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नई दिल्ली, एएनआइ। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने के बाद पाकिस्तान भारत के आंतरिक मामले का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश कर रहा है। सुरक्षा परिषद में हार के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने घड़ियाली आंसू बहाने की कोशिश की। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने पाकिस्तान को गंभीरता से नहीं लिया।

जम्मू कश्मीर से जुड़ी फर्जी तस्वीरों और घटिया वीडियो दिखाकर पाकिस्तान बरगलाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया को पाकिस्तान के आरोपों पर भरोसा नहीं है।

वॉल स्ट्रीट में प्रकाशित एक लेख में पत्रकार सदानंद धूमे ने लिखा, 'पाकिस्तानी सेना का पत्रकारों के साथ गलत व्यवहार, अल्पसंख्यक बलूचों और पश्तूनों का प्रतिनिधित्व करने वाले विपक्षी नेता का ढीला रवैया, इन सबको देखने पर पाकिस्तान का यह तर्क गलत है कि कश्मीरी पाकिस्तान में बेहतर होंगे।'

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था टूटने की कगार पर

पत्रकार सदानंद धूमे लिखते हैं कि पाकिस्तान ने लंबे समय से कश्मीर को अपनी विदेश नीति का केंद्रीय मुद्दा बनाया। लेकिन वह कश्मीर पर भारत को मजबूर करने के लिए भारत और अफगानिस्तान में आतंकी संगठनों का समर्थन कर रहा है और ऐसा कर वो अपनी अर्थव्यवस्था की उपेक्षा भी कर रहा है। पाकिस्तान किसी भी हाल में कश्मीर मामले पर भारत से बराबरी करना चाहता है और वो ऐसा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

इसी तरह का एक लेख न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मारिया अबी-हबीब ने भी लिखा है। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान ने पिछले दिनों अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था टूटने की कगार पर है और इसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगी चुप हैं। ये स्थिति पाकिस्तान का हाल बयां कर रही है।

अमेरिका का नहीं मिला समर्थन

संयुक्त राष्ट्र में पांच स्थायी सदस्यों में से चार ने भारत के फैसले पर पाकिस्तान का समर्थन नहीं किया। इसका ताजा उदाहरण इमरान खान का हालिया अमेरिका दौरा है। जहां उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से दोस्ती बात कही लेकिन अमेरिका इस मामले पर उसके साथ नहीं आया। इतना ही नहीं इमरान खान के साथ फोन पर बातचीत के दौरान ट्रंप ने साफ किया कि कश्मीर मुद्दे को भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत के जरिये हल किया जाना चाहिए।

एफबी, ट्विटर के खाते बंद होने पर पाक सेना बौखलाई

पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि वह कश्मीर मुद्दे पर भड़काऊ पोस्ट डालने को लेकर ट्विटर और फेसबुक के कुछ एकाउंट निलंबित करने पर वह इन कंपनियों के संपर्क में है। विगत सोमवार को भारतीय अफसरों की शिकायत के बाद यह एकाउंट बंद किए गए थे।

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने ट्वीट किया कि इन पाकिस्तानी एकाउंट को बंद करने का कारण यह है कि इन सोशल मीडिया कंपनियों के क्षेत्रीय मुख्यालयों में भारतीय कर्मचारी काम करते हैं।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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