहा है। हालांकि चंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग के बाद रोवर को स्‍थापित नहीं किया जा सका।

चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव है लक्ष्‍य

इस मिशन का लक्ष्‍य चंद्रमा का दक्षि‍णी ध्रुव है जहां पहले कोई चंद्रयान नहीं गया। ऐसा माना जाता है कि यहां क्रेटर्स के तौर पर पानी है। इसरो ने उम्‍मीद जताई थी कि बर्फ के तौर पर वहां मौजूद पानी की पुष्टि करेंगे जो इसने वर्ष 2008 में अपने मिशन में पहली बार खोजा था। केवल अमेरिका, रूस और चीन अब तक चंद्रमा की सतह पर पहुंचे हैं। पिछले साल बीजिंग ने एक मिशन किया था जो असफल रहा वहीं इजरायल का भी स्‍पेसक्राफ्ट सफल लैंडिंग नहीं कर सका।

सहजता से चल रहा मिशन का काम

इसरो प्रमुख ने बताया कि चंद्रयान-3 मिशन का काम बहुत सहजता से चल रहा है। यह मिशन चंद्रयान-2 जैसे ही होगा, लेकिन चंद्रयान-3 में एक लैंडर, रोवर और एक प्रपल्जन मॉड्यूल होगा। सिवन ने कहा कि चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण अगले साल 2021 में बढ़ जाने के आसार हैं।

इसरो ने मांगे 14,000 करोड़ रुपये

सिवन ने बताया कि चंद्रयान-3 परियोजना की लागत करीब 250 करोड़ रुपये है। लेकिन इसकी लांचिंग की लागत करीब 350 करोड़ रुपये होगी। इसलिए इसकी कुल लागत करीब 600 करोड़ रुपये होगी। इसरो ने वर्ष 2020 की परियोजनाओं के लिए सरकार से 14,000 करोड़ रुपये मांगे हैं।

कम लागत में लांच होगा चंद्रयान-3

इससे पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इस बात की जानकारी दी थी। हालांकि इसके बारे में उन्‍होंने ज्‍यादा विवरण नहीं दिया था। उन्‍होंने बताया कि चंद्रयान 2 की तुलना में कम लागत के साथ चंद्रयान 3 लांच किया जाएगा। साथ ही उन्होंने चंद्रयान-2 को ‘निराशाजनक’ बताने की बात को गलत करार दिया। उनके अनुसार, चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला भारत का यह प्रयास असफल नहीं रहा क्‍योंकि इससे काफी कुछ सीखने को मिला है। अभी तक किसी भी देश ने पहले प्रयास में मंजिल हासिल नहीं की। उन्‍होंने कहा कि चंद्रयान-2 के अनुभवों और मौजूदा बुनियादी सुविधाएं चंद्रयान -3 के लागत को कम करेगा। हालांकि उन्होंने इस नए मिशन के लिए निश्चित तारीख बताने से इंकार कर दिया।

पहले प्रयास में किसी देश ने हासिल नहीं की मंजिल

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘काफी संभावना है कि 2020 में लैंडर और रोवर मिशन पूरा होगा। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है चंद्रयान-2 मिशन को असफल नहीं कहा जा सकता है क्‍योंकि इससे हमें काफी कुछ सीखने को मिला है। दुनिया का कोई देश अपने पहले प्रयास में चंद्रमा की सतह पर नहीं पहुंचा। अमेरिका ने भी कई प्रयास किए।’

तूतीकोरिन में होगा लांचपैड

श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के अलावा तमिलनाडु के तूतीकोरिन में इसका लांच पैड होगा। दूसरे लांच पैड के लिए तूतीकोरिन जिले में भूमि अधिग्रहण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि एसएसएलवी (स्माल सैटेलाइट लांच व्‍हीकल) के लिए विशेष रूप से इस जगह का चुनाव किया गया है। ताकि दक्षिण दिशा में लांच का विशेष लाभ मिले। शुरुआत में नए पैड से केवल एसएसएलवी को ही लांच किया जाएगा।

चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 मिशन भारत का पहला प्रयास था। इसरो ने चंद्रमा की सतह के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की योजना बनाई थी। संसद के शीतकालीन सत्र में लिखित प्रक्रिया में केंद्रीय मंत्री ने इस मिशन का पूरा ब्‍यौरा दिया था।

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Posted By: Monika Minal

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