नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान सगंठन (इसरो) ने आज अभी तक के अपने सबसे बड़े प्रक्षेपण अभियान को लांच किया। इस अभियान के तहत इसरो ने महासागर और मौसम के अध्ययन के लिए तैयार किये गये स्कैटसैट-1 (एससीएटीएएटी-1) सहित सात अन्य उपग्रहों को प्रक्षेपित किया। आइए जानते हैं इस उपग्रह की प्रमुख विशेषताएं-

  • पीएसएलवी अर्थात् 37 वें पोलर उपग्रह प्रक्षेपण यान, ने आज आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से 8 उपग्रहों को लेकर उड़ान भरी। इनमें भारत के तीन, अल्जीरिया के तीन तथा कनाडा और अमेरिका से एक-एक उपग्रह शामिल हैंं।
  • यह पहली बार है, जब पीएसएलवी दो अलग-अलग कक्षाओं में पेलोड प्रक्षेपित करेगा। इस कार्य के लिए चार चरणों वाले इंजन को दो बार दोबारा शुरू किया जाएगा।
  • दो अन्य भारतीय उपग्रहों में मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) द्वारा तैयार प्रथम (10 किलोग्राम) और पीईएस विश्वविद्यालय, बेंगलुरू का पिसैट (5.25 किलो) शामिल है।
  • प्रथम का उद्देश्य कुल इलेक्ट्रॉन संख्या का आकलन करना है जबकि पीआई सैट अभियान रिमोट सेंसिंग अनुप्रयोगों के लिए नैनोसेटेलाइट के डिजाइन एवं विकास के लिए है।
  • पीएसएलवी सी-35 के साथ गए सभी आठ उपग्रहों का कुल वजन लगभग 675 किलोग्राम है। स्कैटसैट-1 का वजन 371 किलोग्राम है। यह उपग्रह अंतरिक्ष की कक्षा से मौसम की भविष्यवाणी में मदद करेगा।
  • स्कैटसैट-1 एक प्रारंभिक उपग्रह है और इसे मौसम की भविष्यवाणी करने और चक्रवातों का पता लगाने के लिए है।
  • इसरो का ये अब तक सबसे लंबा पीएसएलवी उपग्रह लॉन्च मिशन है। इसमें दो घंटे 15 मिनट से अधिक का समय लगा। इस उपग्रह को लांच करते समय इसकी स्पीड 2660 किलोमीटर प्रतिघंटे की रही, जो इसके लिए भी एक उपलब्धि है।
  • एक ही बार में कई उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की क्षमता ने भारत को दुनिया के इस बाज़ार में एक बड़ा खिलाड़ी बना दिया है।
  • विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत ज़्यादा बड़े उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाने में सफल हो जाता है, तो इससे सैटेलाइट लॉंचिंग के बाज़ार में भारत की स्थिति और मज़बूत हो सकती है और इससे भारत अरबों डॉलर की कमाई कर सकता है।
  • इसी वर्ष जून में इसरो ने पीएसएलवी के माध्यम से एक साथ 20 उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंंचाया था। उनमें भारत के तीन और 17 विदेशी उपग्रह थे।
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Posted By: kishor joshi

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