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ISRO के फेल हुए PSLV मिशन में जिंदा बचा ये KID, भेज रहा है डेटा

Published: Tue, 13 Jan 2026 10:44 PM (GMT+05:30)

इसरो का PSLV-C62 मिशन 12 जनवरी को तीसरे स्टेज पर विफल हो गया, जिससे पूरा पेलोड खोने की आशंका थी। ...और पढ़ें

इसरो मिशन। (फाइल फोटो)

इसरो मिशन। (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इसरो का PSLV-C62 मिशन 12 जनवरी को तीसरे स्टेज पर जाकर फेल हो गया। सोचा जा रहा था कि पीएसएलवी का पूरा पेलोड खो गया है। इस पेलोड में अन्वेषा सर्विलांस सैटेलाइट भी शामिल है। तो वहीं, स्पेनिश स्टार्टअप ऑर्बिटल पैराडाइम ने मंगलवार को खुलासा किया कि उसका 'केस्ट्रेल इनिशियल डेमोंस्ट्रेटर' या KID कैप्सूल न सिर्फ स्पेसक्राफ्ट से अलग होने में कामयाब रहा बल्कि उसने डेटा भी भेजा है।

ऑर्बिटल पैराडाइम के हैंडल ने एक्स पर पोस्ट किया, "हमारी KID कैप्सूल सभी मुश्किलों के बावजूद PSLV C62 से अलग हो गई, चालू हो गई और डेटा भेजा। हम ट्रैजेक्टरी को फिर से बना रहे हैं। पूरी रिपोर्ट जल्द आएगी।"

कंपनी का क्या कहना है?

कंपनी का कहना है कि वह स्पेस इंडस्ट्रियलाइजेशन को संभव बनाने के लिए काम करती है और इस मकसद से ऑर्बिट से पृथ्वी तक बार-बार, कुशल और आसानी से मिलने वाली उड़ानें देना चाहती है। इसमें ऐसे कैप्सूल डिजाइन करना शामिल है जो दोबारा एंट्री के समय ज्यादा तापमान को झेल सकें। साथ ही यह पक्का हो सके कि अंतरिक्ष से पृथ्वी तक ऐसी कार्गो यात्राएं तुलनात्मक रूप से कम खर्चीली हों।

क्या है KID?

किड एक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर है और कंपनी के प्रस्तावित व्हीकल 'कर्नेल' का एक प्रोटोटाइप था, जिसे ऑर्बिट से 120 kg तक का पेलोड वापस पृथ्वी पर लाने के लिए बनाया गया है।

ऑर्बिटल पैराडाइम के को-फाउंडर और सीईओ फ्रांसेस्को कैसियाटोर ने मिशन से पहले लिखा था कि KID को स्पेस में भेजने के पीछे का मकसद कंपनी को एटमॉस्फेरिक री-एंट्री में मास्टर बनने कीशिश करके हुए इसे आगे ले जाना था।

KID के साथ और कौन-कौन था?

KID के साथ पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) 15 सैटेलाइट ले जा रहा था। इसमें EOS-N1 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट और अन्वेषा नाम का सर्विलांस सैटेलाइट शामिल था, जिसे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने डेवलप किया था।

अन्वेषा की इमेजिंग क्षमताओं का मकसद डिफेंस सेक्टर में मदद करना था, जिससे भारत दुश्मन की गतिविधियों और मूवमेंट की पहचान कर सके। पेलोड में डेडिकेटेड टैंकर सैटेलाइट, आयुलसैट, और ध्रुव स्पेस के साथ-साथ स्टूडेंट्स द्वारा बनाए गए कुछ सैटेलाइट भी थे।

कहां हुई चूक?

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के 2026 के पहले मिशन के तहत लॉन्च किया गया PSLV-C62 आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सुबह 10.18 बजे लॉन्च हुआ। स्पेस एजेंसी ने बताया कि पहले दो स्टेज ने उम्मीद के मुताबिक काम किया, लेकिन तीसरे स्टेज में चीजें खराब होने लगीं।

ISRO चेयरमैन वी नारायणन ने कहा, "जब फ्लाइट के तीसरे स्टेज के दौरान स्ट्रैप-ऑन मोटर्स गाड़ी को तय ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए थ्रस्ट दे रहे थे, तब रॉकेट में गड़बड़ी और बाद में फ्लाइट पाथ से भटकाव देखा गया।"

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