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ईरान-इजरायल जंग: महंगाई तोड़ेगी कमर... दवा से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम तक, क्या-क्या होगा महंगा?

By RAJEEV KUMAREdited By: Garima Singh
Published: Tue, 03 Mar 2026 08:59 PM (IST)Updated: Tue, 03 Mar 2026 09:09 PM (IST)

ईरान युद्ध के लंबा खिंचने से भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा है। खाद्य तेल, दवा और इलेक्ट्रॉनिक्स के कच्चे ...और पढ़ें

खाद्य तेल, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स के कच्चे माल होंगे महंगे

खाद्य तेल, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स के कच्चे माल होंगे महंगे

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राजीव कुमार, नई दिल्ली। ईरान युद्ध लंबा चला तो महंगाई दर प्रभावित हो सकती है। भारत खाद्य तेल से लेकर दवा, इलेक्ट्रानिक्स आइटम जैसी कई जरूरी चीजों के निर्माण से जुड़े कच्चे माल का आयात करता है और अब इन सब की लागत बढ़ सकती है। कच्चे तेल का सह उत्पाद प्लास्टिक दाने की कीमत में पिछले दो दिनों में ही 12 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है।

प्लास्टिक का इस्तेमाल रोजाना इस्तेमाल होने वाले कई चीजों में होता है। खाद्य तेल के दाम में भी मजबूती का रुख दिख रहा है। दूसरी तरफ, ईरान युद्ध के विराम को लेकर कोई संकेत नहीं मिलने से निर्यातकों की चिंता बढ़ती जा रही है। कंटेनर कंपनियों ने कंटेनर के किराए में 150 प्रतिशत तक का इजाफा कर दिया है। जिन 20 टन के कंटेनर का किराया 1100 डॉलर चल रहा था, अब उनका किराया 3500-3700 डालर तक पहुंच गया है।

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खाद्य तेल, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स के कच्चे माल होंगे महंगे

कंटेनर कंपनियां वार सरचार्ज के रूप में इतना अधिक किराया वसूल रही है। जिन लोगों के माल बीच समंदर में हैं, कंटेनर कंपनियां माल को वापस मंगाने का दबाव उन पर डाल रही है। बासमती चावल निर्यात संघ के उपाध्यक्ष पंकज गोयल ने बताया कि तकरीबन एक से डेढ़ लाख टन चावल रास्ते में हैं। उन्हें वापस मंगाने पर हमारी लागत और बढ़ जाएगी।

हमने इस सिलसिले में विदेश व्यापार महानिदेशक से मुलाकात भी की है। खाड़ी देश व सेंट्रल एशिया के देशों में निर्यात होने वाले अन्य आइटम भी यही हाल है। कनफेडरेशन आफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि यूरोप, अमेरिका व दक्षिण अमेरिका के इलाके में अब केप आफ गुड होप के रास्ते से माल भेजा जाएगा जिससे हमारी लागत 30-40 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। क्योंकि पुराने रूट की तुलना में इस रूट से माल भेजने पर 15 दिन अधिक समय लग सकता है।

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युद्ध के लंबे चलने के आसार 

व्यापारियों ने बताया कि भारत दवा निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे माल का आयात करते और युद्ध लंबा चला तो इनके आयात भी प्रभावित होंगे। मोबाइल फोन से लेकर टीवी, फ्रिज जैसे कई आइटम आयात लागत बढ़ने पर महंगे हो जाएंगे क्योंकि इनके निर्माण से जुड़े कच्चे माल का भारी मात्रा में आयात किया जाता है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के पूर्व चेयरमैन अश्विनी कुमार ने बताया कि युद्ध लंबा चला तो निर्यातकों के भुगतान विभिन्न देशों में फंस जाएंगे। इस युद्ध से सिर्फ भारतीय आयात-निर्यात ही नहीं, वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने जा रही है।

जब माल पहुंचेगा ही नहीं और उसकी बिक्री नहीं होगी तो पैसा फंसना लाजिमी है। कई व्यापार मेले रद हो रहे हैं या वहां व्यापारी नहीं पहुंच पा रहे हैं। अभी जर्मनी में हार्डवेयर का बड़ा शो हो रहा है, लेकिन भारत के व्यापारियों ने वहां जाना टाल दिया। कुछ व्यापारी गए हैं जो रास्ते में फंसे हैं।

IRAN