श्रीहरिकोटा, जेएनएन। 50 बरस का इसरो अगले 48 दिन में 15 मुश्किल पड़ावों को पार करते हुए चंद्रयान-2 के लैंडर-रोवर को चांद की सतह पर उतार देगा। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर पहला कदम बढ़ाते हुए सोमवार को दोपहर 2:43 बजे चंद्रयान-2 को लांच किया गया। अपने कंधे पर सवा सौ करोड़ भारतीयों की उम्मीद लिए इसरो के 'बाहुबली' रॉकेट ने प्रक्षेपण के ठीक 16 मिनट बाद यान को सुरक्षित तरीके से पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर दिया।

जैसे ही यान ने रॉकेट से अलग होकर अपना सफर शुरू किया, इस अभियान से जुड़े हर शख्स के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। खुशी के इस मौके पर हर भारतीय के मन में मानो बस तीन शब्द गूंज रहे थे 'चांद चले हम'। सात सितंबर को जैसे ही चांद की सतह पर चंद्रयान-2 के लैंडर-रोवर कदम रखेंगे, भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जाएगा। अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ने ही अपने यान चांद पर उतारे हैं।

अमेरिका ने जब चांद की सतह पर मानव भेजने का अभियान पूरा कर लिया था, उसके करीब महीनेभर बाद 15 अगस्त, 1969 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना की गई थी। आज भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी मेधा से उस ऊंचाई को छू लिया है कि चंद्रयान-2 के साथ अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी अपना पेलोड भेजा है। जितने खर्च में हॉलीवुड की हालिया ब्लॉकबस्टर 'अवेंजर्स : एंडगेम' बनी थी, उससे तिहाई खर्च में इसरो ने चंद्र अभियान को अंजाम दिया है।

देर आए, दुरुस्त आए

चंद्रयान-2 को 15 जुलाई की सुबह 2:51 बजे लांच करने की तैयारी थी। हालांकि उस दिन लांचिंग से 56 मिनट पहले रॉकेट में कुछ गड़बड़ी दिखने के कारण अभियान को टाल दिया गया था। वैज्ञानिकों का कहना था कि ऐसे अभियान में देरी स्वीकार्य है, लेकिन खामी नहीं। ऐसे हर अभियान से देश के करोड़ों लोगों की उम्मीद जुड़ी होती है। जरा सी खामी अभियान को खतरे में डाल सकती है।

सोमवार को इसरो ने पूरे अभियान को जितने सटीक तरीके से अंजाम दिया, उसे देखकर कहा जा सकता है कि देर आए, मगर दुरुस्त आए। लांचिंग से लेकर यान के पृथ्वी की कक्षा में पहुंचने तक के 16 मिनट के सफर जितने सटीक तरीके से बीता, वह किसी वैज्ञानिक अभियान के लिए बड़ी उपलब्धि होता है। इसरो ने इस अभियान को उम्मीद से बेहतर बताया है।

बाहुबली ने भी बाहुबली को सराहा

चंद्रयान-2 की लांचिंग की जिम्मेदारी इसरो ने अपने सबसे भारी रॉकेट जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्हीकल-मार्क 3 (जीएसएलवी-एमके 3) को सौंपी थी। 640 टन वजनी इस रॉकेट की लागत 375 करोड़ रुपये है। इसरो ने इसे 'फैट बॉय' (मोटा लड़का) नाम दिया है। वहीं स्थानीय मीडिया ने सुपरहिट फिल्म के नाम पर इसे 'बाहुबली' नाम दिया है। फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले अभिनेता प्रभास ने भी इस मौके पर ट्वीट कर बधाई दी। उन्होंने लिखा, 'यह हम सब भारतीयों के लिए गौरव का क्षण है। यह 'बाहुबली' फिल्म से जुड़े हम सभी लोगों के लिए भी सम्मान की बात है कि इसरो के सबसे शक्तिशाली रॉकेट को 'बाहुबली' नाम दिया गया है।'

एक यान, कई उम्मीदें

11 साल पहले चंद्रयान-1 के रूप में भारत ने चांद की ओर पहला मिशन भेजा था। यह एक ऑर्बिटर मिशन था, जिसने 10 महीने चांद का चक्कर लगाया था। चांद पर पानी की खोज का श्रेय भारत के इसी अभियान को जाता है। अब चंद्रयान-2 इसी उपलब्धि की आगे की कडि़यां जोड़ेगा और चांद के पानी व विभिन्न खनिजों की उपस्थिति के प्रमाण जुटाएगा।

इस यान के तीन हिस्से हैं - ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर। भारत में अंतरिक्ष विज्ञान के जनक कहे जाने वाले विक्रम साराभाई के नाम लैंडर का नाम विक्रम रखा गया है। वहीं रोवर का नाम प्रज्ञान है, जो संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञान। ऑर्बिटर सालभर चांद का चक्कर लगाते हुए प्रयोगों को अंजाम देगा। लैंडर और रोवर चांद की सतह पर कुल 14 दिन तक प्रयोग करेंगे।

 टाइमलाइन

- 2:43 मिनट पर चंद्रयान के साथ रवाना हुआ 'बाहुबली'

- 16 मिनट बाद सुरक्षित तरीके से पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हुआ यान

- 5,000 से ज्यादा लोग बने इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह

यह है मिशन का महत्व 

- भारत के लिए : चांद पर यान उतारने वाला चौथा देश बन जाएगा भारत

- इसरो के लिए : दुनिया के सामने अपनी मेधा और क्षमता को साबित करने का मौका

- दुनिया के लिए : पृथ्वी के निर्माणक्रम से लेकर हमारे सौरमंडल को समझने का खुलेगा रास्ता

ऐसा होगा सफर 

- धरती के इर्द-गिर्द : 1 से 23वें दिन तक

- चांद की ओर रवाना : 23वें दिन

- चांद के सफर पर : 23वें से 30वें दिन

- चांद की कक्षा में प्रवेश : 30वें दिन

- चांद के इर्द-गिर्द : 30वें से 42वें दिन

- लैंडर-ऑर्बिटर का अलगाव : 43वें दिन

- रफ्तार धीमी करने की प्रक्रिया : 44वें दिन

- नियंत्रित लैंडिंग की प्रक्रिया : 48वें दिन

- लैंडिंग : 48वें दिन

भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षणः पीएम मोदी

इसरो के प्रक्षेपण पर पीएम मोदी ने कहा कि चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण हमारे वैज्ञानिकों की ताकत और 130 करोड़ भारतीयों के दृढ़ निश्चय को दिखाता है। भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है। आज पूरा देश गौरवान्वित है। यह पूरी तरह से स्वदेशी मिशन है। दिल में भारतीय, भावना में भारतीय।

पूरी दुनिया को इस पल का इंतजार थाः इसरो चेयरमैन

इस मौके पर के. सिवन, इसरो चेयरमैन ने कहा कि इसरो और भारत ही नहीं, पूरी दुनिया को इस पल का इंतजार था। हम सफल रहे। हफ्तेभर पहले आए व्यवधान के बाद हमने शानदार वापसी की। पूरा प्रक्षेपण उम्मीद से भी बेहतर रहा। अब हम मिशन की अगली चुनौतियों के लिए तैयार हैं।

चंद्रयान-2 की सफलता पर नासा ने इसरो को बधाई दी
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को बधाई दी है। नासा ने कहा है कि उसे इसरो द्वारा चांद के दक्षिणी ध्रुव पर किए जाने वाले अध्ययन के नतीजों का इंतजार है।

नासा ने ट्वीट किया, 'चंद्रमा का अध्ययन करने के मिशन चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण पर इसरो को बधाई। हमें अपने डीप स्पेस नेटवर्क का उपयोग करके आपके मिशन का समर्थन करने पर गर्व है और हम यह जानने को उत्सुक हैं कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के बारे में आप क्या पता लगाते हैं, जहां हम कुछ वर्षो में अपने आर्टमिस मिशन से अंतरिक्ष यात्रियों को भेजेंगे।

चांद पर प्लॉट लेने वाले को उम्मीद, सच होगा सपना
16 साल पहले चंद्रमा पर पांच एकड़ का प्लॉट लेने वाले हैदराबाद के राजीव वी. बागडी को उम्मीद है कि चंद्रयान-2 अभियान की सफलता से उनका चांद पर घर बनाने का सपना साकार होगा। राजीव ने न्यूयार्क स्थित लूनर सोसाइटी इंटरनेशनल से 2003 में 140 डॉलर में चांद पर पांच एकड़ का प्लॉट खरीदा था। राजीव ने कहा, चंद्रयान-2 अभियान पूरी मानवता के लिए अच्छा है।

एक भारतीय के रूप में मुझे इस कामयाबी पर गर्व महसूस हो रहा है। मुझे नहीं पता कि मैं चांद को लेकर इतना उत्साहित क्यों हूं। राजीव के पास लूनर रिपब्लिक द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज हैं, जिसमें रजिस्ट्री क्लेम शामिल है। रजिस्ट्री में उनके प्लॉट की लोकेशन तक बताई गई है। राजीव स्टॉक मार्केट विश्लेषक हैं।

Chandrayaan 2: भज्जी का पाक पर तंज, कहा- कुछ देशों के झंडे पर चांद और कुछ के झंडे चांद पर

Posted By: Sanjeev Tiwari