नई दिल्ली, एएनआइ। पूर्व इसरो विज्ञानी नंबी नारायणन को जासूसी के मामले में फंसाने में केरल के कुछ पुलिस अधिकारियों की कथित संलिप्तता से जुड़ी जांच की स्थिति रिपोर्ट सीबीआइ ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सौंप दी। नंबी पर 1994 में जासूसी का आरोप लगाया गया था। शीर्ष अदालत सीबीआइ की रिपोर्ट पर 26 जुलाई को विचार कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने 15 अप्रैल को अपने आदेश में सीबीआइ को निर्देश दिया था कि वह नंबी नारायणन को फंसाने में शामिल रहे केरल के कुछ पुलिस अधिकारियों की कथित संलिप्तता की जांच करे और विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे।

पीठ ने जस्टिस (सेवानिवृत्त) डीके जैन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति की ओर से दाखिल रिपोर्ट पर भी संज्ञान लिया था जिसने इस मामले की जांच की थी और इस साल मार्च में सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंपी थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि समिति ने इसे गंभीर मामला बताते हुए आगे की जांच की जरूरत जताई है।

पीठ ने कहा था, 'रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में ही रहेगी और कानून के मुताबिक आगे बढ़ने के लिए सीबीआइ अधिकारियों को दी जाएगी। हम रजिस्ट्री को निर्देश देते हैं कि रिपोर्ट की एक प्रति सीबीआइ के निदेशक या प्रभारी निदेशक को अग्रसारित करे।' साथ ही शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि यह रिपोर्ट प्रकाशन के लिए नहीं बनी है। इस समिति का गठन शीर्ष अदालत के 18 सितंबर, 2018 के आदेश के अनुरूप किया गया था। पीठ का यह भी कहना था कि सीबीआइ को इस रिपोर्ट को प्रारंभिक रिपोर्ट के तौर पर इस्तेमाल करने की छूट होगी।

हाल ही में इसरो के पूर्व विज्ञानी नंबी नारायणन ने केरल की एक अदालत को बताया था कि उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री को बताया था कि उन्हें 1994 के जासूसी मामले में फंसाने के पीछे अमेरिका का हाथ था। बकौल नारायणन तब इसे प्रचारित नहीं करने के लिए कहा गया था ताकि अमेरिकी सरकार के साथ देश के संबंध खराब न हों। नारायणन ने ये बातें अपने अभिवेदन में तिरुअनंतपुरम के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पी. कृष्णकुमार के समक्ष कहीं।