पति-पत्नी के झगड़े में 'जा, मर जा...' कहना अपराध है या नहीं? हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
केरल हाईकोर्ट ने एक पारिवारिक विवाद पर फैसला सुनाते हुए कहा कि गुस्से में 'जा मर जा' कहना आत्महत्या के ...और पढ़ें

पति-पत्नी के झगड़े में 'जा मर जा' कहने पर कोर्ट का फैसला। यह फोटो- एआई जेनरेटेड है

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केरल हाईकोर्ट ने एक पारिवारिक विवाद का फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर पति-पत्नी गुस्से में जा-मर जा जैसे शब्द कहते हैं तो यह आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए यह प्रूफ करना जरूरी है कि आरोपी का इरादा जानबूझकर आत्महत्या के लिए उकसाने का था।
दरअसल, यह मामला क महिला और उसकी छोटी बेटी से संबंधित है, जिसने कथित तौर पर पति द्वारा डांटे जाने पर आत्महत्या कर ली।
क्या है पूरा मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला के पति का किसी दूसरे विवाहित महिला से अवैध संबंध था। जब इस बारे में मृतक महिला को पता चला तो उसने इस बारे में सवाल किया। इसको लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई।
जा मर जा...
अवैध संबंधों पर पति-पत्नी के बीच हुए झगड़े के बीत पति ने कथित तौर पर महिला से कहा, 'जा चली जा यहां से मर जा'। इसके बाद महिला ने 15 सितंबर, 2023 को अपनी साढ़े पांच साल की बेटी के साथ कुएं में कुदकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस में दर्ज हुआ मामला
इसके बाद कासरगोड के मेलपरम्बा पुलिस स्टेशन ने महिला के पति के खिलाफ मामला दर्ज किया। कासरगोड की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अधुर की बरी होने की याचिका खारिज कर दी और उसके खिलाफ आरोप तय करने का फैसला किया।
पति ने किया हाईकोर्ट का रूख
इसके बाद महिला के पति ने हाईकोर्ट का रूख किया। हाईकोर्ट में पति की ओर से दलिल दी गई कि ये शब्द क्षणिक गुस्से में कहे गए थे और इसका मतलब पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं था।
हाईकोर्ट ने इस पर फैसला सुनाते हुए सुप्रईम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि झगड़े के दौरान गुस्से में बोले गए सामान्य या असावधान शब्द आत्महत्या के उकसाने के इरादे में नहीं आते।
उकसाने का कोई इरादा नहीं था
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में 'चली जा और मर जा' शब्द मौखिक बहस के दौरान, आवेश में आकर कहे गए थे, मृतका को आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई इरादा नहीं था। इसलिए आईपीसी की धारा 306 के तहत अपराध नहीं बनता है।
